राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 10 सितंबर 2026
कांग्रेस का बड़ा आरोप: राजनीतिक चंदे की आड़ में काले धन को सफेद करने का खेल?
कांग्रेस ने देश में 3,260 Registered Unrecognised Political Parties यानी पंजीकृत लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को लेकर बड़ा आरोप लगाया है। पार्टी का दावा है कि इन दलों के जरिए करीब ₹10,000 करोड़ की टैक्स चोरी हुई और राजनीतिक चंदे के नाम पर बिना हिसाब के पैसे को वैध दिखाने का रास्ता बनाया गया। कांग्रेस ने इस पूरे मामले की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति यानी JPC बनाने की मांग की है। हालांकि, ये आरोप कांग्रेस ने लगाए हैं और उनकी स्वतंत्र पुष्टि इस खबर में नहीं हुई है।
जयराम रमेश ने उठाया बड़ा सवाल
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि ऐसे हजारों दलों को “BJP patronage” यानी भाजपा के संरक्षण का फायदा मिल रहा है। कांग्रेस का कहना है कि इन दलों के जरिए चंदे की व्यवस्था का गलत इस्तेमाल किया गया। पार्टी ने सवाल उठाया कि अगर राजनीतिक दलों के नाम पर बड़े पैमाने पर पैसा लिया जा रहा है और उस पैसे पर टैक्स से जुड़े नियमों का पालन नहीं हो रहा, तो इसकी पूरी जांच क्यों नहीं होनी चाहिए?
शक्तिसिंह गोहिल ने JPC जांच की मांग की
कांग्रेस सांसद शक्तिसिंह गोहिल ने बुधवार को नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस मामले को सामने रखा। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दलों का इस्तेमाल बिना हिसाब वाले पैसे को राजनीतिक चंदे के रास्ते वैध दिखाने के लिए किया जा रहा है। कांग्रेस के अनुसार, इसमें पैसा एक जगह से दूसरी जगह भेजने और फिर अलग रास्ते से वापस लाने जैसी गतिविधियां शामिल हो सकती हैं।
गोहिल ने मांग की कि सिर्फ इन राजनीतिक दलों की ही नहीं, बल्कि उन्हें पैसा देने वाले लोगों और संस्थाओं की भी जांच होनी चाहिए। कांग्रेस का कहना है कि अगर आरोप सही पाए जाते हैं तो यह केवल टैक्स चोरी का मामला नहीं रहेगा, बल्कि देश की राजनीतिक चंदा व्यवस्था की पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े करेगा।
2025 की रिपोर्ट का भी कांग्रेस ने दिया हवाला
कांग्रेस का आरोप है कि यह मामला नया नहीं है। पार्टी के अनुसार, इस मुद्दे से जुड़ी एक रिपोर्ट 2025 में भी सामने आई थी, लेकिन इसके बावजूद सरकार ने पर्याप्त कार्रवाई नहीं की। कांग्रेस ने इसी आधार पर सवाल उठाया कि जब राजनीतिक दलों के वित्तीय लेन-देन पर पहले से सवाल उठ रहे थे, तो संबंधित एजेंसियों और सरकार ने अब तक क्या कदम उठाए?
क्या राजनीतिक चंदे की व्यवस्था में बड़ा छेद है?
भारत में राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे पर पहले से ही पारदर्शिता को लेकर बहस होती रही है। राजनीतिक दलों की आय, दान देने वालों की जानकारी और टैक्स नियमों का पालन लोकतांत्रिक व्यवस्था में बेहद महत्वपूर्ण है। अगर किसी राजनीतिक संगठन को सिर्फ इस उद्देश्य से इस्तेमाल किया जाता है कि बिना हिसाब के पैसे को चंदे के रूप में दिखाया जा सके, तो यह चुनावी व्यवस्था और राजनीतिक वित्तीय पारदर्शिता दोनों के लिए गंभीर चिंता का विषय होगा।
लेकिन यहां एक जरूरी बात यह भी है कि 3,260 दलों में से हर दल पर टैक्स चोरी या गलत काम करने का आरोप नहीं लगाया जा सकता। कांग्रेस ने जो आरोप लगाए हैं, उनकी जांच के बाद ही यह साफ होगा कि वास्तव में कितने दल नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं और कितना पैसा संदिग्ध तरीके से इस्तेमाल हुआ।
कांग्रेस ने सरकार से मांगा जवाब
कांग्रेस का कहना है कि मामले की जांच किसी एक सरकारी विभाग तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। पार्टी चाहती है कि संसद की संयुक्त समिति पूरे मामले की जांच करे और यह पता लगाए कि राजनीतिक दलों को मिले चंदे का पैसा कहां से आया, किसे दिया गया और क्या इसमें टैक्स नियमों का उल्लंघन हुआ।
अब बड़ा सवाल यह है कि अगर ₹10,000 करोड़ के टैक्स चोरी के आरोपों में दम है, तो इसकी स्वतंत्र और व्यापक जांच से सरकार को क्या परेशानी होनी चाहिए? और अगर आरोप गलत हैं, तो जांच के जरिए सच्चाई देश के सामने क्यों न आ जाए?
राजनीतिक चंदा लोकतंत्र की ताकत है, लेकिन अगर उसी रास्ते का इस्तेमाल बिना हिसाब के पैसे को वैध दिखाने के लिए होता है, तो सवाल सिर्फ टैक्स का नहीं—पूरी चुनावी व्यवस्था की पारदर्शिता का बन जाता है।



