राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 12 अक्टूबर 2026
चुनाव आयोग और केंद्र सरकार के खिलाफ देशभर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। कांग्रेस के राज्यसभा सांसद डॉ. सैयद नासिर हुसैन ने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा कर आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मौन हैं, केंद्रीय गृह मंत्री कुछ नहीं बोल रहे और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार बंद दरवाजों के पीछे बैठे हैं। उन्होंने चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग करते हुए चार प्रमुख मांगें रखीं—मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया रद्द हो, मतदाता सूची से हटाए गए सभी योग्य मतदाताओं के नाम दोबारा जोड़े जाएं और EVM की जगह बैलेट पेपर से मतदान की व्यवस्था बहाल की जाए। नासिर हुसैन ने कहा कि मतदान का अधिकार लोकतंत्र की बुनियाद है और इसे किसी से छीने जाने नहीं दिया जाना चाहिए।
नासिर हुसैन ने उठाए चुनाव आयोग की जवाबदेही पर सवाल
डॉ. सैयद नासिर हुसैन ने अपनी पोस्ट में कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों में लोग चुनाव आयोग और भारत सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतर रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका की भी आलोचना की।
उनका कहना है कि चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब सार्वजनिक रूप से दिया जाना चाहिए। लोकतंत्र में चुनाव आयोग की जिम्मेदारी केवल चुनाव कराना नहीं, बल्कि मतदाताओं का भरोसा बनाए रखना भी है। जब मतदाता सूची और चुनावी व्यवस्था को लेकर सवाल उठते हैं, तो संबंधित संस्थाओं से पारदर्शी जवाब की अपेक्षा की जाती है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग
कांग्रेस सांसद ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। यह मांग चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और उसकी निष्पक्षता को लेकर विपक्ष की आपत्तियों के बीच सामने आई है। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर स्पष्ट जवाब नहीं मिल रहे हैं।
हालांकि, इन राजनीतिक आरोपों पर चुनाव आयोग और केंद्र सरकार का पक्ष भी महत्वपूर्ण है। चुनावी संस्थाओं पर जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए शिकायतों और आपत्तियों का तथ्यों के आधार पर जवाब देना जरूरी है।
SIR रद्द करने और हटाए गए मतदाताओं के नाम जोड़ने की मांग
नासिर हुसैन ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया को रद्द करने की मांग की है। उन्होंने यह भी कहा कि मतदाता सूची से हटाए गए हर योग्य मतदाता का नाम दोबारा जोड़ा जाना चाहिए।
मतदाता सूची में नाम होना मतदान के अधिकार के इस्तेमाल के लिए बुनियादी शर्त है। इसलिए किसी योग्य मतदाता का नाम गलत तरीके से हटने की शिकायत सामने आती है, तो उसका समय पर समाधान होना चाहिए। मतदाता सूची की शुद्धता और योग्य नागरिकों का मतदान से वंचित न रहना—दोनों ही चुनावी व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हैं।
EVM की जगह बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग
कांग्रेस सांसद ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) की जगह बैलेट पेपर से मतदान कराने की मांग भी उठाई। यह मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक बहस का हिस्सा रहा है। विपक्ष के कुछ नेता EVM की जगह पारंपरिक मतपत्रों से मतदान कराने की मांग करते रहे हैं, जबकि चुनाव आयोग EVM के इस्तेमाल का समर्थन करता रहा है।
इस मुद्दे पर किसी भी निर्णय के लिए चुनावी सुरक्षा, पारदर्शिता, मतों की विश्वसनीयता और उपलब्ध तकनीकी साक्ष्यों पर आधारित चर्चा महत्वपूर्ण है।
‘मतदान का अधिकार लोकतंत्र की बुनियाद’
अपनी पोस्ट के अंत में नासिर हुसैन ने कहा कि मतदान का अधिकार लोकतंत्र की बुनियाद है और किसी को भी इसे छीनने नहीं देना चाहिए। उनकी पोस्ट के साथ ‘सेव डेमोक्रेसी’, ‘सेव योर वोट’, ‘वोट चोरी’ और ‘स्टॉप SIR’ जैसे हैशटैग भी साझा किए गए।
चुनावी पारदर्शिता को लेकर जारी बहस के बीच विपक्ष की इन मांगों ने मतदाता सूची, चुनाव आयोग की जवाबदेही और मतदान की व्यवस्था पर चर्चा को फिर केंद्र में ला दिया है। अब इन मुद्दों पर चुनाव आयोग और केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी।



