राजनीति/ चुनाव | ABC NATIONAL NEWS | बेंगलुरु | 29 सितंबर 2026
कर्नाटक में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाने की मांग ने चुनावी प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। The Hindu की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य की कई विधानसभा सीटों पर 4,000 से ज्यादा मतदाताओं के नाम हटाने के लिए Form-7 आवेदन दाखिल किए गए हैं और इन आपत्तियों में बड़ी संख्या में मुस्लिम मतदाताओं के नाम शामिल हैं। Form-10 एक वैधानिक रिपोर्ट है, जिसमें Form-7 के जरिए मतदाता सूची में दर्ज नामों को हटाने पर दर्ज आपत्तियों का विवरण संकलित किया जाता है। इस पूरे घटनाक्रम की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कई स्थानों पर बड़ी संख्या में आवेदन कुछ ही लोगों द्वारा दाखिल किए गए हैं। चुनाव अधिकारियों के अनुसार, किसी भी मतदाता का नाम केवल आवेदन दाखिल होने के आधार पर नहीं हटाया जाएगा और प्रत्येक आपत्ति की जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई होगी।
सबसे ज्यादा ध्यान विजयपुरा जिले की बाबलेश्वर विधानसभा सीट पर सामने आए आंकड़ों ने खींचा है। रिपोर्ट के मुताबिक, 22 सितंबर को अकेले इस विधानसभा क्षेत्र में 1,373 Form-7 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से 1,363 आवेदन केवल 10 लोगों ने दाखिल किए थे। रिपोर्ट में बताया गया है कि इन आपत्तियों का बड़ा हिस्सा ऐसे मुस्लिम मतदाताओं के नामों के खिलाफ था, जो आवेदन दाखिल करने वालों के अपने मतदान केंद्र से अलग क्षेत्रों में दर्ज थे। उपलब्ध विवरण के अनुसार, एक मतदाता हुच्चप्पा गणिगेर ने 22 और 23 सितंबर के बीच 493 आवेदन दाखिल किए, जबकि एक अन्य व्यक्ति गोविंदराज मुंदूर ने 23 सितंबर को 33 मतदान केंद्रों में 413 आवेदन जमा किए। बाबलेश्वर सीट का प्रतिनिधित्व कांग्रेस नेता और मंत्री एम. बी. पाटिल करते हैं।
ऐसा ही पैटर्न बीदर जिले की भालकी विधानसभा सीट में भी सामने आया है। यहां 23 सितंबर को कम-से-कम 30 लोगों ने 1,700 से अधिक नाम हटाने के लिए आपत्तियां दाखिल कीं। रिपोर्ट के अनुसार, एक व्यक्ति ने अकेले 23 सितंबर को 120 आवेदन दाखिल किए, जबकि इससे एक दिन पहले भी 54 आवेदन जमा किए गए थे। इसके बाद 24 सितंबर को भी अतिरिक्त आपत्तियां दाखिल हुईं। रिपोर्ट में इन आवेदनों में लक्षित मतदाताओं की बड़ी संख्या मुस्लिम होने की बात कही गई है। भालकी सीट का प्रतिनिधित्व कांग्रेस नेता और मंत्री ईश्वर खंड्रे करते हैं।
महत्वपूर्ण बात यह है कि ऐसे आवेदन केवल कांग्रेस के प्रतिनिधित्व वाली विधानसभा सीटों तक सीमित नहीं हैं। भाजपा विधायकों वाली सीटों पर भी इसी तरह बड़ी संख्या में Form-7 आवेदन सामने आए हैं। बसवकल्याण में एक व्यक्ति ने एक ही दिन प्राप्त 37 Form-7 आवेदनों में से 32 दाखिल किए। इन आपत्तियों में एक ही मतदान केंद्र के मुस्लिम मतदाताओं के नाम शामिल थे। दक्षिण कन्नड़ जिले के बेलथंगडी में भी एक व्यक्ति ने 21 आवेदन दाखिल किए, जिनमें एक मतदान केंद्र के मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाने की मांग की गई थी। इन दोनों विधानसभा क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व भाजपा विधायक करते हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि बड़े पैमाने पर Form-7 आवेदन का पैटर्न केवल किसी एक राजनीतिक दल के कब्जे वाली सीटों तक सीमित नहीं बताया जा सकता।
मामले को और गंभीर बनाने वाली बात कुछ Form-7 आवेदनों की तैयारी और लिखावट को लेकर सामने आई विसंगतियां हैं। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ मामलों में जिन मतदाताओं के नाम हटाने की मांग की गई, उनके विवरण फॉर्म पर पहले से प्रिंट थे और केवल आपत्ति दर्ज कराने वाले व्यक्ति की जानकारी हाथ से लिखी गई थी। भालकी में जांचे गए दो मामलों में इस तरह की स्थिति सामने आने की बात कही गई है। एक मामले में कई आवेदनों में आपत्तिकर्ता के तौर पर एक व्यक्ति का नाम दर्ज था, लेकिन संपर्क किए जाने पर संबंधित व्यक्ति ने उस नाम से अपनी पहचान से इनकार किया और अपना दूसरा नाम बताया। संबंधित EPIC विवरण भी एक अन्य मतदाता से जुड़ा पाया गया। हालांकि, स्थानीय अधिकारियों ने यह भी कहा है कि कुछ आवेदन ऑफलाइन दाखिल किए गए थे और संभव है कि सभी रिकॉर्ड अभी डिजिटल रूप से दर्ज नहीं हुए हों। इसलिए इन विसंगतियों की वास्तविक वजह जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
चुनाव अधिकारियों ने पूरे मामले में यह स्पष्ट किया है कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम बिना जांच के मतदाता सूची से नहीं हटाया जाएगा। बीदर और विजयपुरा के अधिकारियों ने बताया कि प्रत्येक आपत्ति की जांच की जाएगी और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि पात्र मतदाता का नाम हट न जाए। अधिकारियों ने यह भी कहा कि बड़ी संख्या में आपत्तियां दाखिल करने वाले लोगों को चेतावनी दी गई है कि यदि किसी मतदाता के खिलाफ बिना वैध आधार के गलत दावा किया जाता है और वह झूठा पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। यानी Form-7 के जरिए किसी नाम को हटाने की मांग करना अपने आप में नाम हटने का आधार नहीं है; संबंधित आपत्ति की वैधता की जांच आवश्यक है।
कर्नाटक में SIR के दौरान सामने आया यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मतदाता सूची किसी भी चुनाव की बुनियादी कड़ी होती है। नाम जोड़ने, हटाने या संशोधित करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और उचित जांच जरूरी है। बड़े पैमाने पर Form-7 आवेदन दाखिल होने से अपने आप यह साबित नहीं होता कि किसी पात्र मतदाता का नाम अवैध रूप से हटा दिया गया है। फिलहाल सामने आए आवेदन जांच की प्रक्रिया में हैं और उपलब्ध रिपोर्ट में इन आवेदनों के आधार पर किसी पात्र मतदाता का नाम अवैध रूप से हटाए जाने की पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन बड़ी संख्या में एक साथ आवेदन, कुछ लोगों द्वारा सैकड़ों आवेदन दाखिल किया जाना और कुछ फॉर्मों में सामने आई विसंगतियां चुनाव अधिकारियों के लिए जांच का महत्वपूर्ण विषय जरूर हैं।
कर्नाटक का यह मामला SIR की पूरी प्रक्रिया में निष्पक्षता, पारदर्शिता और मतदाता के अधिकार की सुरक्षा के महत्व को सामने लाता है। एक तरफ चुनाव अधिकारियों का कहना है कि हर आपत्ति की जांच के बाद ही नाम हटाया जाएगा, वहीं दूसरी तरफ बड़े पैमाने पर दाखिल किए गए Form-7 आवेदनों और उनमें सामने आई विसंगतियों की पूरी जांच जरूरी हो जाती है। खासकर उन मामलों में जहां कुछ ही लोगों ने बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाने की मांग की है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आपत्तियों के पीछे दिए गए कारण कितने वैध पाए जाते हैं। फिलहाल अंतिम तस्वीर जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगी, लेकिन कर्नाटक SIR में 4,000 से ज्यादा नाम हटाने की मांग ने मतदाता सूची की प्रक्रिया पर बहस को जरूर तेज कर दिया है।



