राष्ट्रीय/ गोवा/ अपराध | ABC NATIONAL NEWS | पणजी | 14 सितंबर 2026
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद किया आत्मसमर्पण
तहलका के पूर्व प्रधान संपादक तरुण तेजपाल ने सोमवार, 14 सितंबर 2026 को गोवा की अदालत के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। उन्हें 2013 के यौन उत्पीड़न मामले में 10 साल की कठोर कारावास की सजा काटनी होगी। यह आत्मसमर्पण सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के बाद हुआ है, जिसमें 25 अगस्त को अदालत ने तेजपाल को तीन सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने और अपनी सजा भुगतने का निर्देश दिया था। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने तेजपाल की आत्मसमर्पण से छूट देने की मांग को भी खारिज कर दिया था। इसके बाद अब अदालत के निर्देश के अनुसार उन्होंने सोमवार को कोर्ट के सामने सरेंडर किया और उन्हें जेल भेज दिया गया।
बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले के बाद सजा बरकरार
यह मामला वर्ष 2013 का है और लंबे समय तक अदालतों में चलता रहा। तरुण तेजपाल को इस मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने दोषी ठहराया था और उन्हें 10 साल की सजा सुनाई गई थी। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। 25 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने तेजपाल को राहत देने से इनकार करते हुए उन्हें तय समय के भीतर आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया। अदालत ने साफ कर दिया कि उन्हें अपनी सजा भुगतने के लिए जेल जाना होगा।
आत्मसमर्पण से छूट की मांग भी हुई खारिज
सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति अलोक अराधे की पीठ ने तेजपाल की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें उन्होंने आत्मसमर्पण से छूट देने की मांग की थी। अदालत के आदेश के बाद उनके पास निर्धारित समय के भीतर जेल जाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा। सोमवार को उन्होंने गोवा कोर्ट पहुंचकर औपचारिक रूप से आत्मसमर्पण किया और अब उन्हें 10 साल की कठोर कारावास की सजा पूरी करनी होगी।
एक समय तहलका के बेहद प्रभावशाली संपादक थे तेजपाल
तरुण तेजपाल पत्रकारिता की दुनिया में तहलका के प्रधान संपादक के रूप में काफी चर्चित रहे हैं। तहलका अपने खोजी पत्रकारिता अभियानों के कारण राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुका था और तेजपाल उसका प्रमुख चेहरा थे। लेकिन वर्ष 2013 में सामने आए यौन उत्पीड़न मामले ने उनके करियर और सार्वजनिक जीवन को पूरी तरह बदल दिया। इसके बाद यह मामला भारतीय न्याय व्यवस्था में लंबे समय तक चला और अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद तेजपाल ने अपनी सजा काटने के लिए जेल की ओर कदम बढ़ाया है।
लंबी कानूनी लड़ाई का फिलहाल एक बड़ा पड़ाव
इस मामले की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि लगभग 13 साल बाद अब तेजपाल ने अदालत के आदेश के अनुसार जेल में अपनी सजा शुरू कर दी है। निचली अदालत से लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट तक मामला पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट द्वारा आत्मसमर्पण से छूट की मांग खारिज किए जाने के बाद कानूनी प्रक्रिया का यह महत्वपूर्ण चरण सामने आया है।
तरुण तेजपाल का आत्मसमर्पण सिर्फ एक चर्चित पत्रकार के जेल जाने की खबर नहीं है, बल्कि यह इस बात की भी याद दिलाता है कि सार्वजनिक पद, प्रभाव, प्रतिष्ठा और सामाजिक हैसियत से ऊपर न्यायिक प्रक्रिया अपना रास्ता तय करती है।



