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दिल्ली में 10 हज़ार से ज्यादा हिरासत में, राहुल-ममता-केजरीवाल ने सरकार को घेरा; सड़क से मेट्रो तक पाबंदियां

जंतर-मंतर प्रदर्शन पर दिल्ली में भारी सख्ती, 45 मेट्रो स्टेशन बंद; छात्र नेताओं के फोन जब्त करने और वकीलों से मिलने से रोकने के आरोप, मुंबई-बेंगलुरु में भी विरोध

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 10 अक्टूबर 2026

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को वापस लेने की मांग को लेकर शनिवार को दिल्ली में राजनीतिक टकराव तेज हो गया। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित जंतर-मंतर प्रदर्शन से पहले पुलिस की व्यापक कार्रवाई ने राजधानी में असाधारण स्थिति पैदा कर दी। द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, दोपहर दो बजे तक दिल्ली में 5,000 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। जंतर-मंतर की ओर जाने वाले रास्तों पर बैरिकेडिंग की गई, जबकि सुरक्षा कारणों से दिल्ली मेट्रो के 45 स्टेशनों को रात 10 बजे तक बंद रखने का फैसला किया गया। इस कार्रवाई को लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। वहीं, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल भी विरोध में सामने आए। दोनों नेताओं को हिरासत में लिए जाने की खबरों ने राजनीतिक विवाद को और बढ़ा दिया। विपक्ष ने पुलिस कार्रवाई को लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार पर हमला बताया, जबकि दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा और कानून-व्यवस्था संबंधी चिंताओं तथा प्रदर्शन की अनुमति नहीं होने का हवाला दिया।

राहुल गांधी का मोदी सरकार पर तीखा हमला

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वीडियो जारी कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल का नाम लेते हुए तीखी राजनीतिक आलोचना की। राहुल गांधी ने कहा कि सरकार चाहे जितनी पुलिस तैनात कर दे और कितने भी नेताओं तथा युवाओं को हिरासत में ले ले, विपक्ष पीछे हटने वाला नहीं है। उन्होंने युवाओं से प्रदर्शन जारी रखने की अपील करते हुए कहा, “प्रदर्शन करते रहिए। हमें आप पर गर्व है।” राहुल ने दावा किया कि विपक्ष के पास चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी है और वह संविधान तथा जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगा। उन्होंने सरकार पर विरोध की आवाज दबाने का आरोप लगाया। हालांकि, चुनावी अनियमितताओं से संबंधित उनके आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित संस्थाओं का पक्ष महत्वपूर्ण है।

ममता बनर्जी और केजरीवाल हिरासत में, विपक्ष ने उठाए सवाल

तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी को दिल्ली के साउथ एवेन्यू इलाके में पार्टी नेताओं के साथ विरोध के दौरान हिरासत में लिया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, ममता बनर्जी और अन्य तृणमूल नेता जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होना चाहते थे, लेकिन उन्हें आगे जाने से रोक दिया गया। इसके बाद उन्होंने साउथ एवेन्यू के पास ही धरना शुरू कर दिया। पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। इस कार्रवाई को लेकर तृणमूल कांग्रेस ने सवाल उठाए और शांतिपूर्ण विरोध की अनुमति देने की मांग की।

आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को भी लोधी एस्टेट स्थित उनके आवास के बाहर उस समय हिरासत में लिया गया, जब वह जंतर-मंतर के प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे थे। आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार चुनावी प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों का जवाब देने के बजाय विपक्षी नेताओं और प्रदर्शनकारियों को रोकने में लगी है। पार्टी ने हिरासत की कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों के खिलाफ बताया। दूसरी ओर, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि राजधानी को बंधक बनाने और लोकतंत्र के नाम पर अराजकता फैलाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। उन्होंने आम नागरिकों, कामगारों और मरीजों को होने वाली परेशानियों का मुद्दा भी उठाया।

छात्र नेताओं के फोन जब्त करने और अलग कमरे में रखने का आरोप

इस बीच, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) ने आरोप लगाया कि उसकी अध्यक्ष नेहा बोरा और कार्यकर्ता नर्मा को मैदान गढ़ी स्थित हिरासत केंद्र में एक अलग कमरे में रखा गया। संगठन के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने दोनों के मोबाइल फोन अपने कब्जे में ले लिए और वकीलों को उनसे मिलने की अनुमति नहीं दी। AISA ने फोन तत्काल लौटाने और कानूनी सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है। इन आरोपों पर पुलिस का विस्तृत स्पष्टीकरण उपलब्ध रिपोर्ट में सामने नहीं आया है।

हिरासत में ली गईं नेहा बोरा ने वीडियो संदेश जारी कर कहा, “मैं हिरासत में हूं, आंदोलन नहीं।” उन्होंने प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्वक अपनी आवाज उठाते रहने की अपील की। छात्र संगठनों का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग करना और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना उनका लोकतांत्रिक अधिकार है। हालांकि, पुलिस ने सुरक्षा और कानून-व्यवस्था संबंधी कारणों से प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी।

विमान के भीतर से CJP नेताओं को हिरासत में लिया

पुलिस कार्रवाई का दायरा CJP के शीर्ष नेतृत्व तक भी पहुंचा। द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके और कार्यकर्ता सौरव दास तथा आशुतोष रांका को शनिवार को दिल्ली पहुंचने के बाद एयर इंडिया की उड़ान AI 2428 के भीतर से हिरासत में ले लिया गया। दिल्ली पुलिस के जवान CISF अधिकारियों के साथ विमान में पहुंचे और तीनों को उनकी सीटों से अपने साथ ले गए। इस कार्रवाई से एयरलाइन भी हैरान रह गई।

इसके बाद एयर इंडिया ने ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी (BCAS) को पत्र लिखकर विमान में पुलिस के प्रवेश की प्रक्रिया और एयरलाइन को पहले से सूचना नहीं दिए जाने पर स्पष्टीकरण मांगा। इस घटनाक्रम ने विमानन सुरक्षा नियमों और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। CJP ने अपने नेताओं की हिरासत को प्रदर्शन रोकने की कोशिश बताते हुए कहा कि नेतृत्व के हिरासत में होने के बावजूद आंदोलन जारी रहेगा।

सोनम वांगचुक की चेतावनी, प्रियंका गांधी ने भी सरकार को घेरा

वैज्ञानिक और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने दिल्ली में हिरासत की कार्रवाई की आलोचना करते हुए मौजूदा हालात को “अघोषित आपातकाल” बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि रविवार तक हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को रिहा नहीं किया गया, तो वह दोबारा अनशन या पदयात्रा करने पर विचार करेंगे।

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने विपक्षी नेताओं और प्रदर्शनकारियों की हिरासत का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों पर जवाबदेही की मांग से सरकार घबरा रही है। प्रियंका ने मौजूदा स्थिति को लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय बताया। उनके आरोप राजनीतिक दावे हैं और चुनावी गड़बड़ी के संबंध में किसी अंतिम निष्कर्ष के रूप में नहीं देखे जाने चाहिए।

दिल्ली से मुंबई, बेंगलुरु और विशाखापत्तनम तक प्रदर्शन

दिल्ली में पुलिस कार्रवाई के बीच देश के अन्य शहरों में भी विरोध प्रदर्शन हुए। मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों और पुलिस के बीच झड़प की खबरें सामने आईं। अभिनेता इमरान खान और शिवसेना (यूबीटी) विधायक वरुण सरदेसाई को हिरासत में लिया गया। बेंगलुरु में AISA के कम से कम 50 छात्रों को फ्रीडम पार्क से हिरासत में लिया गया। पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शन की अनुमति थी, लेकिन मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय तक मार्च की अनुमति नहीं दी गई थी।

विशाखापत्तनम में INDIA गठबंधन के नेताओं और छात्र संगठनों ने प्रदर्शन कर मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे तथा मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के आरोपों की जांच की मांग की। इस बीच, दिल्ली में सुरक्षा प्रतिबंधों का असर आम नागरिकों पर भी पड़ा। खान मार्केट और आसपास के इलाकों में काम करने वाले कई दिहाड़ी मजदूर तथा कर्मचारी अपने कार्यस्थलों तक नहीं पहुंच सके। दिल्ली हाट को भी सुरक्षा कारणों से बंद कर दिया गया।

चुनावी सवालों का जवाब जरूरी, शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार पर भी बहस

CJP और विपक्षी दल मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण तथा फॉर्म-6 से जुड़े बदलावों पर सवाल उठा रहे हैं। उनका आरोप है कि इन प्रक्रियाओं से पात्र मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। इन आरोपों की जांच तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर होनी चाहिए। चुनाव आयोग की जिम्मेदारी मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने के साथ पात्र नागरिकों के मतदान अधिकारों की रक्षा करना भी है।

दिल्ली पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई करने की बात कही है। वहीं, विपक्ष का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों को व्यापक स्तर पर हिरासत में लेकर शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार को सीमित किया गया। इन परस्पर विरोधी दावों के बीच हिरासत का कानूनी आधार, वकीलों से मुलाकात, फोन जब्त करने की प्रक्रिया और नागरिकों की आवाजाही पर लगाए गए प्रतिबंधों की आवश्यकता जैसे सवाल महत्वपूर्ण हो गए हैं।

दिल्ली में शनिवार की कार्रवाई ने सरकार, विपक्ष और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव को और गहरा कर दिया है। राहुल गांधी के तीखे आरोप, ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल की हिरासत, छात्र संगठनों की शिकायतें तथा देश के दूसरे शहरों में हुए विरोध प्रदर्शन बताते हैं कि विवाद अब केवल जंतर-मंतर की एक सभा तक सीमित नहीं है। चुनावी पारदर्शिता और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार पर उठे सवालों के जवाब आने बाकी हैं।

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