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भारतीय क्रिकेट को बचाने के लिए गावस्कर का बड़ा सुझाव: सचिन, द्रविड़, गांगुली और शास्त्री को फिर बड़ी जिम्मेदारी देने की मांग

खेल | ABC NATIONAL NEWS | मुंबई | 14 सितंबर 2026

गावस्कर ने बीसीसीआई के सामने रखा बड़ा सवाल

भारतीय क्रिकेट में घरेलू क्रिकेट को लेकर लगातार उठ रहे सवालों के बीच पूर्व भारतीय कप्तान सुनील गावस्कर ने बीसीसीआई को एक बेहद महत्वपूर्ण सुझाव दिया है। गावस्कर का मानना है कि भारतीय क्रिकेट में जो भी कमियां हैं, उन्हें दूर करने के लिए देश के महान और अनुभवी पूर्व खिलाड़ियों की विशेषज्ञता का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया है कि क्रिकेट सलाहकार समिति यानी सीएसी का दायरा बढ़ाया जाए और उसमें सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़, सौरव गांगुली, रवि शास्त्री, अनिल कुंबले, हरभजन सिंह और वीरेंद्र सहवाग जैसे अनुभवी पूर्व खिलाड़ियों को शामिल किया जाए।

सिर्फ चयनकर्ता और कोच चुनने तक सीमित क्यों रहे समिति?

गावस्कर ने सवाल उठाया है कि अगर क्रिकेट सलाहकार समिति बनाई गई है, तो उसकी भूमिका सिर्फ मुख्य कोच या चयनकर्ताओं की नियुक्ति तक सीमित क्यों रहे? उनके अनुसार, भारतीय क्रिकेट को केवल टीम चयन से नहीं, बल्कि घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम, खिलाड़ियों के विकास और पूरे क्रिकेट ढांचे को ध्यान में रखकर देखने की जरूरत है। उनका सुझाव है कि सीएसी को ज्यादा व्यापक जिम्मेदारी दी जाए ताकि अनुभवी पूर्व क्रिकेटर सीधे भारतीय क्रिकेट की व्यवस्था को बेहतर बनाने में योगदान दे सकें।

दुलीप ट्रॉफी ने फिर खोल दिए पुराने सवाल

गावस्कर का यह बयान ऐसे समय आया है जब हाल ही में दुलीप ट्रॉफी के फाइनल को लेकर उन्होंने नाराजगी जताई थी। उन्होंने ईशान किशन की कप्तानी वाली ईस्ट जोन की टीम के रवैये पर सवाल उठाया था। ईस्ट जोन ने पहली पारी की बढ़त के आधार पर खिताब अपने नाम किया। गावस्कर को यह तरीका पसंद नहीं आया और उन्होंने सवाल किया कि अगर घरेलू क्रिकेट में टीमों का लक्ष्य सिर्फ पहली पारी की बढ़त के आधार पर खिताब हासिल करना हो, तो इससे खिलाड़ियों की प्रतिस्पर्धात्मक मानसिकता और टेस्ट क्रिकेट के लिए उनकी तैयारी पर क्या असर पड़ेगा।

 

गावस्कर बोले—अनुभव का इस्तेमाल क्यों नहीं?

गावस्कर ने अपने कॉलम में कहा कि भारतीय क्रिकेट में ऐसे कई पूर्व खिलाड़ी हैं जिनके पास खेलने के साथ-साथ कप्तानी, कोचिंग, चयन और क्रिकेट प्रशासन का लंबा अनुभव है। ऐसे लोगों की सलाह भारतीय क्रिकेट व्यवस्था के लिए काफी उपयोगी हो सकती है। उनका सवाल सीधा है—जब देश के पास इतने बड़े क्रिकेट दिग्गजों का अनुभव मौजूद है, तो उसका इस्तेमाल क्यों न किया जाए?

सचिन, द्रविड़, गांगुली और शास्त्री जैसे नाम क्यों महत्वपूर्ण?

सचिन तेंदुलकर का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में दशकों का अनुभव है। राहुल द्रविड़ भारतीय टीम के कप्तान और मुख्य कोच रह चुके हैं। सौरव गांगुली कप्तान के साथ-साथ बीसीसीआई अध्यक्ष भी रह चुके हैं। रवि शास्त्री भारतीय टीम के मुख्य कोच रहे हैं और अनिल कुंबले भारतीय टीम की कोचिंग की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। यानी गावस्कर जिन नामों का सुझाव दे रहे हैं, उनके पास क्रिकेट को खिलाड़ी, कप्तान, कोच या प्रशासक के रूप में देखने का अलग-अलग अनुभव है। गावस्कर चाहते हैं कि इन अनुभवों को एक जगह लाकर भारतीय क्रिकेट के भविष्य के लिए इस्तेमाल किया जाए।

द्रविड़ और सचिन की बात में अलग वजन होगा

गावस्कर ने खास तौर पर यह तर्क दिया कि जब राहुल द्रविड़ और सचिन तेंदुलकर जैसे बड़े खिलाड़ी मुख्य कोच और राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी के प्रमुख के साथ बैठकर भारतीय क्रिकेट पर चर्चा करेंगे, तो उनकी बात का प्रभाव अलग होगा। उनका मानना है कि अनुभव और विशेषज्ञता जब एक साथ आएगी, तो क्रिकेट से जुड़े बड़े फैसलों पर ज्यादा गंभीर और व्यापक चर्चा हो सकेगी।

महिला क्रिकेट के लिए भी ऐसी समिति की मांग

गावस्कर ने सिर्फ पुरुष क्रिकेट की बात नहीं की। उन्होंने महिला क्रिकेट के लिए भी इसी तरह की समिति बनाने का सुझाव दिया है। उनका कहना है कि महिला क्रिकेट में भी अनुभव और विशेषज्ञता को एक साथ लाकर भविष्य से जुड़े बड़े फैसले किए जाने चाहिए। भारतीय महिला क्रिकेट लगातार आगे बढ़ रहा है और ऐसे समय में अनुभवी खिलाड़ियों की सलाह और मार्गदर्शन उसके विकास को और मजबूत कर सकता है।

सीएसी अभी है या नहीं, इस पर भी सवाल

इस पूरे मामले में एक दिलचस्प सवाल यह भी है कि सीएसी की मौजूदा स्थिति को लेकर स्पष्टता कितनी है। 2022 में अशोक मल्होत्रा, जतिन परांजपे और सुलक्षणा नाइक को समिति में नियुक्त किया गया था। इस समिति की मुख्य जिम्मेदारियों में कोच और चयनकर्ताओं की नियुक्ति जैसी प्रक्रिया शामिल रही है। लेकिन मौजूदा समय में समिति सक्रिय है या उसे खत्म कर दिया गया है, इसे लेकर स्पष्ट तस्वीर सामने नहीं है।

गावस्कर का सवाल—क्या यह सिर्फ सपना है?

गावस्कर ने अपने सुझाव को एक बेहद दिलचस्प सवाल के साथ खत्म किया। उन्होंने पूछा कि क्या सचिन, द्रविड़, गांगुली, शास्त्री, कुंबले और दूसरे दिग्गजों को एक साथ लाकर भारतीय क्रिकेट के लिए बड़ी जिम्मेदारी देने का विचार वास्तव में कभी जमीन पर उतर पाएगा, या यह सिर्फ एक सपना बनकर रह जाएगा।

गावस्कर का संदेश साफ है—भारतीय क्रिकेट के पास प्रतिभा की कमी नहीं है, बल्कि जरूरत उस अनुभव को सही जगह इस्तेमाल करने की है। अगर देश के इतने महान क्रिकेटरों का ज्ञान और अनुभव एक मंच पर आ जाए, तो क्या घरेलू क्रिकेट से लेकर राष्ट्रीय टीम तक कई पुरानी समस्याओं का समाधान निकाला जा सकता है? और सबसे बड़ा सवाल—क्या बीसीसीआई गावस्कर के इस सुझाव को गंभीरता से लेकर भारतीय क्रिकेट की व्यवस्था में ऐसा बड़ा बदलाव करने को तैयार होगा?

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