राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | बालाघाट, मध्य प्रदेश | 1 अक्टूबर 2026
मध्य प्रदेश के बालाघाट के आदिवासी बहुल इलाके में बच्चों की मौतों और बुनियादी सुविधाओं की स्थिति को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी गुरुवार को बिरसा ब्लॉक के जगला गांव पहुंचे और बीमारी से जान गंवाने वाले आदिवासी बच्चों के परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने परिवारों के बीच बैठकर उनकी समस्याएं सुनीं और स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, जमीन, वन अधिकार तथा सरकारी योजनाओं से जुड़े मुद्दों पर सरकार को घेरा।

“बालाघाट आकर लगा, जैसे हिंदुस्तान के बीच में ही हिंदुस्तान की सरकार नहीं है”
राहुल गांधी ने कहा कि बालाघाट की स्थिति देखकर उन्हें ऐसा महसूस हुआ कि देश के बीचोंबीच रहने वाले इन लोगों तक सरकार की बुनियादी सेवाएं ठीक से नहीं पहुंच रही हैं। उन्होंने बच्चों की मौतों, कुपोषण, बीमारियों और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर सरकार की जिम्मेदारी पर सवाल उठाया। राहुल गांधी ने कहा कि सरकार को केवल विकास की बात करने के बजाय उन परिवारों के बीच पहुंचकर उनकी समस्याओं का समाधान करना चाहिए, जिन्होंने अपने बच्चों को खोया है।
बालाघाट के प्रभावित आदिवासी इलाकों में पिछले कुछ महीनों में बड़ी संख्या में बच्चों की मौतों की खबरें सामने आई हैं। अलग-अलग रिपोर्टों में मृत बच्चों की संख्या को लेकर अंतर है। मीडिया रिपोर्टों में 30 से अधिक बच्चों की मौत का उल्लेख है, जबकि सरकारी आंकड़ों और विपक्षी दावों में संख्या अलग-अलग बताई गई है। स्वास्थ्य संबंधी रिपोर्टों में मलेरिया, खसरा, कुपोषण, एनीमिया, डिहाइड्रेशन और सांस से जुड़ी जटिलताओं जैसी स्थितियों का उल्लेख हुआ है। इसलिए हर मौत का कारण एक ही बीमारी मानना सही नहीं होगा।
जमीन, वन अधिकार और मनरेगा का मुद्दा भी उठाया
राहुल गांधी ने आदिवासी परिवारों की समस्याओं को केवल स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने जमीन से जुड़े विवाद, वन अधिकार अधिनियम, मनरेगा और सरकारी योजनाओं के लाभ से जुड़े सवाल भी उठाए। उनका कहना था कि यदि सरकार की ओर से लोगों के लिए एक से अधिक कल्याणकारी योजनाएं संचालित हैं, तो पात्र परिवारों को उन सभी योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए, न कि एक योजना का लाभ देकर दूसरी योजना से उनका नाम बाहर कर दिया जाए।
उन्होंने कहा कि जिन परिवारों ने अपने बच्चों को खोया है, उनके लिए मुआवजे और सरकारी सहायता की प्रक्रिया भी स्पष्ट और समयबद्ध होनी चाहिए। राहुल गांधी ने सरकार से अपनी जिम्मेदारी निभाने, गांवों में स्कूल और अस्पताल जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा आदिवासी परिवारों को उनके अधिकार देने की मांग की।
“हम इन्हें वनवासी नहीं, आदिवासी कहते हैं”
राहुल गांधी ने अपने संबोधन में आदिवासी समुदाय की पहचान और अधिकारों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि वे इस समुदाय को “वनवासी” नहीं बल्कि “आदिवासी” कहते हैं और उनके अनुसार आदिवासी देश के मूल निवासियों में हैं, इसलिए उन्हें सम्मान के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, जमीन और अन्य संवैधानिक अधिकारों का लाभ मिलना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि बालाघाट की समस्याओं को वह संसद में उठाएंगे। राहुल गांधी के इस दौरे को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है जब बालाघाट में बच्चों की मौतों और आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर मध्य प्रदेश सरकार से जवाब मांगा जा चुका है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भी इस मामले में राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया है।
सरकार की प्रतिक्रिया और जांच भी चर्चा में
बालाघाट में बच्चों की मौतों को लेकर सरकार की ओर से स्वास्थ्य जांच और उपचार संबंधी गतिविधियां तेज किए जाने की जानकारी सामने आई है। प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य टीमों की तैनाती, स्क्रीनिंग और उपचार की प्रक्रिया चलाए जाने की रिपोर्ट है। साथ ही, मौतों की वास्तविक संख्या और प्रत्येक मामले में चिकित्सकीय कारण को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं। यही वजह है कि इस पूरे मामले में गांववार और मामलेवार आधिकारिक आंकड़ों की स्पष्ट तस्वीर महत्वपूर्ण हो गई है।
राहुल गांधी ने जगला गांव में प्रभावित परिवारों के साथ करीब एक घंटे तक बातचीत की। इस दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय आदिवासी लोग भी उनसे मिलने पहुंचे। उन्होंने परिवारों की समस्याएं सुनीं और कहा कि इन मुद्दों को राजनीतिक बहस से आगे ले जाकर संसद में उठाया जाएगा।
बालाघाट की यह पूरी घटना अब तीन बड़े सवालों के केंद्र में है—बच्चों की मौतों की अंतिम और प्रमाणित संख्या क्या है, प्रत्येक मौत का वास्तविक चिकित्सकीय कारण क्या था और प्रभावित आदिवासी परिवारों तक स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, मुआवजा तथा उनके कानूनी अधिकारों की सुविधाएं कितनी प्रभावी तरीके से पहुंच रही हैं।



