राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | मुंबई | 2 अक्टूबर 2026
मुंबई का शिवाजी पार्क शुक्रवार को चुनावी व्यवस्था को लेकर उठ रहे गुस्से का बड़ा केंद्र बन गया। Cockroach Janta Party (CJP) के नेतृत्व में हजारों प्रदर्शनकारी शिवाजी पार्क के बाहर जुटे और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। प्रदर्शन का मुद्दा मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और देशभर में चल रही Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया को लेकर उठे सवाल थे।
पुलिस से अनुमति नहीं मिलने के बावजूद प्रदर्शनकारी शिवाजी पार्क के बाहर जमा हुए। हाथों में तिरंगा और जुबान पर चुनावी पारदर्शिता के सवाल थे। CJP के संस्थापक अभिजीत डिपके, सह-संयोजक आशुतोष रांका और संगठन के अन्य नेताओं ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित किया। इस दौरान ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर लगातार नारे लगाए गए।
डिपके का सीधा हमला—“ज्ञानेश कुमार गए तो मोदी को भी जाना होगा”
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए CJP संस्थापक अभिजीत डिपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार पर भी सीधा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि ज्ञानेश कुमार अपने पद से जाते हैं तो इसके बाद राजनीतिक जवाबदेही की मांग प्रधानमंत्री तक पहुंचेगी। उनका बयान प्रदर्शन के राजनीतिक तेवर को साफ तौर पर सामने लाता है।
CJP का कहना है कि मामला केवल किसी एक अधिकारी के इस्तीफे का नहीं है। संगठन मतदाता सूची, SIR और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर जवाब चाहता है।
शिवाजी पार्क में हजारों की भीड़, तिरंगे के साथ प्रदर्शन
प्रदर्शनकारियों ने शिवाजी पार्क के गेट के बाहर बैठकर अपना विरोध दर्ज कराया। हाथों में तिरंगा लिए लोगों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं पर सवाल उठाए। प्रदर्शन के दौरान CJP नेताओं ने चुनाव आयोग के खिलाफ नारे लगाए और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई।
प्रदर्शन में अभिनेता शबाना आजमी और गायक विशाल ददलानी समेत कई चर्चित लोगों की मौजूदगी भी बताई गई। इससे प्रदर्शन को व्यापक सार्वजनिक दृश्यता मिली।
सवाल SIR पर, निशाना चुनाव आयोग पर
CJP और प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि SIR के दौरान मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर बदलाव हुए हैं और इससे पात्र मतदाताओं के नाम प्रभावित होने की आशंका पैदा हुई है। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी हो, मतदाता सूची में हुए बदलावों का रिकॉर्ड सामने आए और किसी भी पात्र मतदाता को उसके मतदान के अधिकार से वंचित न किया जाए।
इस आंदोलन का मूल सवाल यही है—मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने का फैसला किस आधार पर हो रहा है और उसकी जवाबदेही किसकी है?
दिल्ली से मुंबई तक एक ही मुद्दा
मुंबई का यह प्रदर्शन ऐसे समय हुआ जब दिल्ली में भी चुनाव आयोग और ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए। यानी गांधी जयंती के दिन देश की राजधानी से आर्थिक राजधानी तक चुनावी व्यवस्था को लेकर राजनीतिक विरोध सड़कों पर दिखाई दिया।
मुंबई में CJP ने साफ संकेत दिया है कि उसका आंदोलन शिवाजी पार्क तक सीमित नहीं रहेगा। संगठन देश के दूसरे हिस्सों में भी प्रदर्शन करने और बाद में दिल्ली के जंतर-मंतर तक आंदोलन ले जाने की बात कह चुका है।
अब लड़ाई इस्तीफे से आगे जवाबदेही की
इस पूरे विवाद में राजनीतिक आरोप अपनी जगह हैं, लेकिन सबसे बड़ा सवाल मतदाता के भरोसे का है। चुनाव आयोग लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण संस्थाओं में से एक है। इसलिए मतदाता सूची में होने वाले किसी भी बड़े बदलाव को लेकर उठने वाले सवालों का जवाब रिकॉर्ड, नियम और पारदर्शी प्रक्रिया के जरिए देना जरूरी है।
मुंबई के शिवाजी पार्क से उठी आवाज का संदेश साफ है—प्रदर्शनकारी केवल इस्तीफा नहीं, चुनावी प्रक्रिया पर जवाबदेही मांग रहे हैं। अब यह आंदोलन आगे किस रूप में बढ़ता है और इसके राजनीतिक प्रभाव क्या होते हैं, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।



