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तुषार गांधी की हिरासत पर फडणवीस सरकार से सवाल—‘गिरफ्तारी मेरे लिए सम्मान का प्रमाण’, आंदोलन जारी रखने का ऐलान

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | मुंबई | 11 अक्टूबर 2026

मुंबई में विरोध प्रदर्शन से पहले महात्मा गांधी के प्रपौत्र तुषार गांधी को हिरासत में लिए जाने से महाराष्ट्र की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। तुषार गांधी ने भाजपा सरकार पर नागरिकों के विरोध को रोकने के लिए पुलिस का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया और स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन थमने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि विरोध तब तक जारी रहेगा, जब तक भाजपा की ‘डबल इंजन सरकार’ सत्ता से बाहर नहीं हो जाती। तुषार गांधी, उनकी बेटी और लगभग 600 प्रदर्शनकारियों को मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में प्रस्तावित प्रदर्शन के लिए जाते समय हिरासत में लिया गया था। यह प्रदर्शन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के उस आंदोलन के समर्थन में आयोजित किया जा रहा था, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई गई है। हिरासत के बाद अपने आवास पर पत्रकारों से बात करते हुए तुषार गांधी ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर निशाना साधा और पुलिस की कार्रवाई को लेकर कई सवाल उठाए।

‘सत्याग्रहियों की कतार में खड़ा करना मेरे लिए सम्मान’

तुषार गांधी ने अपनी हिरासत पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “मामला सिर्फ मेरे खिलाफ दर्ज होना चाहिए था। यह मेरे सम्मान का प्रमाण है। उन्होंने मुझे सत्याग्रहियों की कतार में खड़ा कर दिया है। मैं देवेंद्र फडणवीस को धन्यवाद देता हूं।” उनके बयान में गिरफ्तारी को आंदोलन से पीछे हटने की वजह के बजाय अपने विरोध को जारी रखने के संकल्प के रूप में पेश किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आंदोलन से घबराकर पुलिस तंत्र का सहारा ले रही है और सत्ताधारी नेताओं के निर्देश पर कार्रवाई की जा रही है। पुलिस के व्यवहार पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने उसे सत्ता में बैठे लोगों के इशारों पर काम करने वाला बताया। ये तुषार गांधी के आरोप हैं। इस मामले में सरकार और पुलिस का पक्ष सामने आना भी जरूरी है, ताकि हिरासत के आधार और प्रशासनिक कार्रवाई का पूरा संदर्भ स्पष्ट हो सके।

मुंबई का प्रदर्शन दिल्ली के CJP आंदोलन के समर्थन में

मुंबई में प्रदर्शन का उद्देश्य दिल्ली में चल रहे CJP आंदोलन के प्रति समर्थन जताना था। इस आंदोलन में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। दिल्ली से शुरू हुआ यह विवाद अब अन्य शहरों में भी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं पैदा कर रहा है। तुषार गांधी और अन्य प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने के बाद प्रदर्शन की अनुमति और शांतिपूर्ण असहमति के अधिकार को लेकर बहस तेज हो गई है। तुषार गांधी का कहना है कि प्रदर्शनकारी अनुशासन के साथ अपनी बात रखना चाहते थे और आंदोलन को अराजक बताना उचित नहीं है। उनका आरोप है कि सत्ताधारी भाजपा इस आंदोलन को इसलिए विरोध की नजर से देख रही है, क्योंकि यह उसकी सत्ता को चुनौती देता है। यह उनका राजनीतिक आकलन है; प्रदर्शन की परिस्थितियों और पुलिस की कार्रवाई से जुड़े तथ्यों का स्वतंत्र परीक्षण भी आवश्यक है।

स्वतंत्रता संग्राम का हवाला, अदालतों से हस्तक्षेप की अपील

तुषार गांधी ने प्रदर्शन पर लगाई गई पाबंदियों पर सवाल उठाते हुए स्वतंत्रता आंदोलन की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि यदि महात्मा गांधी और भगत सिंह ने आंदोलन आयोजित करने से पहले अनुमति लेने को अनिवार्य शर्त मान लिया होता, तो भारत की आजादी का संघर्ष किस दिशा में जाता? इस उदाहरण के जरिए उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में असहमति और विरोध को केवल अनुमति से जुड़ी प्रशासनिक प्रक्रिया के नजरिये से नहीं देखना चाहिए। उन्होंने अदालतों से भी आग्रह किया कि पुलिस को शांति बनाए रखने के निर्देश दिए जाएं। उनके अनुसार, प्रदर्शनकारी अनुशासित तरीके से अपनी मांगें सामने रखना चाहते थे। हालांकि, स्वतंत्रता संग्राम की ऐतिहासिक परिस्थितियां और आज लागू संवैधानिक तथा कानूनी व्यवस्था एक जैसी नहीं हैं। इसलिए शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार के साथ सार्वजनिक व्यवस्था और कानून से जुड़े पहलुओं को भी ध्यान में रखना होगा।

‘आंदोलन सफल हुआ तो पुलिस भी मुक्त होगी’

तुषार गांधी ने कहा कि आंदोलन की सफलता से पुलिस भी उस स्थिति से बाहर निकल सकेगी, जिसे उन्होंने सरकार के प्रति उसकी अधीनता बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस का इस्तेमाल नागरिकों की आवाज रोकने के लिए हो रहा है। महाराष्ट्र की भाजपा सरकार को निशाने पर लेते हुए उन्होंने दोहराया कि आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक राज्य की ‘डबल इंजन सरकार’ सत्ता से नहीं हटती। उनके बयान से जाहिर है कि वह इस विरोध को केवल मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग तक सीमित नहीं मानते, बल्कि इसे सरकार के रवैये और नागरिकों के विरोध के अधिकार से जुड़ा व्यापक मुद्दा मानते हैं।

विरोध की स्वतंत्रता और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन जरूरी

तुषार गांधी की हिरासत ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति, पुलिस की जिम्मेदारियों और नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों पर फिर बहस शुरू कर दी है। तुषार गांधी सरकार पर पुलिस मशीनरी के दुरुपयोग का आरोप लगा रहे हैं, जबकि सार्वजनिक प्रदर्शनों के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है। ऐसे मामलों में प्रतिबंधों और हिरासत के आधार स्पष्ट होने चाहिए तथा उठाई गई शिकायतों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

दिल्ली में CJP के आंदोलन और मुंबई में उसके समर्थन में प्रस्तावित प्रदर्शन ने चुनावी पारदर्शिता तथा विरोध के अधिकार को राष्ट्रीय राजनीतिक बहस का हिस्सा बना दिया है। तुषार गांधी ने हिरासत के बावजूद आंदोलन जारी रखने की बात कही है। अब आगे का घटनाक्रम आंदोलनकारियों की रणनीति, प्रशासन की कार्रवाई और संबंधित कानूनी सवालों पर अदालतों के रुख से तय होगा।

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