राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 11 अक्टूबर 2026
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली और देश की प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल उठे हैं। कांग्रेस ने रविवार को दावा किया कि NTA में कथित गंभीर लापरवाही और अनियमितताओं पर संसदीय स्थायी समिति की रिपोर्ट ने शिक्षा व्यवस्था की जवाबदेही को लेकर महत्वपूर्ण मुद्दे सामने रखे हैं। पार्टी ने उम्मीद जताई कि नरेंद्र मोदी सरकार अपने अहंकार को छोड़कर समिति की सिफारिशों को गंभीरता से लेगी और परीक्षा प्रणाली में जरूरी सुधार करेगी। कांग्रेस के अनुसार, ‘Reforms and Strengthening of the National Testing Agency (NTA)’ शीर्षक वाली रिपोर्ट में शिक्षा मंत्रालय के उस दावे पर सवाल उठाया गया है, जिसमें कहा गया था कि 2017 में NTA की स्थापना से लेकर 2025 तक उसकी किसी परीक्षा में पेपर लीक नहीं हुआ। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इस दावे को समिति के सामने किया गया ‘स्पष्ट रूप से गलत’ दावा बताया। हालांकि, रिपोर्ट के निष्कर्षों, मंत्रालय के जवाब और प्रत्येक मामले के तथ्यों को अलग-अलग समझना जरूरी है।
संसदीय समिति की रिपोर्ट में NTA की कार्यप्रणाली पर सवाल
कांग्रेस के मुताबिक, संसदीय स्थायी समिति ने अपनी रिपोर्ट में NTA और शिक्षा मंत्रालय की कार्यप्रणाली में गंभीर कमियों तथा कथित अनियमितताओं का उल्लेख किया है। पार्टी ने रिपोर्ट का हवाला देते हुए नौ पेपर लीक की घटनाओं और एजेंसी के पास मौजूद लगभग 590 करोड़ रुपये के राजस्व अधिशेष का मुद्दा उठाया। कांग्रेस का सवाल है कि जब लाखों विद्यार्थी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में समय, मेहनत और पैसा लगाते हैं, तब परीक्षा कराने वाली संस्था की जवाबदेही सर्वोच्च प्राथमिकता क्यों नहीं होनी चाहिए? पेपर लीक की घटनाएं केवल परीक्षा के प्रश्नपत्र तक सीमित समस्या नहीं हैं। इनका असर विद्यार्थियों के भविष्य, परिवारों के खर्च, भर्ती प्रक्रिया और संस्थागत भरोसे पर पड़ता है। हालांकि, नौ पेपर लीक से जुड़ा विवरण और प्रत्येक घटना की स्थिति रिपोर्ट के मूल पाठ के आधार पर ही पूरी तरह स्पष्ट की जा सकती है।
‘पेपर लीक नहीं हुआ’ वाले दावे पर कांग्रेस का सवाल
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि शिक्षा मंत्रालय ने समिति के सामने दावा किया था कि NTA की स्थापना 2017 से 2025 तक उसकी किसी परीक्षा में पेपर लीक नहीं हुआ। रमेश ने इस दावे को ‘स्पष्ट रूप से गलत और दुस्साहसपूर्ण’ बताया। इस बयान के जरिए कांग्रेस ने परीक्षा सुरक्षा और सरकारी जवाबदेही को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। परीक्षा में गड़बड़ी की शिकायत सामने आने पर सबसे जरूरी है कि जांच निष्पक्ष हो, तथ्यों को सार्वजनिक किया जाए और दोषियों की जिम्मेदारी तय की जाए। विद्यार्थियों के लिए यह जानना भी आवश्यक है कि परीक्षा रद्द होने, दोबारा आयोजित होने या जांच लंबित रहने की स्थिति में उनके हितों की रक्षा कैसे होगी। किसी भी संस्था की विश्वसनीयता केवल उसके दावों से नहीं, बल्कि पारदर्शी प्रक्रियाओं और शिकायतों के प्रभावी निपटारे से बनती है।
590 करोड़ रुपये के अधिशेष पर भी उठे सवाल
कांग्रेस ने रिपोर्ट का हवाला देते हुए NTA के लगभग 590 करोड़ रुपये के राजस्व अधिशेष का मुद्दा भी उठाया। पार्टी ने सवाल किया कि यदि एजेंसी के पास इतनी बड़ी राशि उपलब्ध थी, तो परीक्षा सुरक्षा, तकनीकी व्यवस्था और विद्यार्थियों की सुविधा को मजबूत करने के लिए उसका इस्तेमाल किस तरह किया गया। यह सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था की जिम्मेदारी केवल प्रश्नपत्र तैयार कराने और परीक्षा केंद्रों पर परीक्षा कराने तक सीमित नहीं है। उसे प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, डिजिटल प्रणालियों की विश्वसनीयता, शिकायतों के समाधान और परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता भी सुनिश्चित करनी होती है। हालांकि, राजस्व अधिशेष का अर्थ अपने आप यह नहीं होता कि पूरी राशि विद्यार्थियों पर खर्च की जानी चाहिए थी। इसके लिए बजट, खर्च, वैधानिक जिम्मेदारियों और समिति की वास्तविक सिफारिशों का अध्ययन जरूरी है।
विद्यार्थियों के भविष्य और परीक्षा व्यवस्था पर असर
NTA से जुड़ा विवाद ऐसे समय में महत्वपूर्ण हो जाता है, जब देश में बड़ी संख्या में विद्यार्थी मेडिकल, इंजीनियरिंग और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के जरिए उच्च शिक्षा तथा रोजगार के अवसर हासिल करने की कोशिश करते हैं। पेपर लीक या परीक्षा संबंधी अनियमितता की आशंका से विद्यार्थियों का भरोसा प्रभावित होता है। परीक्षा रद्द होने या दोबारा आयोजित किए जाने की स्थिति में उन्हें अतिरिक्त तैयारी, आर्थिक खर्च और मानसिक दबाव का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए परीक्षा व्यवस्था में सुधार का मुद्दा किसी एक राजनीतिक दल के आरोप-प्रत्यारोप से आगे का विषय है। इसमें सुरक्षित प्रश्नपत्र वितरण, परीक्षा केंद्रों की निगरानी, शिकायतों की समयबद्ध जांच और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई जैसे उपाय महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
सरकार के सामने जवाबदेही और सुधार की चुनौती
कांग्रेस ने मोदी सरकार से संसदीय समिति की रिपोर्ट को गंभीरता से लेने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि शिक्षा मंत्रालय और NTA की कार्यप्रणाली में सामने आई कमियों पर ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। दूसरी ओर, रिपोर्ट के निष्कर्षों और सरकार की प्रतिक्रिया को समझने के लिए समिति की पूरी रिपोर्ट, मंत्रालय का पक्ष और संबंधित मामलों की जांच के नतीजे देखना जरूरी होगा।
इस विवाद का मूल प्रश्न विद्यार्थियों के भरोसे से जुड़ा है। यदि परीक्षा प्रणाली में कमियां सामने आती हैं, तो उन्हें स्वीकार कर सुधार करना और जवाबदेही तय करना संस्थागत मजबूती के लिए जरूरी है। सरकार और NTA के सामने चुनौती है कि वे परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने के लिए उठाए गए कदमों की स्पष्ट जानकारी दें। अंततः विद्यार्थियों को राजनीतिक बयानबाजी नहीं, बल्कि ऐसी परीक्षा व्यवस्था चाहिए जिसमें उनकी मेहनत का मूल्य सुरक्षित रहे और किसी भी अनियमितता की स्थिति में न्याय मिलने का भरोसा कायम रहे।



