महाराष्ट्र/पर्यावरण | ABC NATIONAL NEWS | नासिक | 17 सितंबर 2026
महाराष्ट्र के नासिक जिले में आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या के खिलाफ प्रदर्शन का तरीका उस समय चर्चा में आ गया, जब प्रदर्शनकारी दो पिल्लों को लेकर निफाड़ नगर पंचायत कार्यालय पहुंच गए और उन्हें मुख्य अधिकारी की मेज पर ही छोड़ दिया। घटना का वीडियो सामने आने के बाद यह मामला चर्चा में है। वीडियो में शिवसेना (UBT) की युवा शाखा के जिला पदाधिकारी विक्रम रांधवे दो बोरियों में लाए गए पिल्लों को बाहर निकालकर निफाड़ नगर पंचायत के मुख्य अधिकारी धीरज भामरे की मेज पर रखते दिखाई दे रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इलाके में आवारा कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन नगर प्रशासन इस समस्या से निपटने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठा रहा।
प्रदर्शनकारी विक्रम रांधवे के मुताबिक निफाड़ नगर पंचायत क्षेत्र में 400 से ज्यादा आवारा कुत्ते घूम रहे हैं। उनका दावा है कि हर महीने 100 से अधिक लोग कुत्तों के काटने से प्रभावित होते हैं। इसी समस्या की ओर प्रशासन का ध्यान खींचने के लिए प्रदर्शनकारियों ने यह असामान्य तरीका अपनाया। उनका कहना था कि जब आम लोगों को सड़कों और मोहल्लों में आवारा कुत्तों की समस्या का सामना करना पड़ रहा है, तो प्रशासन को भी इस समस्या की गंभीरता समझनी चाहिए।
यह घटना बुधवार, 16 सितंबर को हुई। सामने आए वीडियो में रांधवे दो बोरियों से पिल्लों को बाहर निकालते हैं और उन्हें नगर पंचायत के मुख्य अधिकारी की मेज पर रख देते हैं। कार्यालय में मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच इस दौरान हलचल दिखाई देती है। प्रदर्शनकारियों का उद्देश्य नगर प्रशासन का ध्यान क्षेत्र में आवारा कुत्तों की संख्या और कथित तौर पर बढ़ रही कुत्ते के काटने की घटनाओं की ओर आकर्षित करना था।
आवारा कुत्तों की समस्या केवल निफाड़ तक सीमित नहीं है। देश के कई शहरों और कस्बों में नागरिकों की ओर से समय-समय पर इस समस्या को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। सड़क, बाजार, रिहायशी इलाकों और स्कूलों के आसपास कुत्तों के झुंड दिखाई देने से बच्चों, बुजुर्गों और दोपहिया वाहन चालकों के लिए परेशानी पैदा हो सकती है। अचानक सड़क पर आ जाने वाले कुत्तों से दुर्घटनाओं का खतरा भी रहता है। ऐसे में स्थानीय निकायों के सामने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी है।
हालांकि, आवारा कुत्तों से निपटने का समाधान उन्हें मनमाने तरीके से हटाना नहीं है। पशु कल्याण से जुड़े नियमों के तहत नसबंदी, टीकाकरण और पशु जन्म नियंत्रण जैसी प्रक्रियाओं का पालन करना जरूरी है। इसलिए नगर प्रशासन के सामने चुनौती दोहरी है—एक तरफ लोगों को कुत्तों के हमलों और काटने की घटनाओं से सुरक्षा देना और दूसरी तरफ पशु कल्याण से जुड़े कानूनी प्रावधानों का पालन करना। इसके लिए प्रभावी नसबंदी, टीकाकरण, शिकायत निवारण और निगरानी व्यवस्था की जरूरत होती है।
प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में नगर पंचायत प्रशासन की ओर से प्रदर्शनकारियों के आरोपों पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में 400 से अधिक आवारा कुत्तों और हर महीने 100 से अधिक लोगों के प्रभावित होने के आंकड़ों को प्रदर्शनकारियों के दावे के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित नगर पंचायत या प्रशासन के रिकॉर्ड से ही हो सकेगी।
इस प्रदर्शन ने एक महत्वपूर्ण सवाल जरूर खड़ा किया है—स्थानीय निकाय आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए आखिर कितनी प्रभावी व्यवस्था चला रहे हैं? केवल शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई करने के बजाय क्षेत्र में कुत्तों की संख्या, नसबंदी और टीकाकरण की स्थिति तथा कुत्ते के काटने की घटनाओं का नियमित रिकॉर्ड तैयार करना जरूरी है। इससे समस्या की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकती है और उसी आधार पर संसाधनों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
निफाड़ की घटना अपने असामान्य प्रदर्शन के तरीके के कारण भले ही सुर्खियों में आ गई हो, लेकिन इसके पीछे नागरिक सुरक्षा से जुड़ा सवाल महत्वपूर्ण है। लोगों को सुरक्षित सड़कें और सार्वजनिक स्थान चाहिए, जबकि पशुओं के प्रति मानवीय और कानूनी व्यवहार भी सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। दोनों जरूरतों के बीच संतुलन बनाकर ही स्थायी समाधान निकाला जा सकता है।
पिल्लों को अधिकारी की मेज पर रखकर किया गया यह अनोखा प्रदर्शन अब चर्चा में है, लेकिन असली सवाल प्रदर्शन के तरीके से आगे का है—क्या निफाड़ नगर पंचायत अब आवारा कुत्तों की समस्या पर कोई ठोस, नियमित और स्थायी कार्रवाई करेगी?



