शिक्षा/ अपराध/ दिल्ली | ABC NATIONAL NEWS | 1 सितंबर 2026
10 साल की बच्ची की मौत से स्कूल की कार्यप्रणाली पर सवाल
दिल्ली के ईस्ट विनोद नगर स्थित एक सरकारी स्कूल में 10 वर्षीय बच्ची की मौत के बाद स्कूल की कार्यप्रणाली और बच्चों के साथ अनुशासन के नाम पर किए जाने वाले व्यवहार पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बच्ची की 27 अगस्त को IHBAS में इलाज के दौरान मौत हुई। परिवार के अनुसार, 22 जुलाई को स्कूल में किताब नहीं लाने पर बच्ची को कक्षा के पीछे हाथ ऊपर करके खड़ा किया गया और बाद में उसे कक्षा में बंद कर दिया गया। घटना के बाद उसकी तबीयत बिगड़ी और उसे अस्पताल ले जाना पड़ा। परिवार ने सोमवार को स्कूल के बाहर प्रदर्शन कर मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की।
किताब भूलने की सजा इतनी कठोर क्यों?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि एक 10 साल के बच्चे के किताब लाना भूल जाने पर उसे हाथ ऊपर करके खड़ा करने और कक्षा में बंद करने जैसी सजा क्यों दी गई? बच्चों से गलती होना स्वाभाविक है और स्कूल का उद्देश्य उन्हें गलती से सीखने तथा सुधारने का अवसर देना होना चाहिए। अनुशासन के नाम पर ऐसा कोई कदम नहीं उठाया जाना चाहिए जिससे बच्चा भय, तनाव या असुरक्षा की स्थिति में पहुंच जाए। स्कूल बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण होना चाहिए, जहां उन्हें डांट या सजा से ज्यादा समझ और मार्गदर्शन मिले।
बच्ची बेहोश मिली, फिर अस्पताल पहुंची
परिवार के अनुसार, 22 जुलाई की सुबह बच्ची स्कूल गई थी। करीब 9:30 बजे शिक्षक ने परिवार को फोन कर बताया कि बच्ची ने कपड़े गंदे कर लिए हैं और कपड़े बदलने के लिए लाने को कहा। कुछ देर बाद परिवार को उसे स्कूल से ले जाने के लिए कहा गया। जब उसके दादा-दादी स्कूल पहुंचे तो बच्ची बेहोशी की हालत में मिली। होश आने के बाद उसने परिवार को बताया कि वह किताब लाना भूल गई थी, जिसके बाद उसे कक्षा के पीछे हाथ ऊपर करके खड़ा किया गया था।
कक्षा में बंद करने का मामला बेहद गंभीर
परिवार के अनुसार, शिक्षक और अन्य बच्चे कक्षा से चले गए और बच्ची को अंदर बंद कर दिया गया। बच्ची ने दरवाजा पीटा और बाहर निकलने के लिए आवाज लगाई। बाद में दरवाजा खोला गया तो वह गिर चुकी थी। किसी भी बच्चे को अकेले कक्षा में बंद करना क्यों हुआ, इसकी पूरी जांच आवश्यक है। यदि कोई बच्चा अचानक अस्वस्थ हो जाए या बेहोश हो जाए तो स्कूल प्रशासन की पहली जिम्मेदारी उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना और तत्काल चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराना होती है।
बच्ची पहले से गंभीर बीमारी का इलाज करा रही थी
इस मामले में चिकित्सा संबंधी तथ्य भी बेहद महत्वपूर्ण हैं। IHBAS के अधिकारियों के अनुसार बच्ची करीब छह महीने से Subacute Sclerosing Panencephalitis (SSPE) नामक गंभीर मस्तिष्क संबंधी बीमारी का इलाज करा रही थी। संस्थान के मुताबिक यह बीमारी measles virus के persistent infection से होने वाली progressive brain inflammation है और इसकी mortality rate करीब 95 प्रतिशत बताई गई है। बच्ची की हालत बिगड़ने के बाद 27 अगस्त को उसकी मौत हुई। इसलिए उसकी मृत्यु को सीधे स्कूल की घटना से जोड़ना उचित नहीं होगा। लेकिन स्कूल में उसके साथ क्या हुआ और उस समय उसकी देखभाल कैसे की गई—इन सवालों की जांच जरूरी है।
सरकार ने जांच के दिए आदेश
दिल्ली सरकार ने मामले की निष्पक्ष जांच के आदेश दिए हैं। शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि घटना गंभीर और चिंताजनक है तथा जांच के दौरान संबंधित शिक्षक का तत्काल तबादला किया गया है। सरकार ने यह भी कहा है कि जांच में लापरवाही, कर्तव्य में चूक या किसी अन्य खामी की पुष्टि होने पर सख्त और उचित कार्रवाई की जाएगी। अब जांच में स्कूल की भूमिका, बच्ची की स्थिति बिगड़ने के बाद उठाए गए कदम और परिवार को दी गई सूचना सहित सभी पहलुओं को स्पष्ट किया जाना चाहिए।
बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं
यह घटना स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा सवाल सामने रखती है। किताब भूलना कोई ऐसा अपराध नहीं है जिसकी सजा बच्चे की गरिमा और सुरक्षा को खतरे में डाल दे। शिक्षक बच्चों को अनुशासन सिखाने के साथ-साथ उनकी शारीरिक और मानसिक स्थिति के प्रति भी संवेदनशील होने चाहिए। खासकर जब कोई बच्चा अस्वस्थ दिखाई दे, तो उसे दंड देने के बजाय तुरंत मदद और चिकित्सा सुविधा मिलनी चाहिए।
जवाबदेही तय हो, ताकि फिर न दोहराई जाए ऐसी घटना
बच्ची की मौत का चिकित्सकीय कारण उसकी गंभीर बीमारी से जुड़ा बताया गया है, लेकिन स्कूल में 22 जुलाई को हुई घटना और उसके बाद की परिस्थितियों की निष्पक्ष जांच उतनी ही जरूरी है। अगर स्कूल स्तर पर कोई लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारी तय कर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। किसी बच्चे की छोटी-सी गलती के जवाब में ऐसी सजा नहीं होनी चाहिए जो उसकी सुरक्षा को खतरे में डाल दे। स्कूल बच्चों को डराने की जगह सुरक्षित रखने और शिक्षित करने की जगह है—बच्चों की सुरक्षा और जीवन से बड़ा कोई अनुशासन नहीं।




