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“कमाल है! जिसका पैसा है, वही इस्तेमाल नहीं कर सकता!” TMC के ₹804 करोड़ वाले खातों पर सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं, असली हक किसका—फैसला अभी बाकी

राष्ट्रीय/ राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 1 अक्टूबर 2026

पश्चिम बंगाल की राजनीति में TMC के नाम, चुनाव चिन्ह और पार्टी फंड को लेकर चल रही लड़ाई अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गई है। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले TMC गुट की चार debit-frozen बैंक खातों को संचालित करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस पी.बी. वराले की पीठ ने कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार किया। रिपोर्ट के मुताबिक इन खातों में करीब ₹804 करोड़ की राशि है।

लेकिन इस पूरे मामले की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला नहीं दिया कि इन पैसों का मालिक कौन है। अदालत ने साफ किया कि चुनाव आयोग ने TMC के नाम और चुनाव चिन्ह को फिलहाल फ्रीज कर रखा है और इसलिए यह बड़ा सवाल कि इन खातों में मौजूद राशि पर अधिकार किस गुट का है, अभी न्यायिक/प्रशासनिक निर्णय के अधीन है। यानी बैंक खाते फिलहाल फ्रीज हैं, लेकिन पैसे के अंतिम हकदार को लेकर विवाद अभी खत्म नहीं हुआ है।

यही वजह है कि यह मामला सिर्फ बैंक खाते चलाने की अनुमति का मामला नहीं है। इसके पीछे TMC के नाम, संगठन, चुनाव चिन्ह और वित्तीय संसाधनों पर नियंत्रण की पूरी लड़ाई खड़ी है। चुनाव आयोग ने सितंबर में पार्टी के पारंपरिक नाम और ‘फूल-घास’ चुनाव चिन्ह को अंतरिम तौर पर फ्रीज कर दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को अलग-अलग नाम और चिन्ह दिए थे। ममता बनर्जी गुट ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

पार्टी के बैंक खातों का विवाद भी अचानक पैदा नहीं हुआ। इससे पहले कलकत्ता हाईकोर्ट के सामने बैंक खातों को फ्रीज किए जाने का मामला पहुंचा था। उस समय अदालत ने पुलिस की तेजी पर सवाल उठाते हुए पूछा था कि इतनी जल्दबाजी में खातों को फ्रीज करने की जरूरत क्यों पड़ी। हाईकोर्ट ने जुलाई में सीमित रूप से ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को रोजमर्रा के प्रशासनिक और कानूनी खर्चों के लिए खातों के इस्तेमाल की व्यवस्था भी की थी, लेकिन बाद में ED की कार्रवाई के कारण खातों पर अलग से रोक लग गई।

विवाद की जड़ TMC के भीतर नेतृत्व और संगठन पर नियंत्रण की लड़ाई है। एक ओर ममता बनर्जी का गुट है, तो दूसरी ओर बागी नेताओं का गुट पार्टी के नाम, संगठन और वित्तीय संसाधनों पर अपना दावा कर रहा है। इसी विवाद के बीच चुनाव आयोग ने पार्टी का मूल नाम और चुनाव चिन्ह फ्रीज किया। सुप्रीम कोर्ट ने भी चुनाव आयोग से इस विवाद का जल्द समाधान करने को कहा है और आयोग को अधिकतम तीन महीने में फैसला लेने की समयसीमा दी है।

वित्तीय विवाद भी गंभीर है। जांच एजेंसियों ने TMC के बैंक खातों में मौजूद धन और कुछ लेन-देन को लेकर जांच शुरू की है। ED के अनुसार, उसके प्रारंभिक जांच में अप्रैल 2023 से जून 2026 के बीच TMC खातों से करीब ₹160 करोड़ के हस्तांतरण की जानकारी सामने आई थी। एजेंसी ने इन लेन-देन को लेकर मनी लॉन्ड्रिंग जांच शुरू की है। दूसरी तरफ ममता गुट ने इन कार्रवाइयों पर सवाल उठाए हैं। इन आरोपों और जांच का अंतिम निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है—जब पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह पर ही अंतिम फैसला नहीं हुआ है, तो पार्टी के बैंक खातों और उसमें जमा रकम पर अधिकार किसका माना जाए? यही वह कानूनी पेच है जिसके चलते सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल ममता गुट को खातों के संचालन की अनुमति देने से इनकार किया है।

सियासी तौर पर यह फैसला ममता बनर्जी गुट के लिए बड़ा झटका है, क्योंकि पार्टी का संगठन चलाने के लिए वित्तीय संसाधनों का इस्तेमाल फिलहाल बाधित रहेगा। लेकिन कानूनी तस्वीर अभी पूरी तरह साफ नहीं हुई है। खातों का फ्रीज रहना और पैसे का अंतिम मालिक कौन है—ये दो अलग सवाल हैं। दूसरे सवाल का फैसला अभी बाकी है।

विडंबना यही है—खाते में पैसा मौजूद है, लेकिन उस पैसे पर अधिकार को लेकर विवाद इतना बड़ा है कि उसे इस्तेमाल करने का अधिकार भी अदालत के दरवाजे तक पहुंच गया है। अब नजर चुनाव आयोग के उस अंतिम फैसले पर है, जो यह तय करेगा कि TMC के नाम और चुनाव चिन्ह पर किस गुट का अधिकार है—और उसके बाद पार्टी की संपत्ति और बैंक खातों को लेकर विवाद की अगली तस्वीर साफ होगी।

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