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“PM, HM, CM सब अवैध”—कांग्रेस का बड़ा हमला, खड़गे बोले- लोकसभा-विधानसभाएं भंग हों, बैलेट पेपर से फिर चुनाव कराओ

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | कलबुर्गी | 3 अक्टूबर 2026

भारत की चुनावी राजनीति में शनिवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने ऐसा बयान दिया जिसने चुनाव आयोग, SIR और चुनावी प्रक्रिया को लेकर चल रही राजनीतिक बहस को सीधे सत्ता की वैधता के सवाल तक पहुंचा दिया। कलबुर्गी में पत्रकारों से बातचीत के दौरान खरगे ने दावा किया कि देश में मौजूदा सरकारें ऐसे चुनावों के जरिए बनी हैं जिन्हें कांग्रेस वैध नहीं मानती। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और राज्यों के मुख्यमंत्रियों को भी इसी आधार पर “अवैध” करार दिया और लोकसभा तथा सभी राज्य विधानसभाओं को भंग कर नए सिरे से चुनाव कराने की मांग रखी। खरगे ने यह भी कहा कि नए चुनाव बैलेट पेपर से कराए जाने चाहिए।

खरगे का सीधा सवाल—जब चुनाव पर ही सवाल है तो सत्ता की वैधता कैसी?

कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने बयान में किसी एक राज्य या किसी एक चुनाव तक सवाल सीमित नहीं रखा। उनका निशाना पूरी चुनावी प्रक्रिया पर था। खरगे के मुताबिक अगर चुनाव प्रक्रिया ही सवालों के घेरे में है, तो उस प्रक्रिया से चुनी गई सरकारों की वैधता पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है। इसी तर्क के आधार पर उन्होंने कहा कि लोकसभा और विधानसभाओं को भंग किया जाना चाहिए और देश में नए चुनाव कराए जाने चाहिए। कांग्रेस अध्यक्ष ने यह मांग ऐसे समय रखी है जब विपक्ष SIR यानी Special Intensive Revision को लेकर चुनाव आयोग पर लगातार सवाल उठा रहा है और इसे लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में विरोध प्रदर्शन भी हो रहे हैं।

“मोदी अवैध प्रधानमंत्री, शाह अवैध मंत्री”—खरगे ने शब्दों में नहीं छोड़ी गुंजाइश

खरगे का बयान इसलिए भी राजनीतिक रूप से बेहद तीखा है क्योंकि उन्होंने सिर्फ चुनावी प्रक्रिया पर आपत्ति दर्ज नहीं की, बल्कि मौजूदा संवैधानिक पदों पर बैठे नेताओं की वैधता को सीधे चुनौती दी। उन्होंने कहा कि “मोदी अवैध प्रधानमंत्री” हैं, “शाह अवैध मंत्री” हैं और राज्यों में निर्वाचित मुख्यमंत्री भी उनके अनुसार अवैध हैं। इसके बाद उन्होंने सभी को हटाने या सरकारों को भंग करने और दोबारा चुनाव कराने की मांग रखी। यह कांग्रेस अध्यक्ष का राजनीतिक आरोप और उनका सार्वजनिक रुख है। इसे किसी न्यायिक निष्कर्ष के रूप में नहीं बल्कि चुनावी प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस की मौजूदा राजनीतिक स्थिति के तौर पर देखा जाना चाहिए।

बैलेट पेपर की वापसी पर जोर, EVM-SIR विवाद फिर केंद्र में

खरगे ने नए चुनाव बैलेट पेपर से कराने की मांग भी दोहराई। यानी कांग्रेस की आपत्ति केवल मतदाता सूची के पुनरीक्षण तक सीमित नहीं है। पार्टी चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता और मतदान के तरीके को लेकर भी व्यापक बहस चाहती है। SIR को लेकर विपक्ष की आपत्तियों के बीच बैलेट पेपर की मांग इस राजनीतिक विवाद को और व्यापक बनाती है। कांग्रेस का तर्क है कि चुनाव ऐसी प्रक्रिया से होने चाहिए जिस पर मतदाता का भरोसा पूरी तरह कायम हो। दूसरी तरफ इस मुद्दे पर अलग-अलग राजनीतिक दलों के बीच तीखा मतभेद है और चुनावी प्रक्रिया को लेकर चल रही बहस अब संसद, सड़कों और अदालतों तक पहुंच चुकी है।

SIR पर विपक्ष का आंदोलन, खरगे ने संघर्ष जारी रखने का ऐलान किया

खरगे ने यह भी कहा कि विपक्ष SIR और चुनावी प्रक्रिया के कथित दुरुपयोग के खिलाफ देशभर में आंदोलन जारी रखेगा। यानी कांग्रेस फिलहाल इस मुद्दे को राजनीतिक अभियान के रूप में आगे ले जाने के संकेत दे रही है। पिछले दिनों चुनाव आयोग की भूमिका, मतदाता सूचियों में बदलाव और SIR को लेकर विपक्षी दलों ने लगातार सवाल उठाए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि मतदाता सूची में किसी भी तरह की गड़बड़ी लोकतांत्रिक प्रक्रिया की बुनियाद पर चोट कर सकती है। यही वजह है कि अब कांग्रेस इसे सिर्फ चुनाव आयोग से जुड़ा प्रशासनिक मुद्दा नहीं बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा राजनीतिक सवाल बना रही है।

सड़क से संसद तक बढ़ेगा दबाव?

खरगे के बयान का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा यही है कि कांग्रेस अब चुनावी प्रक्रिया को लेकर अपने अभियान को और आक्रामक बनाने की दिशा में आगे बढ़ती दिखाई दे रही है। अगर विपक्ष का आंदोलन आगे बढ़ता है तो SIR, मतदाता सूची, चुनाव आयोग की भूमिका और मतदान प्रणाली आने वाले दिनों में राजनीति के बड़े मुद्दे बन सकते हैं। कांग्रेस पहले ही इस मुद्दे को लेकर विरोध प्रदर्शनों की बात कर चुकी है। ऐसे में खरगे का बयान उस राजनीतिक संघर्ष को शीर्ष नेतृत्व की सीधी चुनौती में बदलता हुआ दिखाई देता है।

कांग्रेस का आरोप बनाम चुनावी संस्थाओं की विश्वसनीयता

इस पूरे विवाद का केंद्र एक बड़ा सवाल है—क्या देश की चुनावी प्रक्रिया पर जनता का भरोसा कायम है? कांग्रेस का कहना है कि चुनाव की निष्पक्षता और मतदाता सूची की शुचिता पर उठ रहे सवालों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। पार्टी इसी आधार पर व्यापक राजनीतिक और चुनावी सुधार की मांग कर रही है। खरगे का बयान इसी अभियान की सबसे कठोर अभिव्यक्तियों में से एक है। हालांकि “सभी चुनाव अवैध” होने का दावा कांग्रेस अध्यक्ष का राजनीतिक आरोप है; इसे किसी अदालत या संवैधानिक संस्था के स्थापित निष्कर्ष के रूप में पेश नहीं किया जा सकता।

राजनीति अब सिर्फ सरकार बनाम विपक्ष नहीं, चुनाव की विश्वसनीयता पर आ गई

इस बयान के साथ राजनीतिक लड़ाई का दायरा और बड़ा हो गया है। अब बहस केवल इस बात पर नहीं रह गई कि कौन-सी पार्टी सत्ता में है और कौन विपक्ष में। कांग्रेस ने सवाल को चुनाव की प्रक्रिया और उससे पैदा होने वाली सत्ता की वैधता तक पहुंचा दिया है। खरगे का संदेश साफ है—अगर विपक्ष को चुनावी प्रक्रिया पर भरोसा नहीं है, तो वह मौजूदा व्यवस्था को स्वीकार करने के बजाय नए चुनाव की मांग करेगा। और वह चुनाव बैलेट पेपर से कराने की मांग के साथ जनता के बीच जाएगा।

अब सरकार और चुनाव आयोग पर जवाब देने का राजनीतिक दबाव

खरगे के इस बयान के बाद सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल यही है कि SIR, मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर चुनाव आयोग और सरकार की ओर से क्या जवाब आता है। कांग्रेस ने अपना पक्ष बेहद स्पष्ट और आक्रामक शब्दों में रख दिया है। उसने सिर्फ आपत्ति नहीं जताई, बल्कि लोकसभा और विधानसभाओं को भंग कर नए चुनाव कराने की मांग तक पहुंच गई है। अब यह विवाद आने वाले दिनों में और तीखा होना तय है।

कांग्रेस अध्यक्ष का बयान दरअसल एक बड़े राजनीतिक संघर्ष का संकेत है—चुनाव कैसे हों, मतदाता सूची कैसी हो, मतदान की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी हो और जनता का भरोसा कैसे कायम रहे। कांग्रेस ने इस बहस को सीधे सत्ता की वैधता से जोड़ दिया है। खरगे के शब्दों में यह सिर्फ चुनाव आयोग के खिलाफ शिकायत नहीं, बल्कि पूरी चुनावी प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस की गंभीर राजनीतिक आपत्ति है। अब इस मुद्दे पर देश की राजनीति किस दिशा में जाती है, यह आने वाले दिनों में विपक्ष के आंदोलन, चुनाव आयोग के फैसलों और सरकार की प्रतिक्रिया से तय होगा।

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