शिक्षा/ मुंबई/ राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | 2 अक्टूबर 2026
15 दिन से जारी विरोध अब भूख हड़ताल में बदला
IIT बॉम्बे में दूसरे वर्ष के छात्र साहिल वाकोड़े की मौत के बाद छात्रों का विरोध शुक्रवार को और तेज हो गया। संस्थान के छात्रों के एक समूह ने प्रशासन से जवाबदेही और न्याय की मांग को लेकर भूख हड़ताल शुरू कर दी है। छात्रों का कहना है कि वे पिछले करीब 15 दिनों से आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन उनकी मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने आंदोलन को और व्यापक बनाने का फैसला किया है।
छात्रों ने संस्थान प्रशासन के सामने 18 मांगों का चार्टर रखा है। इनमें संस्थान के निदेशक के इस्तीफे की मांग भी शामिल है। छात्रों का कहना है कि साहिल वाकोड़े की मौत से जुड़े सवालों का स्पष्ट और जवाबदेह तरीके से समाधान होना चाहिए तथा संस्थान को छात्रों की सुरक्षा, मानसिक एवं शैक्षणिक स्थिति और शिकायतों से जुड़े तंत्र पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
माता-पिता भी आंदोलन पर, सप्ताहांत में प्रदर्शन की अनुमति नहीं
साहिल वाकोड़े के माता-पिता भी मुंबई के आजाद मैदान में भूख हड़ताल पर बैठे हैं। छात्रों के अनुसार, उनके माता-पिता को सप्ताहांत में अपना विरोध जारी रखने की अनुमति पुलिस की ओर से नहीं दी गई। इसके बाद छात्रों ने अपने आंदोलन को और तेज करने का फैसला किया।
छात्रों का कहना है कि जब परिवार न्याय और जवाबदेही की मांग को लेकर सार्वजनिक रूप से अपनी आवाज उठा रहा है, तब उसे प्रदर्शन से रोकना स्थिति को और गंभीर बनाता है। इसी पृष्ठभूमि में छात्रों ने शुक्रवार से खुद भूख हड़ताल शुरू की है और स्पष्ट किया है कि वे अपनी मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखेंगे।
18 सूत्रीय मांगों में जवाबदेही और प्रशासनिक कार्रवाई पर जोर
छात्रों द्वारा सौंपे गए 18 सूत्रीय मांगपत्र का केंद्र संस्थान में जवाबदेही तय करना है। आंदोलनकारी छात्रों ने प्रशासन से साहिल वाकोड़े की मौत के संदर्भ में उठे सवालों का जवाब देने, संबंधित प्रक्रियाओं की जांच और संस्थागत स्तर पर जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।
छात्रों की प्रमुख मांगों में IIT बॉम्बे के निदेशक के इस्तीफे की मांग भी शामिल है। यह मांग बताती है कि छात्रों का असंतोष केवल किसी एक घटना या तत्काल प्रशासनिक फैसले तक सीमित नहीं है, बल्कि वे संस्थान के शीर्ष प्रशासन की भूमिका और जवाबदेही पर भी सवाल उठा रहे हैं।
छात्रों का सवाल—आखिर जवाबदेही किसकी?
आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि किसी प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान में छात्र की मौत केवल व्यक्तिगत घटना मानकर छोड़ देने का विषय नहीं हो सकती। छात्रों के अनुसार, संस्थान की जिम्मेदारी है कि वह ऐसे मामलों में पारदर्शी जांच, स्पष्ट जवाब और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम सुनिश्चित करे।
यही वजह है कि छात्रों ने भूख हड़ताल को अपना अगला कदम बनाया है। उनका कहना है कि पिछले 15 दिनों से जारी विरोध के बावजूद यदि उनकी मांगों पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं हुई है, तो आंदोलन को और तेज करना आवश्यक हो गया है।
IIT बॉम्बे प्रशासन के सामने बढ़ी चुनौती
छात्रों के भूख हड़ताल पर जाने से IIT बॉम्बे प्रशासन के सामने अब एक गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है। देश के प्रमुख तकनीकी संस्थानों में शामिल IIT बॉम्बे में छात्रों का लगातार आंदोलन संस्थान की प्रशासनिक व्यवस्था, शिकायत निवारण तंत्र और छात्र कल्याण व्यवस्था को लेकर व्यापक सवाल खड़े कर रहा है।
हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट में संस्थान प्रशासन की ओर से छात्रों की 18 मांगों और निदेशक के इस्तीफे की मांग पर विस्तृत प्रतिक्रिया का उल्लेख नहीं है। ऐसे में आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि प्रशासन छात्रों से बातचीत और उनकी मांगों पर क्या कदम उठाता है।
भूख हड़ताल से आंदोलन के और बढ़ने के संकेत
छात्रों ने कहा है कि वे न्याय और जवाबदेही की मांग को लेकर अपना आंदोलन जारी रखेंगे। शुक्रवार से शुरू हुई भूख हड़ताल इसी आंदोलन का नया चरण है। दूसरी ओर, साहिल वाकोड़े के माता-पिता भी आजाद मैदान में विरोध कर रहे हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल सामने ला दिया है कि देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों की सुरक्षा, शिकायतों और प्रशासनिक जवाबदेही को किस तरह सुनिश्चित किया जाए। फिलहाल IIT बॉम्बे के छात्र अपने 18 सूत्रीय मांगपत्र और निदेशक के इस्तीफे की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर हैं और उन्होंने आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया है।



