राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 11 अक्टूबर 2026
यूट्यूबर ध्रुव राठी को गुरुग्राम पुलिस की क्राइम ब्रांच ने रविवार, 11 अक्टूबर की रात करीब 2 बजे हिरासत से रिहा कर दिया। यह कार्रवाई दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच हुई। द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, ध्रुव राठी को 10 अक्टूबर को गुरुग्राम के सेक्टर-56 स्थित उनके आवास से हिरासत में लिया गया था। राठी ने अपनी हिरासत पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि उन्हें सोते समय घर से उठा लिया गया और उनके साथ अपराधी जैसा व्यवहार किया गया। उन्होंने इस कार्रवाई को ‘अपहरण’ बताया। दूसरी ओर, गुरुग्राम पुलिस के प्रवक्ता के अनुसार, फिलहाल उनके खिलाफ कोई आरोप दर्ज नहीं किया गया है। पुलिस सूत्र ने यह भी कहा कि निषेधाज्ञा के बावजूद जंतर-मंतर जाने की कोशिश करने पर उन्हें दोबारा हिरासत में लिया जा सकता है या आगे कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
घर से हिरासत में लेने पर ध्रुव राठी ने उठाए सवाल
ध्रुव राठी ने सोशल मीडिया पर अपनी हिरासत का विवरण साझा करते हुए दावा किया कि सादे कपड़ों में आए लोगों ने उन्हें उस समय घर से उठा लिया, जब वह सो रहे थे। उनके अनुसार, घर के बाहर बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे और उन्हें इस तरह बाहर ले जाया गया, मानो वह कोई अपराधी हों। राठी ने सवाल उठाया कि यदि पुलिस को उनसे पूछताछ करनी थी या किसी आदेश के तहत कार्रवाई करनी थी, तो इसकी प्रक्रिया स्पष्ट और पारदर्शी क्यों नहीं रखी गई। उन्होंने इस अनुभव को ‘अपहरण’ करार दिया। यह राठी का आरोप है; उपलब्ध रिपोर्ट में पुलिस की ओर से उनके इस दावे पर विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। ऐसे मामलों में कार्रवाई का आधार, संबंधित आदेश और हिरासत की प्रक्रिया स्पष्ट होना महत्वपूर्ण है।
पुलिस ने कहा—कोई आरोप दर्ज नहीं, दोबारा कार्रवाई संभव
द हिंदू के अनुसार, गुरुग्राम पुलिस के प्रवक्ता ने पुष्टि की कि ध्रुव राठी को रविवार तड़के रिहा कर दिया गया और उनके खिलाफ कोई आरोप दर्ज नहीं किया गया है। हालांकि, पुलिस सूत्र ने चेतावनी दी कि यदि वह निषेधाज्ञा लागू होने के बावजूद जंतर-मंतर जाने की कोशिश करते हैं, तो उन्हें फिर हिरासत में लिया जा सकता है या आगे कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। इससे स्पष्ट है कि रिहाई के बाद भी प्रदर्शन से संबंधित प्रतिबंधों को लेकर स्थिति पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। किसी भी संभावित कार्रवाई का आधार लागू आदेशों और संबंधित कानूनी प्रावधानों पर निर्भर करेगा।
दिल्ली में प्रदर्शन के बीच व्यापक हिरासत
ध्रुव राठी की हिरासत ऐसे समय हुई, जब दिल्ली में CJP के प्रदर्शन के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी। द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस सूत्रों ने बताया कि राजधानी के अलग-अलग स्थानों से 7,000 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर आयोजित किए गए थे। दिल्ली में जंतर-मंतर और मध्य दिल्ली के आसपास बैरिकेडिंग, जांच और यातायात संबंधी पाबंदियां भी लगाई गई थीं। इन घटनाओं ने प्रदर्शन के अधिकार, पुलिस की शक्तियों और निषेधाज्ञा के दायरे को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
विरोध का अधिकार और कानून की प्रक्रिया
ध्रुव राठी की रिहाई के बाद अब इस मामले में दो बातें महत्वपूर्ण हैं—एक, हिरासत के दौरान अपनाई गई प्रक्रिया और राठी के आरोपों की जांच; दूसरी, दिल्ली में जारी प्रदर्शन संबंधी प्रतिबंधों का कानूनी आधार। शांतिपूर्ण विरोध लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जबकि प्रशासन को कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी भी निभानी होती है। इन दोनों के बीच संतुलन के लिए जरूरी है कि पुलिस की कार्रवाई स्पष्ट कानूनी आधार पर हो और संबंधित व्यक्तियों को अपने अधिकारों के इस्तेमाल का उचित अवसर मिले।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ध्रुव राठी रिहा हो चुके हैं और उनके खिलाफ कोई आरोप दर्ज नहीं किया गया है। हालांकि, पुलिस ने निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने की स्थिति में आगे कार्रवाई की संभावना जताई है। मामले में आगे क्या होगा, यह संबंधित आदेशों, पुलिस के कदमों और उपलब्ध तथ्यों पर निर्भर करेगा।



