अंतरराष्ट्रीय/रक्षा | ABC NATIONAL NEWS | बीजिंग/नई दिल्ली | 29 अगस्त 2026
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नेतृत्व में सेना के भीतर चल रही भ्रष्टाचार-विरोधी कार्रवाई अब और तेज होती दिखाई दे रही है। चीन ने शुक्रवार को अपनी सर्वोच्च सैन्य कमान सेंट्रल मिलिट्री कमीशन (CMC) से दो बेहद वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों—झांग यूशिया और लियू झेनली—को हटा दिया। दोनों के खिलाफ गंभीर अनुशासनात्मक और कानूनी उल्लंघनों को लेकर जांच चल रही थी। यह कदम ऐसे समय आया है जब चीन की सेना में वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का सिलसिला लगातार जारी है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसी व्यापक सैन्य फेरबदल के बीच जनरल झाओ जोंगछी, जो 2017 के डोकलाम गतिरोध और 2020 के गलवान संघर्ष के दौरान PLA के पश्चिमी थिएटर कमांड के प्रमुख थे, को भी चीन के शीर्ष राजनीतिक सलाहकार निकाय से हटा दिया गया है। झाओ का पश्चिमी थिएटर कमांड भारत से लगी वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के बड़े हिस्से से संबंधित सैन्य अभियानों की जिम्मेदारी संभालता है।
CMC से हटाए गए झांग यूशिया और लियू झेनली
चीन की सर्वोच्च सैन्य निर्णय लेने वाली संस्था CMC से झांग यूशिया और लियू झेनली को हटाया गया है। झांग यूशिया CMC के उपाध्यक्ष और चीन के पोलितब्यूरो के सदस्य रह चुके हैं। वह राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बाद चीन की सैन्य व्यवस्था में सबसे प्रभावशाली अधिकारियों में गिने जाते थे। लियू झेनली CMC के सदस्य और उसके संयुक्त स्टाफ विभाग के प्रमुख थे, जो सैन्य अभियानों की योजना और संचालन से जुड़ा महत्वपूर्ण पद है।
दोनों अधिकारियों के खिलाफ जनवरी से ही गंभीर अनुशासन और कानून उल्लंघन को लेकर जांच की बात सामने आई थी। चीन की आधिकारिक भाषा में इस तरह के आरोप अक्सर भ्रष्टाचार या सत्ता-संबंधी गंभीर अनुशासनात्मक मामलों की ओर संकेत करते हैं। हालांकि, दोनों के खिलाफ लगाए गए विशिष्ट आरोपों का पूरा विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है।
सात सदस्यीय सैन्य आयोग में अब सिर्फ दो सक्रिय सदस्य
झांग और लियू को हटाए जाने के बाद चीन की राज्य CMC में पहले के सात सदस्यों में से केवल दो सक्रिय सदस्य बचे हैं—शी जिनपिंग और झांग शेंगमिन। यह स्थिति चीन के सैन्य नेतृत्व में हुए असाधारण स्तर के फेरबदल को दर्शाती है।
हालांकि यहां एक महत्वपूर्ण तकनीकी पहलू है। चीन में पार्टी CMC और राज्य CMC की अलग-अलग औपचारिक संरचनाएं हैं, लेकिन व्यवहार में दोनों एक ही सैन्य नेतृत्व व्यवस्था के रूप में काम करती हैं। शुक्रवार की कार्रवाई फिलहाल राज्य CMC में झांग और लियू के पदों से संबंधित है; उन्हें चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की समानांतर CMC से औपचारिक रूप से हटाए जाने की स्थिति अलग हो सकती है।
12 सांसदों की सदस्यता भी गई
सैन्य अधिकारियों पर कार्रवाई केवल CMC तक सीमित नहीं रही। चीन की संसद, नेशनल पीपुल्स कांग्रेस (NPC), की अद्यतन सूची से झांग यूशिया और लियू झेनली समेत कुल 12 प्रतिनिधियों के नाम हटा दिए गए। इनमें पूर्व CMC जनरल ऑफिस के निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल झोंग शाओजुन और PLA की पूर्व Strategic Support Force के कमांडर जनरल जू चिएनशेंग भी शामिल हैं।
यह कार्रवाई चीन के रक्षा और सैन्य प्रतिष्ठान में चल रही व्यापक जांच का संकेत देती है। रक्षा क्षेत्र से जुड़े अधिकारियों और सैन्य नेतृत्व के खिलाफ भ्रष्टाचार तथा अनुशासन उल्लंघन की कार्रवाई पिछले कई वर्षों से शी जिनपिंग के शासन का प्रमुख हिस्सा रही है।
गलवान से जुड़े जनरल झाओ जोंगछी पर भी कार्रवाई
इसी बीच चीन ने पूर्व जनरल झाओ जोंगछी को भी शीर्ष राजनीतिक सलाहकार संस्था से बाहर कर दिया। झाओ पश्चिमी थिएटर कमांड के प्रमुख रहे थे और उनके कार्यकाल में भारत-चीन सीमा पर दो बेहद महत्वपूर्ण घटनाएं हुईं—2017 का डोकलाम गतिरोध और 2020 का गलवान संघर्ष।
पश्चिमी थिएटर कमांड चीन के तिब्बत और शिनजियांग क्षेत्रों तथा भारत से लगी सीमा के बड़े हिस्से में PLA की सैन्य गतिविधियों की जिम्मेदारी संभालता है। झाओ 2016 में सैन्य पुनर्गठन के बाद बनाए गए पश्चिमी थिएटर कमांड के शुरुआती कमांडरों में थे।
झाओ को चीन की Chinese People’s Political Consultative Conference (CPPCC) से हटाया गया है। उनकी बर्खास्तगी का आधिकारिक कारण सार्वजनिक नहीं किया गया है और चीन ने उनके खिलाफ किसी विशिष्ट जांच की घोषणा भी नहीं की है। इसलिए इसे सीधे तौर पर भ्रष्टाचार के मामले का परिणाम बताना अभी उचित नहीं होगा।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है झाओ की कार्रवाई?
झाओ जोंगछी का नाम भारत के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वह उन वर्षों में पश्चिमी थिएटर कमांड के प्रमुख थे जब चीन-भारत सीमा पर तनाव चरम पर पहुंचा था। 2017 में डोकलाम में भारत और चीन की सेनाएं आमने-सामने थीं। इसके तीन वर्ष बाद 2020 में पूर्वी लद्दाख के गलवान में हिंसक संघर्ष हुआ, जिसके बाद दोनों देशों के बीच लंबे समय तक सैन्य गतिरोध बना रहा।
हालांकि झाओ को हटाए जाने और भारत-चीन सीमा विवाद के बीच सीधे कारण-परिणाम का संबंध चीन ने सार्वजनिक रूप से स्थापित नहीं किया है। इसलिए इसे भारत के खिलाफ सैन्य नीति में किसी बदलाव का संकेत मानना अभी जल्दबाजी होगी। इतना जरूर है कि भारत से जुड़े संवेदनशील सैन्य कमान के पूर्व प्रमुख का राजनीतिक पद से हटना क्षेत्रीय सुरक्षा के नजरिए से महत्वपूर्ण घटनाक्रम है।
शी जिनपिंग की भ्रष्टाचार-विरोधी मुहिम
शी जिनपिंग ने 2012 में सत्ता संभालने के बाद से भ्रष्टाचार के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया है। इस अभियान में कम्युनिस्ट पार्टी, सरकार, सरकारी कंपनियों और विशेष रूप से सेना के कई वरिष्ठ अधिकारी जांच के दायरे में आए हैं। पिछले महीने शी ने सैन्य क्षेत्र में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई को और मजबूत करने का आह्वान किया था।
सैन्य नेतृत्व में लगातार हो रही कार्रवाई को केवल भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान के रूप में देखना ही पर्याप्त नहीं है। चीन की राजनीतिक व्यवस्था में सेना पर कम्युनिस्ट पार्टी का पूर्ण नियंत्रण बेहद महत्वपूर्ण है। PLA Daily की जनवरी की टिप्पणी में झांग और लियू पर पार्टी के भरोसे को तोड़ने तथा सेना पर पार्टी के सर्वोच्च नियंत्रण को कमजोर करने जैसे गंभीर आरोपों का संकेत दिया गया था।
चीन की सेना में असामान्य स्तर का फेरबदल
झांग यूशिया जैसे अत्यंत वरिष्ठ अधिकारी का हटना इस पूरे घटनाक्रम को असाधारण बनाता है। वह चीन के सबसे वरिष्ठ वर्दीधारी अधिकारियों में शामिल थे और शी जिनपिंग के बाद सैन्य नेतृत्व में बेहद प्रभावशाली स्थिति रखते थे। उनके साथ लियू झेनली और अन्य वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों पर कार्रवाई से यह स्पष्ट है कि चीन का सैन्य भ्रष्टाचार-विरोधी अभियान अब शीर्ष स्तर तक पहुंच चुका है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय भी सामने आया है जब भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर कूटनीतिक संवाद जारी है। 25 अगस्त को बीजिंग में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच सीमा मुद्दे और द्विपक्षीय संबंधों पर बातचीत हुई थी। दोनों पक्षों ने सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने तथा बातचीत जारी रखने पर जोर दिया।
अब आगे क्या?
चीन में शीर्ष सैन्य अधिकारियों पर कार्रवाई का यह सिलसिला आने वाले समय में और बढ़ सकता है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि झांग यूशिया और लियू झेनली के खिलाफ चल रही जांच का अंतिम परिणाम क्या होता है और क्या उनके खिलाफ औपचारिक आपराधिक कार्रवाई या सजा की घोषणा की जाती है।
दूसरी ओर, गलवान और डोकलाम से जुड़े पूर्व कमांडर झाओ जोंगछी की राजनीतिक संस्थाओं से विदाई भारत के लिए भी दिलचस्प घटनाक्रम है। हालांकि उनके हटने का आधिकारिक कारण सामने नहीं आया है, लेकिन यह कार्रवाई चीन की सैन्य व्यवस्था में जारी बड़े पुनर्गठन के बीच हुई है।
कुल मिलाकर, चीन की सैन्य कमान में लगातार हो रही उच्चस्तरीय कार्रवाई यह संकेत देती है कि शी जिनपिंग सेना के भीतर भ्रष्टाचार, अनुशासन और राजनीतिक नियंत्रण—तीनों मोर्चों पर अपनी पकड़ और मजबूत कर रहे हैं। भारत के संदर्भ में झाओ जोंगछी की कार्रवाई इसलिए खास है क्योंकि वह डोकलाम और गलवान जैसे भारत-चीन सीमा विवादों के दौरान चीन की पश्चिमी सैन्य कमान से जुड़े प्रमुख अधिकारी थे। अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि इस फेरबदल का भारत-चीन सीमा नीति पर सीधा असर पड़ेगा, लेकिन बीजिंग की सैन्य व्यवस्था में हो रही इस व्यापक उथल-पुथल पर नई दिल्ली की नजर जरूर रहेगी।




