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राजस्थान के शहरों में BJP सबसे आगे, लेकिन कांग्रेस ने भी दिखाया दम: जयपुर से अजमेर तक बदला सियासी नक्शा

राजनीतिक/ राजस्थान | ABC NATIONAL NEWS | जयपुर | 15 सितंबर 2026

नतीजों ने तस्वीर साफ कर दी—BJP आगे, कांग्रेस ने कई जगह पलटवार किया

राजस्थान के शहरी निकाय चुनावों के नतीजों ने राज्य की राजनीति में एक दिलचस्प तस्वीर सामने रखी है। सत्तारूढ़ बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन कांग्रेस ने भी कई महत्वपूर्ण शहरों में मजबूत प्रदर्शन करके मुकाबले को एकतरफा नहीं होने दिया। 10,244 वार्डों में से 10,235 के घोषित नतीजों में बीजेपी ने 4,179 वार्ड जीते, जबकि कांग्रेस को 3,613 वार्ड मिले। निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी 2,273 वार्ड जीतकर अपनी ताकत दिखाई। बाकी सीटों पर छोटे दलों का कब्जा रहा। यानी राजस्थान के शहरों में बीजेपी का पलड़ा भारी जरूर है, लेकिन कांग्रेस और निर्दलीयों ने मिलकर यह भी साफ कर दिया कि स्थानीय राजनीति में मुकाबला अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

309 निकायों में बीजेपी को 86 जगह साफ बहुमत

राजस्थान के 309 शहरी निकायों में बीजेपी ने 86 निकायों में स्पष्ट बहुमत हासिल किया, जबकि कांग्रेस 46 निकायों में बहुमत तक पहुंची। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 177 निकायों में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। इनमें 96 निकायों में बीजेपी कांग्रेस से आगे है, 69 में कांग्रेस आगे है और 12 निकायों में दोनों बराबरी पर हैं। इसका मतलब साफ है कि कई जगहों पर अब निर्दलीय और छोटे दलों के पार्षद बेहद महत्वपूर्ण हो जाएंगे। अध्यक्ष और सभापति के चुनाव में इन पार्षदों की भूमिका सरकार और विपक्ष दोनों के लिए निर्णायक हो सकती है।

जयपुर में बीजेपी बहुमत से सिर्फ एक सीट दूर

राजस्थान की राजधानी जयपुर में बीजेपी ने सबसे बड़ी पार्टी बनने का दम दिखाया, लेकिन बहुमत से सिर्फ एक सीट दूर रह गई। 150 सदस्यीय जयपुर नगर निगम में बीजेपी ने 75 वार्ड जीते, जबकि कांग्रेस को 50 और निर्दलीयों को 12 सीटें मिलीं। इसका मतलब बीजेपी सबसे आगे जरूर है, लेकिन अपने दम पर बहुमत के लिए उसे एक और सीट की जरूरत है। बीजेपी की ओर से सुनील कोठारी को महापौर पद का संभावित दावेदार माना जा रहा है और उन्होंने चुनाव भी जीत लिया है। वहीं पूर्व जयपुर महापौर ज्योति खंडेलवाल, जो बीजेपी के टिकट पर चुनाव मैदान में थीं, कांग्रेस उम्मीदवार सुनीता मेथी से हार गईं।

अजमेर में कांग्रेस ने 36 साल बाद BJP को पीछे छोड़ा

अजमेर का नतीजा कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी खबरों में से एक रहा। 80 वार्डों वाले अजमेर नगर निगम में कांग्रेस ने 37 सीटें जीतीं, बीजेपी को 32 सीटें मिलीं और 11 सीटों पर निर्दलीय जीते। राज्य निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार बीजेपी को यहां 36 साल बाद हार का सामना करना पड़ा है। पिछले चुनाव में बीजेपी ने 48 सीटें जीती थीं, जबकि कांग्रेस के खाते में सिर्फ 18 सीटें आई थीं। इस बार कांग्रेस का 37 सीटों तक पहुंचना बताता है कि अजमेर में स्थानीय स्तर पर राजनीतिक समीकरण में बड़ा बदलाव हुआ है।

पायलट सीटों से अलग, वसुंधरा राजे के गढ़ में कांग्रेस की सेंध

पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी की वरिष्ठ नेता वसुंधरा राजे के गृह क्षेत्र झालावाड़ में भी कांग्रेस ने बड़ा प्रदर्शन किया। झालावाड़ नगर परिषद की 25 में से 18 सीटें कांग्रेस ने जीत लीं, जबकि बीजेपी सिर्फ 7 सीटों पर रह गई। हालांकि पड़ोसी झालरापाटन नगरपालिका में बीजेपी ने 20 में से 11 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया। यहां कांग्रेस को 6 और निर्दलीयों को 3 सीटें मिलीं। यानी एक ही जिले में दोनों पार्टियों की तस्वीर अलग-अलग रही और स्थानीय चुनावों में व्यक्तिगत प्रभाव, संगठन और उम्मीदवारों की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है, यह भी सामने आया।

सीकर और पाली में भी कांग्रेस का मजबूत प्रदर्शन

कांग्रेस ने प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के मजबूत क्षेत्र सीकर में भी शानदार प्रदर्शन किया। 65 वार्डों में कांग्रेस ने 38 सीटें जीतीं, जबकि बीजेपी को 22 सीटें मिलीं। इसी तरह पाली नगर निगम में कांग्रेस 29 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी, जबकि बीजेपी को 21 और निर्दलीयों को 15 सीटें मिलीं। पाली बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ का गृह क्षेत्र माना जाता है। ऐसे में इन दोनों जगहों के नतीजे कांग्रेस के लिए खास राजनीतिक महत्व रखते हैं।

उदयपुर में BJP का जोरदार प्रदर्शन

जहां कांग्रेस ने अजमेर, झालावाड़, सीकर और पाली में मजबूत वापसी की, वहीं उदयपुर में बीजेपी ने शानदार प्रदर्शन किया। 80 सदस्यीय उदयपुर नगर निगम में बीजेपी ने 53 वार्ड जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया। कांग्रेस को 23 सीटें मिलीं, जबकि तीन सीटें निर्दलीयों और एक सीट सीपीआईएम के खाते में गई। यह नतीजा बताता है कि राजस्थान के सभी शहरी क्षेत्रों में एक जैसा राजनीतिक रुझान नहीं है।

भरतपुर में निर्दलीयों ने दोनों पार्टियों को पीछे छोड़ा

भरतपुर ने सबसे अलग तस्वीर पेश की। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गृह क्षेत्र वाले इस इलाके में 65 वार्डों में निर्दलीय उम्मीदवारों ने 36 सीटों पर जीत या बढ़त हासिल की, जबकि बीजेपी 20 और कांग्रेस सिर्फ 7 वार्डों पर रही। इसका मतलब है कि यहां मतदाताओं ने दोनों बड़ी पार्टियों से अलग जाकर बड़ी संख्या में निर्दलीय उम्मीदवारों पर भरोसा जताया। आने वाले अध्यक्ष पद के चुनाव में यही निर्दलीय पार्षद सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

जोधपुर में कांटे की टक्कर

जोधपुर में भी बीजेपी और कांग्रेस के बीच लगभग बराबरी का मुकाबला देखने को मिला। ऐसे शहरों में अब सिर्फ वार्ड जीतना ही पर्याप्त नहीं होगा। नगर निगम का नेतृत्व किसके हाथ में जाएगा, इसमें निर्दलीयों और छोटे दलों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है। यही कारण है कि अब पार्षदों की राजनीतिक गतिविधियों और अध्यक्ष पद के चुनाव पर सभी की नजरें टिक गई हैं।

एक BJP उम्मीदवार को सिर्फ एक वोट!

इन बड़े राजनीतिक नतीजों के बीच एक ऐसा परिणाम भी सामने आया जिसने सबका ध्यान खींच लिया। परबतसर नगरपालिका के वार्ड 13 से बीजेपी उम्मीदवार कैलाशचंद को सिर्फ एक वोट मिला। खास बात यह थी कि वह खुद वार्ड 12 के मतदाता थे और बीजेपी ने उन्हें वार्ड 13 से उम्मीदवार बनाया था। कांग्रेस उम्मीदवार हिना खानम ने 376 वोट लेकर यह वार्ड जीता, जबकि निर्दलीय राशिद खान को 195 वोट मिले। वहीं रियांबड़ी नगरपालिका के एक वार्ड में कांग्रेस उम्मीदवार को भी सिर्फ एक वोट मिला। यानी चुनाव में बड़े दलों के उम्मीदवारों को भी स्थानीय स्तर पर बेहद चौंकाने वाले परिणाम देखने पड़े।

अब असली परीक्षा महापौर और सभापति चुनाव की

वार्डों के नतीजे आने के बाद अब अगली बड़ी लड़ाई 21 सितंबर को होने वाले महापौर और सभापति के चुनाव की है। इसके बाद 22 सितंबर को उपमहापौर और उपसभापति समेत दूसरे पदों के चुनाव होंगे। जिन 177 निकायों में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है, वहां आने वाले कुछ दिन बेहद महत्वपूर्ण होंगे। बीजेपी और कांग्रेस दोनों निर्दलीयों तथा छोटे दलों के समर्थन की कोशिश कर सकती हैं।

2028 से पहले भजनलाल सरकार के लिए बड़ा राजनीतिक संकेत

इन शहरी निकाय चुनावों को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सरकार के लिए 2028 विधानसभा चुनाव से पहले एक महत्वपूर्ण राजनीतिक परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है। बीजेपी राज्य में सबसे बड़ी पार्टी बनी है और 86 निकायों में उसे स्पष्ट बहुमत भी मिला है। लेकिन कांग्रेस ने अजमेर, सीकर, झालावाड़ और पाली जैसे महत्वपूर्ण इलाकों में जिस तरह वापसी की है, वह बीजेपी के लिए नजरअंदाज करने वाली बात नहीं है। शहरों का यह जनादेश आने वाले विधानसभा चुनावों की पूरी तस्वीर नहीं बताता, लेकिन इतना जरूर दिखाता है कि राजस्थान में राजनीतिक मुकाबला अभी खुला हुआ है।

अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि राजस्थान में सबसे ज्यादा वार्ड किसने जीते। बड़ा सवाल यह है कि जिन 177 निकायों में बहुमत नहीं मिला, वहां सत्ता किसके हाथ जाएगी? क्या बीजेपी अपनी बढ़त को महापौर और सभापति पदों तक पहुंचा पाएगी? या कांग्रेस निर्दलीयों और छोटे दलों के सहारे कई शहरों में बाजी पलट देगी? और क्या अजमेर, झालावाड़, सीकर और पाली के नतीजे 2028 से पहले कांग्रेस की वापसी का संकेत हैं?

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