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दिल्ली के पीजी में सुरक्षा का बड़ा खेल! 99% के पास फायर एनओसी नहीं, 30% की बिल्डिंग का नक्शा तक पास नहीं

राष्ट्रीय/ दिल्ली NCR | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 15 सितंबर 2026

सत्य निकेतन हादसे के बाद खुली दिल्ली के पीजी की डरावनी तस्वीर

सत्य निकेतन में पांच मंजिला छात्रावास की इमारत गिरने से 7 लोगों की मौत के ठीक एक सप्ताह बाद दिल्ली में पीजी आवासों को लेकर सामने आया सर्वे सिस्टम की गंभीर हालत दिखा रहा है। नगर निगम दिल्ली यानी एमसीडी ने राजधानी के 2,453 पीजी आवासों का सर्वे किया, जिसमें सुरक्षा नियमों के पालन को लेकर बेहद चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन इमारतों में हर दिन हजारों छात्र और दूसरे लोग रहते हैं, उनमें आग लगने या किसी दूसरी आपदा की स्थिति में उनकी सुरक्षा की व्यवस्था आखिर कितनी मजबूत है?

2,453 पीजी में सिर्फ 31 के पास फायर एनओसी

सर्वे में अब तक जो जानकारी सामने आई है, उसके मुताबिक सिर्फ 31 पीजी इमारतों यानी करीब 1.2 प्रतिशत के पास दिल्ली फायर सर्विस की फायर एनओसी है। इसका सीधा मतलब यह है कि सर्वे में शामिल लगभग पूरी पीजी व्यवस्था में फायर सुरक्षा को लेकर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। 99 प्रतिशत से ज्यादा इमारतों के पास फिलहाल फायर एनओसी होने की जानकारी नहीं मिली है।

30 प्रतिशत इमारतों के नक्शे भी पास नहीं

सिर्फ आग से सुरक्षा ही नहीं, भवन निर्माण से जुड़े नियमों की स्थिति भी गंभीर दिखाई दे रही है। सर्वे किए गए 2,453 पीजी में से केवल 726 इमारतों के भवन नक्शे स्वीकृत पाए गए। यानी 30 प्रतिशत से भी कम इमारतों के नक्शे मंजूर हैं। बाकी इमारतों को लेकर अब यह सवाल उठ रहा है कि वे किस मंजूर योजना के आधार पर बनाई गईं और क्या उनका इस्तेमाल पीजी के रूप में नियमों के मुताबिक हो रहा है।

सबसे चौंकाने वाली बात—सिर्फ 8 के पास स्ट्रक्चरल स्थिरता प्रमाणपत्र

इस सर्वे में सबसे बड़ा झटका इमारतों की मजबूती को लेकर सामने आया है। 2,453 पीजी इमारतों में से अब तक सिर्फ 8 इमारतों के पास स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी सर्टिफिकेट मिला है। यानी हजारों ऐसी इमारतों में बड़ी संख्या ऐसी है जिनकी संरचनात्मक मजबूती को लेकर सवाल उठ सकते हैं। सत्य निकेतन की इमारत गिरने के बाद यह आंकड़ा और भी गंभीर दिखाई देता है।

हाईकोर्ट की सख्ती के बाद शुरू हुआ सर्वे

एमसीडी का यह सर्वे दिल्ली हाईकोर्ट की सख्ती के बाद शुरू हुआ। 7 सितंबर को हाईकोर्ट ने पीजी और छात्र आवासों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी, जिसके बाद राजधानी के सभी 12 एमसीडी जोन में पीजी इमारतों की जांच शुरू की गई। यानी यह जांच किसी सामान्य प्रशासनिक अभियान का हिस्सा नहीं, बल्कि एक बड़े हादसे के बाद अदालत की चिंता के जवाब में शुरू हुई है।

सवाल—सात मौतों से पहले कहां था सिस्टम?

यहीं से सबसे बड़ा सवाल पैदा होता है। अगर राजधानी में हजारों पीजी इमारतें हैं और अब सर्वे में इतनी बड़ी संख्या में सुरक्षा संबंधी कमियां सामने आ रही हैं, तो इन इमारतों की पहले नियमित जांच क्यों नहीं हुई? क्या किसी हादसे के बाद ही प्रशासन को यह पता चलता है कि इमारत में फायर एनओसी है या नहीं, नक्शा पास है या नहीं और भवन कितना मजबूत है?

छात्रों की जिंदगी सिर्फ किराए का मामला नहीं

दिल्ली देश के सबसे बड़े शिक्षा केंद्रों में शामिल है। हर साल बड़ी संख्या में छात्र यहां पढ़ाई, प्रतियोगी परीक्षाओं और नौकरी की तैयारी के लिए आते हैं। इनमें से बहुत से छात्र कॉलेज हॉस्टल नहीं मिलने के कारण पीजी में रहते हैं। ऐसे में पीजी सिर्फ रहने की जगह नहीं, बल्कि हजारों परिवारों के बच्चों का अस्थायी घर हैं। उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल पीजी संचालक की नहीं हो सकती। प्रशासन को भी यह सुनिश्चित करना होगा कि नियमों का पालन हो रहा है।

बुलडोजर चलाना आसान, हादसा रोकना असली जिम्मेदारी

सत्य निकेतन हादसे के बाद एमसीडी ने अवैध और खतरनाक इमारतों के खिलाफ बड़े पैमाने पर कार्रवाई शुरू की है। लेकिन असली सवाल कार्रवाई के बाद नहीं, कार्रवाई से पहले पूछा जाना चाहिए। अगर किसी इमारत को खतरनाक घोषित करने के लिए पहले सात लोगों की जान चली जाए, तो यह प्रशासन की सफलता नहीं बल्कि व्यवस्था की विफलता का संकेत है।

अब सिर्फ सीलिंग नहीं, जवाबदेही भी चाहिए

सवाल केवल पीजी मालिकों से नहीं होना चाहिए। जिन इलाकों में वर्षों से पीजी चल रहे हैं, वहां भवन नियमों, अग्नि सुरक्षा और संरचनात्मक सुरक्षा की निगरानी किसकी जिम्मेदारी थी? अगर नियमों का उल्लंघन लंबे समय से चल रहा था, तो संबंधित विभागों ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की?

दिल्ली को अब सिर्फ सीलिंग और ध्वस्तीकरण की नहीं, एक ऐसी स्थायी व्यवस्था की जरूरत है जिसमें हर पीजी की फायर सुरक्षा, भवन का नक्शा और संरचनात्मक मजबूती नियमित रूप से जांची जाए।

अब सबसे बड़ा सवाल

2,453 पीजी की जांच में सिर्फ 31 के पास फायर एनओसी, सिर्फ 726 के नक्शे स्वीकृत और सिर्फ 8 के पास स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी सर्टिफिकेट—तो फिर सवाल यह है कि दिल्ली के इन पीजी में रहने वाले हजारों छात्रों की सुरक्षा अब तक किस भरोसे चल रही थी?

क्या प्रशासन हर बार किसी सत्य निकेतन के मलबे का इंतजार करेगा, या अब हादसा होने से पहले ही दिल्ली के हर पीजी को सुरक्षित बनाने की जिम्मेदारी तय होगी?

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