राष्ट्रीय/ उत्तर प्रदेश | ABC NATIONAL NEWS | लखनऊ | 27 सितंबर 2026
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में लगातार भारी बारिश के बाद कई इलाकों में जलभराव ने जनजीवन को प्रभावित किया है। सड़कों पर पानी भरने, यातायात बाधित होने और बिजली आपूर्ति में परेशानी के बीच समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने BJP सरकार पर तीखा हमला बोला है। अखिलेश ने कहा कि शहरों में जलभराव का मुख्य कारण सिर्फ ज्यादा बारिश नहीं, बल्कि उनके अनुसार “भाजपाई भ्रष्टाचार” के कारण जलनिकासी व्यवस्था का फेल होना है। उन्होंने नालियों और नालों में गंदगी जमा होने को भी जलभराव की बड़ी वजह बताया।
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर लिखे अपने संदेश में लखनऊ के साथ गोरखपुर, वाराणसी और प्रयागराज का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इन शहरों में जलनिकासी व्यवस्था की स्थिति खराब है और नालियों से लेकर बड़े नालों तक गंदगी जमा होने के कारण बारिश का पानी तेजी से बाहर नहीं निकल पा रहा। उन्होंने नदियों में गाद जमा होने और प्रदूषण की समस्या भी उठाई। अखिलेश ने भविष्य में नदियों की गाद हटाने और उन्हें गहरा करने की जरूरत बताई, ताकि नदियां प्राकृतिक रूप से पानी का बहाव संभाल सकें।
लखनऊ में भारी बारिश के कारण कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी। स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक गोमतीनगर, जानकीपुरम और आशियाना समेत कई हिस्सों में पानी भरने से आवागमन प्रभावित हुआ। कुछ इलाकों में सड़कें जलमग्न होने के कारण लोगों को घरों से निकलने में भी परेशानी हुई। जिला प्रशासन और नगर निगम की टीमें जलनिकासी के लिए सक्रिय रहीं और अधिकारियों ने प्रभावित इलाकों का निरीक्षण कर व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए।
बारिश का असर बिजली आपूर्ति पर भी पड़ा। लगातार बारिश के बीच लखनऊ में बड़ी संख्या में बिजली फीडर और उपकेंद्र प्रभावित हुए। बिजली विभाग ने मरम्मत दलों को सक्रिय रखने और स्थानीय खराबियों को जल्द ठीक करने के निर्देश दिए। रिपोर्ट के अनुसार लखनऊ नियंत्रण कक्ष में 716 11-KV फीडर और 173 33-KV उपकेंद्रों के प्रभावित होने की जानकारी दर्ज की गई थी।
यही स्थिति अब राजनीतिक बहस का विषय बन गई है। अखिलेश यादव का कहना है कि बारिश को जलभराव की पूरी वजह बताने के बजाय सरकार को यह देखना चाहिए कि पानी निकालने के लिए बनाए गए नाले और नालियां किस स्थिति में हैं। उनका सवाल है कि अगर नालियां और नाले गंदगी से भरे रहेंगे तो बारिश का पानी बाहर निकलेगा कैसे। यह उनका राजनीतिक आरोप है, जिसकी स्वतंत्र जांच या किसी सरकारी रिपोर्ट से पुष्टि इस समय सामने नहीं आई है।
अखिलेश ने नदियों की स्थिति को भी शहरों के जलभराव से जोड़ा है। उनका कहना है कि प्रदूषण और नालों का गंदा पानी नदियों में गिरने तथा गाद जमा होने से नदियों का बहाव प्रभावित हुआ है। उन्होंने नदी के किनारे रहने वाले लोगों और नदी आधारित अर्थव्यवस्था से जुड़े परिवारों पर इसके असर की बात भी कही। उनके अनुसार भविष्य में सिर्फ बांध या तटबंध बनाना पर्याप्त समाधान नहीं होगा, बल्कि नदियों की सफाई और गहराई बढ़ाने पर भी काम करना होगा।
लखनऊ की मौजूदा तस्वीर में एक तरफ रिकॉर्ड या बहुत तेज बारिश का असर दिखाई देता है, तो दूसरी तरफ जलनिकासी व्यवस्था की क्षमता को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। आधिकारिक आपदा प्रबंधन वेबसाइट पर भी 26 सितंबर को लखनऊ में भारी बारिश दर्ज की गई थी। इसलिए जलभराव की पूरी वजह केवल एक कारण से जोड़ना सही नहीं होगा। वास्तविक स्थिति समझने के लिए बारिश की मात्रा, नालों की क्षमता, सफाई व्यवस्था, जल निकासी की गति और शहर में हुए निर्माण—इन सभी पहलुओं को साथ देखना होगा।
अखिलेश यादव ने अपने संदेश के अंत में BJP सरकार पर राजनीतिक हमला करते हुए कहा कि “BJP जाएगी, नदी जीवन पाएगी।” यह बयान आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की राजनीतिक पृष्ठभूमि में भी देखा जा रहा है। अखिलेश पहले भी राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार और विकास के दावों को लेकर आरोप लगाते रहे हैं। ऐसे में बारिश और जलभराव का मुद्दा भी अब राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है।
फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता जलभराव वाले इलाकों से पानी निकालने, यातायात सामान्य करने और बिजली आपूर्ति बहाल करने की है। लेकिन बारिश थमने के बाद बड़ा सवाल यह रहेगा कि जिन इलाकों में हर बार पानी जमा होता है, वहां स्थायी जलनिकासी व्यवस्था कितनी प्रभावी है। बारिश प्राकृतिक है, लेकिन पानी कितनी देर सड़क पर खड़ा रहता है—यह शहर की तैयारी, जलनिकासी और बुनियादी ढांचे की परीक्षा जरूर है।



