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ईरान और अमेरिका के हमले जारी; होर्मुज फिर बारूदी सुरंगों के साये में, खाड़ी में बढ़ा तनाव

अमेरिका-ईरान टकराव फिर हुआ तेज, मिसाइलों और ड्रोन से कई मोर्चों पर जवाबी कार्रवाई; शादी समारोह पर हमले में नागरिकों की मौत के दावे से बढ़ा विवाद

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 3 सितंबर 2026

अमेरिका और ईरान के बीच पिछले कुछ समय से चल रहा तनाव अब एक बार फिर बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। मंगलवार और बुधवार को दोनों पक्षों के बीच कई मोर्चों पर हमले और जवाबी हमले हुए। अमेरिकी सेना ने ईरान के दक्षिणी तट पर रिवोल्यूशनरी गार्ड से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाने की बात कही, वहीं ईरान ने इसके जवाब में अमेरिकी ठिकानों और अमेरिका के सहयोगी देशों की ओर मिसाइल और ड्रोन दागे। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष अब और व्यापक क्षेत्रीय युद्ध की दिशा में बढ़ रहा है।

अमेरिका के हमले, ईरान का जवाब

अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, ताजा हमलों में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी आईआरजीसी से जुड़े हवाई रक्षा तंत्र, रडार, समुद्री संसाधन, बारूदी सुरंग बिछाने की क्षमता और संचार केंद्रों को निशाना बनाया गया। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार मंगलवार की कार्रवाई में करीब 100 ठिकानों पर हमले किए गए। कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि अमेरिकी सेना ने ईरान के दो सरकारी तेल टैंकरों को निशाना बनाया। यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे संघर्ष का दायरा केवल सैन्य ठिकानों से आगे बढ़कर समुद्री और ऊर्जा ढांचे तक पहुंचता दिखाई दे रहा है।

लेकिन अमेरिका की कार्रवाई के बाद ईरान चुप नहीं बैठा। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड ने अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने की घोषणा की और क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी वाले कई स्थानों की ओर मिसाइल और ड्रोन भेजे। जॉर्डन ने अपने हवाई क्षेत्र में आने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने की जानकारी दी, जबकि बहरीन ने ईरानी ड्रोन को अपने हवाई सुरक्षा तंत्र द्वारा मार गिराने की बात कही। कुवैत ने भी ड्रोन हमले की सूचना दी। इराक के कुर्द क्षेत्र में एरबिल के आसपास अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाए जाने की खबरें सामने आईं, हालांकि वहां हुए नुकसान और अमेरिकी सैनिकों के हताहत होने के ईरानी दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

होर्मुज बना संघर्ष का सबसे बड़ा केंद्र

इस पूरे टकराव के केंद्र में अब होर्मुज जलडमरूमध्य आ गया है। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में शामिल यह समुद्री रास्ता फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। यहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और गैस दुनिया के दूसरे हिस्सों तक पहुंचता है। इसलिए इस समुद्री मार्ग में किसी भी तरह की रुकावट का सीधा असर केवल अमेरिका और ईरान पर नहीं बल्कि एशिया, यूरोप और पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

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अमेरिका का कहना है कि ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने समुद्री मार्ग में बारूदी सुरंगें बिछाने और वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाने की कोशिश की। इसी को अमेरिकी हमलों का प्रमुख कारण बताया गया है। दूसरी ओर ईरान ने अमेरिकी सैन्य दबाव के जवाब में अपनी सैन्य क्षमता का इस्तेमाल जारी रखा है। यही वजह है कि होर्मुज में जहाजों की आवाजाही को लेकर चिंता लगातार बनी हुई है।

दो टैंकर बारूदी सुरंगों से टकराने का दावा

ईरानी पक्ष की ओर से दावा किया गया कि होर्मुज से गुजरने वाले दो टैंकर समुद्री बारूदी सुरंगों की चपेट में आए। सोमवार को होर्मुज से निकल रहे जहाजों पर हमले की खबरों के बाद समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई है। सऊदी शिपिंग कंपनी बहरी ने भी अपने एक बड़े तेल टैंकर पर हमले में दो फिलिपीनी चालक दल के सदस्यों की मौत की जानकारी दी है। इस घटना ने यह चिंता बढ़ा दी है कि यदि व्यावसायिक जहाजों के लिए यह समुद्री मार्ग लंबे समय तक असुरक्षित रहता है तो वैश्विक तेल आपूर्ति पर बड़ा दबाव बन सकता है।

अमेरिका कहता है—समुद्री मार्ग खोलने की कोशिश जारी

अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि उनकी कार्रवाई का एक प्रमुख उद्देश्य होर्मुज में जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित बनाना है। अमेरिकी सेना ने दावा किया है कि उसने ईरान की समुद्री हमले की क्षमता और बारूदी सुरंग बिछाने की क्षमता को नुकसान पहुंचाया है। अमेरिका की ओर से यह भी कहा गया कि उसके सैन्य बल जहाजों की आवाजाही में मदद कर रहे हैं और मंगलवार को करीब 40 जहाजों के जलडमरूमध्य से आने-जाने की जानकारी दी गई।

लेकिन दूसरी ओर जमीनी स्थिति इतनी सरल नहीं दिखाई देती। कुछ ही समय में जहाजों पर हमले, मिसाइल हमले और समुद्री सुरंगों की आशंका सामने आना बताता है कि होर्मुज में सुरक्षा की स्थिति अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। यही कारण है कि दुनिया के ऊर्जा बाजार इस संघर्ष को बेहद करीब से देख रहे हैं।

शादी समारोह पर हमले से मचा हड़कंप

अमेरिकी हमलों के बीच ईरान के दक्षिणी तट के कुहिस्तक इलाके में एक घर को निशाना बनाए जाने की खबर ने विवाद को और गंभीर बना दिया। ईरानी अधिकारियों और ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, वहां शादी का कार्यक्रम चल रहा था और हमले में कम से कम चार लोग मारे गए तथा दर्जनों लोग घायल हुए। ईरानी रेड क्रिसेंट ने पांच मौतों और 50 घायलों की जानकारी दी, जबकि अन्य ईरानी रिपोर्टों में घायलों की संख्या 68 तक बताई गई। मृतकों में एक चार साल का बच्चा भी शामिल होने की जानकारी सामने आई है।

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अमेरिकी सेना ने नागरिकों को निशाना बनाने से इनकार किया है और कहा है कि उसे ईरानी सरकारी मीडिया से आए इन दावों की जानकारी है तथा मामले की जांच की जा रही है। इसलिए इस घटना में नागरिकों की मौत का अंतिम जिम्मेदार कौन है और हमला वास्तव में किस तरह हुआ, इस पर स्वतंत्र पुष्टि का इंतजार अभी जरूरी है।

मिसाइल के टुकड़ों पर भी उठे सवाल

हमले के बाद सामने आई तस्वीरों में मिसाइल के मलबे को लेकर हथियार विशेषज्ञों ने अमेरिकी निर्मित एसएलएएम-ईआर मिसाइल होने की संभावना जताई है। यह एक सटीक निशाना साधने वाली क्रूज मिसाइल है। हालांकि केवल मलबे की तस्वीरों के आधार पर पूरे हमले की जिम्मेदारी और परिस्थितियों का अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। अमेरिकी सेना ने घटना से जुड़े दावों की जानकारी होने की बात कही है।

खाड़ी के कई देश भी चपेट में

ईरान और अमेरिका के बीच सीधा टकराव अब आसपास के देशों के लिए भी खतरा बन रहा है। बहरीन ने ईरानी ड्रोन रोकने की बात कही। जॉर्डन ने अपने हवाई क्षेत्र में आने वाली मिसाइलों को रोकने की जानकारी दी। कुवैत में एक आवासीय परिसर के पास ड्रोन हमले के बाद आग लगने की सूचना आई। इराक के एरबिल क्षेत्र में भी अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाए जाने की खबरें आईं। इससे साफ है कि संघर्ष केवल ईरान और अमेरिका तक सीमित रहने की स्थिति में नहीं है।

तेल की कीमतों पर सीधा असर

होर्मुज में तनाव बढ़ने का सबसे पहला और सबसे बड़ा आर्थिक असर तेल बाजार पर दिखाई देता है। रिपोर्टों के अनुसार, ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत करीब 95 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है और युद्ध शुरू होने के मुकाबले इसमें 30 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। अमेरिकी ऊर्जा अधिकारियों के अनुसार सोमवार को करीब 1.7 करोड़ बैरल कच्चा तेल होर्मुज से होकर गुजरा, जो युद्ध के दौरान इस मार्ग से गुजरने वाली सबसे बड़ी दैनिक मात्रा बताई गई।

अगर होर्मुज में जहाजों की आवाजाही लंबे समय तक बाधित होती है तो इसका असर पेट्रोल, डीजल, विमान ईंधन, परिवहन और महंगाई पर पड़ सकता है। भारत समेत एशिया के कई देशों के लिए यह चिंता इसलिए भी बड़ी है क्योंकि उनकी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा समुद्री रास्तों से आने वाले आयात पर निर्भर करता है।

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ईरान पर आर्थिक दबाव भी बढ़ रहा

दूसरी तरफ ईरान खुद भी भारी आर्थिक दबाव का सामना कर रहा है। अमेरिकी प्रतिबंधों और समुद्री नाकाबंदी के कारण ईरान में ईंधन और दूसरी आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता पर दबाव की खबरें हैं। ईरानी मुद्रा रियाल भी रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचने की जानकारी सामने आई है। यानी एक तरफ सैन्य टकराव बढ़ रहा है, तो दूसरी तरफ उसकी कीमत ईरान की अर्थव्यवस्था भी चुका रही है।

अमेरिका के लिए भी आसान नहीं है यह स्थिति

यह कहना भी जल्दबाजी होगी कि इस संघर्ष का कोई स्पष्ट और अंतिम परिणाम सामने आ गया है। अमेरिका के पास अत्याधुनिक सैन्य क्षमता और क्षेत्र में मजबूत सैन्य मौजूदगी है, लेकिन ईरान के पास मिसाइल, ड्रोन, समुद्री युद्ध और क्षेत्र में मौजूद सहयोगी नेटवर्क के जरिए जवाब देने की क्षमता है। हाल की घटनाएं दिखाती हैं कि एक पक्ष की कार्रवाई के बाद दूसरा पक्ष जवाब देने की कोशिश कर रहा है और इस तरह हमलों का चक्र लगातार आगे बढ़ रहा है। रॉयटर्स के अनुसार दोनों देशों के बीच हालिया आदान-प्रदान जुलाई के बाद सबसे गंभीर सैन्य टकरावों में शामिल है।

सबसे बड़ा सवाल—अगला कदम क्या होगा?

मौजूदा स्थिति में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यह संघर्ष आगे किस दिशा में जाएगा। क्या अमेरिका और ईरान फिर बातचीत की मेज पर लौटेंगे, या होर्मुज में समुद्री टकराव और मिसाइल हमले और बढ़ेंगे? क्या खाड़ी के दूसरे देश सीधे युद्ध में खिंचेंगे? और क्या तेल की आपूर्ति में किसी बड़े व्यवधान से पूरी दुनिया में महंगाई की नई लहर आएगी? तस्वीर बेहद साफ है—न तो इस संघर्ष का कोई अंतिम निष्कर्ष सामने आया है और न ही इसे खत्म करने का कोई स्थायी रास्ता दिखाई दे रहा है। अमेरिका अपने सैन्य अभियान को आगे बढ़ा रहा है, ईरान जवाबी कार्रवाई कर रहा है और होर्मुज दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्गों में बदल चुका है। ऐसे में आने वाले कुछ दिन यह तय करने में बेहद महत्वपूर्ण होंगे कि यह टकराव सीमित सैन्य कार्रवाई तक रहता है या पूरे मध्य-पूर्व को एक और बड़े संकट में धकेल देता है।

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