राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 2 अक्टूबर 2026
ECINet को लेकर चुनाव आयोग पर कांग्रेस का बड़ा हमला
चुनाव आयोग के ECINet पोर्टल को लेकर विवाद अब और गहरा गया है। कांग्रेस ने शुक्रवार को निर्वाचन आयोग पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि आयोग ECINet की कार्यप्रणाली और कानूनी स्थिति को लेकर देश के सामने सही तस्वीर नहीं रख रहा है। कांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने आयोग पर “झूठ बोलने” का आरोप लगाया और कहा कि मतदाता सूची से जुड़े इस डिजिटल सिस्टम को लेकर उठे सवाल केवल तकनीकी नहीं हैं, बल्कि कानून और संविधान के पालन तथा जवाबदेही से जुड़े हैं।
जयराम रमेश ने ECINet पर उठाए कानूनी सवाल
जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि 26 सितंबर को जारी चुनाव आयोग की प्रेस विज्ञप्ति में ECINet की कानूनी वैधता को लेकर सवालों के बीच एक समिति गठित करने की बात कही गई थी। इस समिति को यह जांचना है कि ECINet संबंधित कानूनों और नियमों के अनुरूप है या नहीं।
कांग्रेस का सवाल इसी बिंदु पर है कि अगर ECINet पहले से ही कानून और नियमों के अनुरूप था, तो उसकी अनुपालन-जांच के लिए अलग समिति गठित करने की आवश्यकता क्यों पड़ी? और अगर जांच की आवश्यकता थी, तो क्या इससे यह संकेत नहीं मिलता कि पोर्टल की कार्यप्रणाली और उसके इस्तेमाल को लेकर पहले से पर्याप्त संस्थागत परीक्षण नहीं हुआ था?
हालांकि यह कांग्रेस का राजनीतिक आरोप है। निर्वाचन आयोग ने अपने पक्ष में कहा है कि ECINet पर फील्ड अधिकारियों को उनके वैधानिक अधिकारों के अनुसार role-based access उपलब्ध है और पोर्टल की कानूनों तथा नियमों के अनुरूपता की दोबारा समीक्षा के लिए समिति बनाई गई है।
आयोग ने 26 सितंबर को क्या कहा था?
26 सितंबर को हुई पूर्ण आयोग की बैठक के बाद निर्वाचन आयोग ने ECINet को लेकर कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की थीं। आयोग के अनुसार, एक वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त की अध्यक्षता में समिति गठित की जाएगी, जिसमें IIT या IIIT का एक स्वतंत्र विशेषज्ञ भी शामिल होगा। समिति ECINet की समीक्षा करके यह देखेगी कि सिस्टम संबंधित कानूनों और नियमों के अनुरूप है या नहीं।
आयोग ने यह भी कहा था कि पिछले कुछ महीनों में राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों से मिले सुझावों के आधार पर ECINet में कई बदलाव किए जा चुके हैं और यदि फील्ड अधिकारियों के लिए अतिरिक्त सुविधा या लचीलापन जरूरी होगा तो उसे भी लागू किया जाएगा।
इसके साथ आयोग ने भविष्य में IT मॉड्यूल और पोर्टल से जुड़ी नई पहलों को पहले Committee of Officers के सामने रखने की बात कही थी। यानी अब डिजिटल चुनावी व्यवस्था में बदलाव के लिए अतिरिक्त संस्थागत प्रक्रिया अपनाने का आश्वासन दिया गया है।
सवाल सिर्फ पोर्टल का नहीं, मतदाता के अधिकार का
ECINet विवाद इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसका संबंध सीधे मतदाता सूची से जुड़ी प्रशासनिक प्रक्रिया से है। मतदाता का नाम जोड़ना, हटाना, रिकॉर्ड में बदलाव और संबंधित अधिकारियों की कार्रवाई चुनावी प्रक्रिया का मूल हिस्सा है। ऐसे में यदि किसी डिजिटल प्रणाली के माध्यम से इन प्रक्रियाओं को संचालित किया जाता है तो उस सिस्टम की कानूनी वैधता, अधिकारियों की पहुंच और जवाबदेही बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
कांग्रेस का आरोप है कि यदि Electoral Registration Officers यानी EROs की किसी डिजिटल प्रणाली तक पहुंच को सीमित किया जाता है और उनके वैधानिक अधिकार प्रभावित होते हैं, तो यह केवल प्रशासनिक व्यवस्था का मामला नहीं रह जाता। यह Representation of the People Act के तहत अधिकारियों की भूमिका और उनके अधिकारों से जुड़ा प्रश्न बन जाता है।
यही वह मुद्दा है जिस पर कांग्रेस अब निर्वाचन आयोग से स्पष्ट जवाब मांग रही है।
SIR के बीच ECINet विवाद ने बढ़ाई चिंता
ECINet को लेकर विवाद ऐसे समय सामने आया है जब Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर देशभर में राजनीतिक विवाद जारी है। मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान नामों के सत्यापन, दस्तावेजों, आपत्तियों और दावों की प्रक्रिया में डिजिटल सिस्टम की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।
इसी पृष्ठभूमि में ECINet को लेकर उठे सवालों ने चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर बहस को और बढ़ा दिया है। विपक्षी दलों का कहना है कि मतदाता सूची में किसी भी तरह का बदलाव ऐसी प्रक्रिया के तहत होना चाहिए जिसमें स्थानीय अधिकारियों की वैधानिक भूमिका स्पष्ट रहे और नागरिक को अपने अधिकारों की रक्षा का पर्याप्त अवसर मिले।
चुनाव आयोग का पक्ष भी सामने
निर्वाचन आयोग ने इन आरोपों को स्वीकार नहीं किया है। आयोग का कहना है कि फील्ड अधिकारियों को ECINet में उनकी statutory powers के अनुरूप role-based access दिया गया है। आयोग ने यह भी कहा कि ECINet की समीक्षा के लिए बनाई गई समिति किसी आरोप को स्वीकार करने के लिए नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने के लिए है कि सिस्टम संबंधित Acts और Rules के अनुरूप हो।
आयोग ने SIR को लेकर भी कहा है कि उसका 24 जून 2025 का आदेश पूर्ण आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी से जारी हुआ था और बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी उसे बरकरार रखा। आयोग ने यह भी कहा कि SIR के दौरान Form 6 से जुड़े घोषणा-पत्र को लेकर सुप्रीम कोर्ट का समर्थन प्राप्त है।
इसलिए ECINet विवाद में एक तरफ कांग्रेस के गंभीर आरोप हैं, जबकि दूसरी तरफ चुनाव आयोग का आधिकारिक स्पष्टीकरण है। दोनों दावों के बीच अंतिम स्थिति संबंधित दस्तावेजों, कानूनी प्रावधानों और चल रही न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर स्पष्ट होगी।
दिल्ली और महाराष्ट्र में दावे-आपत्तियों की समयसीमा बढ़ी
इसी बैठक में निर्वाचन आयोग ने मतदाताओं के लिए दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समयसीमा भी बढ़ाई। दिल्ली में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख 30 अक्टूबर 2026 कर दी गई है, जबकि उनके निपटारे की अवधि 30 नवंबर तक बढ़ाई गई है। महाराष्ट्र में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समयसीमा 12 अक्टूबर और उनके निपटारे की समयसीमा 10 नवंबर तक बढ़ाई गई है।
आयोग ने SIR के दौरान नोटिस पाने वाले ऐसे लोगों के लिए भी प्रक्रिया में बदलाव की घोषणा की जिन्हें ‘unmapped’ या ‘logical discrepancy’ के आधार पर नोटिस मिला है। ऐसे मामलों में BLO घर जाकर दस्तावेज जुटा सकते हैं और उन्हें ECINet पर अपलोड कर सकते हैं। सामान्य तौर पर ऐसे मतदाताओं को ERO या AERO कार्यालय में व्यक्तिगत सुनवाई के लिए बुलाने की जरूरत नहीं होगी, हालांकि असाधारण परिस्थितियों में ERO सुनवाई कर सकता है।
97 मतदाताओं का मामला भी बना अहम
ECINet विवाद के बीच गोवा के 97 मतदाताओं का मामला भी चर्चा में आया। निर्वाचन आयोग ने कहा कि इन मतदाताओं को लेकर BLO को घर-घर जाकर प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया गया और 97 में से 81 मतदाताओं ने Form 6 भर दिया है।
यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे यह सवाल सामने आया कि यदि किसी पात्र मतदाता को सूची में शामिल करने या उसका नाम बहाल करने की प्रक्रिया में तकनीकी अड़चन आती है, तो उसे दूर करने की जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होगी।
अब जवाबदेही पर टिकी नजर
ECINet को लेकर उठे विवाद ने चुनावी व्यवस्था के उस हिस्से को बहस के केंद्र में ला दिया है जो आम मतदाता को दिखाई नहीं देता, लेकिन उसके मतदान के अधिकार पर सीधा असर डाल सकता है। डिजिटल पोर्टल, Electoral Registration Officers की पहुंच, मतदाता डेटा और SIR की प्रक्रिया—इन सभी के बीच स्पष्ट कानूनी और प्रशासनिक जवाबदेही जरूरी है।
कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर चुनाव आयोग पर लगातार दबाव बना रही है और जयराम रमेश ने साफ तौर पर कानून और संविधान के कथित उल्लंघनों के लिए जवाबदेही की मांग की है। दूसरी ओर आयोग ने ECINet की समीक्षा के लिए स्वतंत्र तकनीकी विशेषज्ञ को शामिल करने वाली समिति बनाने और भविष्य में IT संबंधी निर्णयों के लिए अधिक संस्थागत प्रक्रिया अपनाने की घोषणा की है।
अब असली सवाल यह है कि ECINet की समीक्षा करने वाली समिति अपनी रिपोर्ट में क्या पाती है, क्या उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी और क्या उसमें सामने आने वाली कमियों या आपत्तियों पर जिम्मेदारी तय होगी। मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े डिजिटल सिस्टम की विश्वसनीयता का सवाल आखिरकार किसी एक दल का नहीं, हर मतदाता के अधिकार और चुनावी संस्थाओं पर सार्वजनिक भरोसे का सवाल है।



