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एशिया कप ट्रॉफी विवाद पर बीसीसीआई का बड़ा बयान: राजीव शुक्ला बोले—‘नकवी ने कोई आपत्ति नहीं जताई, फैसला सामूहिक था’

खेल | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 15 सितंबर 2026

ट्रॉफी नहीं ली, लेकिन फैसला पूरी टीम और बोर्ड का था

एशिया कप ट्रॉफी को लेकर चल रहे विवाद के बीच भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई ने अब अपना रुख साफ कर दिया है। बीसीसीआई के उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने कहा है कि भारतीय महिला क्रिकेट टीम का एशिया कप की ट्रॉफी एशियाई क्रिकेट परिषद के अध्यक्ष मोहसिन नकवी से स्वीकार नहीं करना किसी एक व्यक्ति का फैसला नहीं था, बल्कि यह बोर्ड का सामूहिक निर्णय था। शुक्ला के मुताबिक, नकवी ने भी इस फैसले पर कोई आपत्ति नहीं जताई। यानी मैदान पर भारत की शानदार जीत के बाद ट्रॉफी लेने के तरीके को लेकर जो विवाद खड़ा हुआ, बीसीसीआई का कहना है कि इसमें संगठन के स्तर पर सोच-समझकर फैसला लिया गया था।

भारत ने श्रीलंका को 72 रन से हराकर जीता एशिया कप

भारत की महिला टीम ने 13 सितंबर को दुबई में खेले गए फाइनल में श्रीलंका को 72 रन से हराकर एशिया कप का खिताब अपने नाम किया। जीत के बाद भारतीय टीम ने ट्रॉफी मोहसिन नकवी से स्वीकार नहीं की। नकवी एशियाई क्रिकेट परिषद के अध्यक्ष हैं। यह घटना इसलिए भी चर्चा में आई क्योंकि इससे पहले 2025 के एशिया कप में भारतीय पुरुष टीम ने भी नकवी से ट्रॉफी नहीं ली थी। उस समय यह कदम पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान संबंधों में पैदा हुए तनाव की पृष्ठभूमि में देखा गया था। पहलगाम हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी।

राजीव शुक्ला ने कहा—यह ‘सामूहिक फैसला’ था

राजीव शुक्ला ने सोमवार को साफ शब्दों में कहा कि ट्रॉफी स्वीकार न करने का फैसला बीसीसीआई का सामूहिक निर्णय था। उन्होंने यह भी कहा कि नकवी ने इस फैसले पर कोई विरोध या आपत्ति नहीं जताई। इस बयान का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि सोशल मीडिया और क्रिकेट जगत में यह सवाल उठ रहा था कि आखिर भारतीय टीम ने ट्रॉफी क्यों नहीं ली और क्या यह फैसला खिलाड़ियों ने खुद लिया था। बीसीसीआई अब स्पष्ट कर रहा है कि यह केवल खिलाड़ियों का व्यक्तिगत फैसला नहीं था, बल्कि बोर्ड की सहमति से लिया गया निर्णय था।

मैच के दौरान बातचीत की तस्वीरों पर भी सफाई

फाइनल के दौरान बीसीसीआई के सचिव देवजीत सैकिया और मोहसिन नकवी के बीच बातचीत की कुछ तस्वीरें सामने आई थीं। इन तस्वीरों को लेकर भी तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं। राजीव शुक्ला ने इस पर भी सफाई देते हुए कहा कि दोनों के बीच हुई बातचीत सिर्फ सामान्य और नियमित बातचीत थी। यानी उस बातचीत को ट्रॉफी विवाद या किसी अलग राजनीतिक संदेश से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। बीसीसीआई की ओर से यह स्पष्टीकरण इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि तस्वीरें सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर अलग-अलग तरह के दावे किए जा रहे थे।

क्रिकेट और राजनीति का तनाव फिर सामने आया

एशिया कप का यह पूरा विवाद एक बार फिर दिखाता है कि भारत और पाकिस्तान के बीच राजनीतिक तनाव का असर क्रिकेट पर भी पड़ रहा है। सामान्य तौर पर क्रिकेट का मैदान खेल भावना और प्रतिस्पर्धा का स्थान माना जाता है, लेकिन जब दोनों देशों के राजनीतिक और सुरक्षा संबंध बेहद तनावपूर्ण हों, तो क्रिकेट से जुड़े छोटे से छोटे घटनाक्रम भी बड़े संदेश के रूप में देखे जाने लगते हैं। यहां भी भारत की टीम ने मैदान पर खिताब जीता, लेकिन ट्रॉफी लेने की प्रक्रिया ने मैच के बाद की चर्चा को एक अलग दिशा दे दी।

भारत की जीत सबसे बड़ा संदेश

हालांकि ट्रॉफी को लेकर विवाद जरूर हुआ, लेकिन खेल के लिहाज से भारतीय महिला टीम की उपलब्धि बेहद बड़ी रही। श्रीलंका को 72 रन से हराकर भारत ने एशिया कप का खिताब जीता और अपनी मजबूत स्थिति कायम रखी। भारतीय टीम के लिए असली उपलब्धि मैदान पर प्रदर्शन और खिताब जीतना रहा। बीसीसीआई के रुख से भी यही संदेश देने की कोशिश दिखाई देती है कि ट्रॉफी स्वीकार करने का फैसला अलग विषय है, जबकि टूर्नामेंट में भारत की जीत अपनी जगह सबसे महत्वपूर्ण है।

नकवी की आपत्ति नहीं थी तो विवाद इतना बड़ा क्यों?

राजीव शुक्ला के बयान के बाद अब एक और सवाल सामने आता है। अगर बीसीसीआई के मुताबिक फैसला सामूहिक था और मोहसिन नकवी ने भी इस पर कोई आपत्ति नहीं जताई, तो फिर इस पूरे मामले को लेकर इतना विवाद क्यों हुआ? क्या खेल के मंच पर राजनीतिक तनाव का असर लगातार बढ़ता जा रहा है? और क्या आने वाले भारत-पाकिस्तान मुकाबलों में भी ऐसे ही प्रतीकात्मक फैसले देखने को मिलेंगे?

फिलहाल भारत ने मैदान पर श्रीलंका को हराकर एशिया कप जीत लिया है, ट्रॉफी लेने का फैसला बीसीसीआई सामूहिक निर्णय बता रहा है और नकवी की ओर से किसी आपत्ति से इनकार किया गया है। लेकिन बड़ा सवाल यही है—क्या भारत-पाकिस्तान के मौजूदा तनाव के दौर में क्रिकेट अब सिर्फ क्रिकेट रह पाएगा, या हर मुकाबले और हर ट्रॉफी के साथ राजनीति भी मैदान पर उतरती रहेगी?

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