राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 10 अक्टूबर 2026
दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रस्तावित प्रदर्शन को रोकने के लिए की गई कार्रवाई अब हवाई जहाज के भीतर पुलिस के प्रवेश तक पहुंच गई है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के तीन नेताओं—अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका—को शनिवार को दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एयर इंडिया की उड़ान AI 2428 के उतरने के बाद विमान के भीतर से हिरासत में ले लिया गया। द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली पुलिस के जवान केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के अधिकारियों के साथ विमान में दाखिल हुए और नेताओं को उनकी सीटों से ही अपने साथ ले गए। बताया गया है कि यह घटनाक्रम एयरलाइन के लिए भी अप्रत्याशित था।
यह कार्रवाई ऐसे समय हुई, जब सीजेपी ने जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन का आह्वान किया था। प्रदर्शन से पहले राजधानी में सुरक्षा बढ़ाई गई, रास्तों पर बैरिकेडिंग की गई और कई नेताओं तथा कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया। लेकिन विमान के भीतर हुई इस कार्रवाई ने एक नया सवाल खड़ा कर दिया है—हवाई अड्डे की सुरक्षा व्यवस्था के बीच पुलिस को विमान में प्रवेश की अनुमति किस प्रक्रिया के तहत मिली और क्या इस बारे में संबंधित एयरलाइन को पहले से जानकारी दी गई थी?
एयर इंडिया ने BCAS से मांगा स्पष्टीकरण
रिपोर्ट के अनुसार, एयर इंडिया ने विमान में पुलिस के प्रवेश और कार्रवाई के संबंध में ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी (BCAS) को पत्र लिखकर स्पष्टीकरण मांगा है। एयरलाइन ने यह जानना चाहा है कि पुलिस को विमान के भीतर प्रवेश कैसे मिला और एयर इंडिया को इस कार्रवाई की जानकारी पहले से क्यों नहीं दी गई।
यह पहल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि विमान के भीतर सुरक्षा और परिचालन से जुड़े मामलों में एयरलाइन, हवाई अड्डा सुरक्षा एजेंसियों और कानून लागू करने वाली संस्थाओं के बीच समन्वय की भूमिका होती है। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट में BCAS की ओर से इस पत्र पर कोई जवाब या पुलिस की कार्रवाई के लिए अपनाई गई पूरी प्रक्रिया का विवरण नहीं दिया गया है।
सीटों से हिरासत तक, आखिर क्या हुआ?
द हिंदू के मुताबिक, हवाई अड्डे के सुरक्षा कर्मियों ने इस घटनाक्रम को असामान्य बताया। दिल्ली पुलिस के जवान CISF अधिकारियों के साथ विमान में पहुंचे और तीनों सीजेपी कार्यकर्ताओं को उनकी सीटों से हिरासत में लिया। CISF देश के प्रमुख हवाई अड्डों पर सुरक्षा और प्रवेश नियंत्रण की जिम्मेदारी संभालता है।
इस घटना के बाद सबसे अहम सवाल कार्रवाई की वैधानिक प्रक्रिया और उसके समन्वय को लेकर हैं। क्या पुलिस ने किसी औपचारिक आदेश या कानूनी आधार पर विमान में प्रवेश किया? क्या एयरलाइन को सूचित करना आवश्यक था और यदि था, तो उसका पालन क्यों नहीं हुआ? इन सवालों का स्पष्ट उत्तर संबंधित एजेंसियों के आधिकारिक स्पष्टीकरण के बाद ही मिल सकेगा।
प्रदर्शन से पहले कार्रवाई पर बढ़ा विवाद
सीजेपी का प्रस्तावित प्रदर्शन चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर उठाए गए सवालों से जुड़ा है। संगठन मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहा है। इन आरोपों और मांगों पर अलग-अलग राजनीतिक पक्षों के अपने दावे हैं, जिनकी जांच तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर होनी चाहिए।
लेकिन किसी प्रदर्शन के राजनीतिक उद्देश्य से अलग, हिरासत की प्रक्रिया और नागरिकों के अधिकारों से जुड़े सवाल भी महत्वपूर्ण हैं। कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है, मगर कार्रवाई का कानूनी आधार और प्रक्रिया स्पष्ट होना भी जरूरी है। विमान के भीतर हुई इस घटना में एयर इंडिया का BCAS से जवाब मांगना इसी पारदर्शिता की जरूरत को रेखांकित करता है।
जवाबदेही के सवाल अब विमान तक पहुंचे
दिल्ली में प्रदर्शन से पहले व्यापक सुरक्षा व्यवस्था और हिरासत की कार्रवाई पहले ही राजनीतिक विवाद का विषय बनी हुई थी। अब विमान के भीतर नेताओं को हिरासत में लिए जाने और एयरलाइन को कथित तौर पर पूर्व सूचना न दिए जाने के मामले ने सुरक्षा एजेंसियों के समन्वय पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
फिलहाल, उपलब्ध रिपोर्ट के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी कि कार्रवाई में नियमों का उल्लंघन हुआ। लेकिन पुलिस के विमान में प्रवेश की अनुमति, अपनाई गई प्रक्रिया और एयरलाइन को सूचना देने के सवालों पर स्पष्ट जवाब जरूरी हैं। BCAS और संबंधित एजेंसियों का पक्ष सामने आने के बाद ही इस कार्रवाई की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।



