बिजनेस | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 12 अक्टूबर 2026
देश में महंगाई एक बार फिर बढ़ गई है। सितंबर 2026 में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 5.54 प्रतिशत पहुंच गई, जबकि अगस्त में यह 4.83 प्रतिशत थी। खाद्य पदार्थों की कीमतों में तेज उछाल ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। यह बढ़ोतरी ऐसे समय में दर्ज हुई है, जब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने साढ़े तीन साल से अधिक समय के अंतराल के बाद ब्याज दरों में बढ़ोतरी की थी।
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के सोमवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, सितंबर में खाद्य महंगाई दर बढ़कर 7.74 प्रतिशत हो गई, जबकि अगस्त में यह 5.97 प्रतिशत थी। यानी खाने-पीने की चीजों की कीमतों में महंगाई का दबाव और तेज हुआ है। इसका सीधा असर उन परिवारों के बजट पर पड़ सकता है, जिनकी आय का बड़ा हिस्सा भोजन और रोजमर्रा की जरूरतों पर खर्च होता है।
भारतीय रिजर्व बैंक को खुदरा महंगाई दर 4 प्रतिशत पर रखने का लक्ष्य दिया गया है, जिसके लिए 2 से 6 प्रतिशत की सीमा निर्धारित है। सितंबर की 5.54 प्रतिशत महंगाई दर इस सीमा के भीतर है, लेकिन यह लगातार चौथा महीना है जब महंगाई 4 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर रही है। इससे कीमतों पर दबाव को लेकर चिंता बनी हुई है।
महंगाई बढ़ने के पीछे कीमतों में वास्तविक मासिक बढ़ोतरी के साथ-साथ प्रतिकूल आधार प्रभाव की भी भूमिका रही। नए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आंकड़ों में, जिनका आधार वर्ष 2024 है, महंगाई दर लगातार ऊंचे स्तर पर दर्ज हो रही है।
खाद्य महंगाई में तेजी आम उपभोक्ताओं के लिए सबसे बड़ी चिंता है, क्योंकि इसका असर सीधे रसोई के खर्च पर पड़ता है। आने वाले समय में महंगाई की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि खाद्य वस्तुओं की कीमतों में कितनी राहत मिलती है और मौद्रिक नीति के कदम कीमतों के दबाव को नियंत्रित करने में कितने प्रभावी साबित होते हैं।



