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बॉम्बे हाईकोर्ट की फटकार के बाद FDA बैकफुट पर, Cipla का लाइसेंस रद्द करने का आदेश वापस

राष्ट्रीय/ महाराष्ट्र | ABC NATIONAL NEWS | मुंबई/पुणे | 29 अगस्त 2026

महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने बॉम्बे हाईकोर्ट की कड़ी फटकार के बाद Cipla Pharma & Life Sciences Limited की पुणे स्थित इकाई का ड्रग सेल लाइसेंस रद्द करने का आदेश वापस लेने का फैसला किया है। FDA ने अदालत में कहा कि वह लाइसेंस रद्द करने का आदेश तत्काल वापस लेगा और कंपनी को नया शो-कॉज नोटिस जारी किया जाएगा। इसके बाद कंपनी का पक्ष सुनकर कारणयुक्त नया आदेश पारित किया जाएगा।

यह मामला पुणे के वडकी स्थित Cipla की Carrying and Forwarding (C&F) सुविधा से जुड़ा है। FDA ने Reactin Plus Tablets की पैकेजिंग, स्टोरेज और रिकॉल प्रक्रिया में कथित गंभीर अनियमितताओं का हवाला देते हुए 27 अगस्त से लाइसेंस रद्द कर दिया था। हालांकि, कंपनी ने स्पष्ट किया था कि FDA के आदेश में उसके उत्पादों की सुरक्षा, गुणवत्ता या प्रभावशीलता पर कोई सवाल नहीं उठाया गया था और न ही किसी मरीज की सुरक्षा से जुड़ी समस्या बताई गई थी।

हाईकोर्ट ने FDA को लगाई फटकार

मामले की सुनवाई बॉम्बे हाईकोर्ट की कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अंखड की पीठ के सामने हुई। अदालत ने FDA की कार्रवाई के तरीके पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि विभाग ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन नहीं किया।

Cipla की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आबाद पोंडा ने अदालत को बताया कि FDA ने कंपनी को 26 अगस्त को विभाग के सामने सुनवाई के लिए उपस्थित होने का ई-मेल भेजा था। लेकिन 26 अगस्त राज्य सरकार द्वारा घोषित सार्वजनिक अवकाश था। कंपनी ने सुनवाई स्थगित करने का अनुरोध किया, क्योंकि उस दिन उसका कोई प्रतिनिधि उपलब्ध नहीं था। इसके बावजूद FDA ने उसी दिन लाइसेंस रद्द करने का आदेश पारित कर दिया।

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FDA की ओर से अतिरिक्त सरकारी वकील पी.पी. काकड़े ने दलील दी कि कानून कंपनी को सुनवाई का अधिकार नहीं देता। हालांकि, हाईकोर्ट इस तर्क से सहमत नहीं हुआ।

‘आप हद से आगे जा रहे हैं’

अदालत ने FDA की कार्रवाई पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि विभाग अच्छा और सराहनीय काम कर रहा है, लेकिन इस मामले में वह “हद से आगे जा रहा है।”

पीठ ने सवाल उठाया कि जब FDA ने खुद कंपनी को सुनवाई के लिए प्रतिनिधि भेजने का निर्देश दिया था, तो फिर उसी दिन कंपनी को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर दिए बिना लाइसेंस कैसे रद्द किया जा सकता है।

अदालत ने FDA के रवैये को “हाई-हैंडेड” बताते हुए कहा कि प्रक्रिया गलत तरीके से अपनाई गई और लाइसेंस रद्द करने का आदेश प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ था।

पीठ ने यह भी सवाल उठाया कि क्या राज्य सरकार द्वारा घोषित सार्वजनिक अवकाश के दिन कंपनी को सुनवाई के लिए बुलाना निष्पक्ष और पारदर्शी प्रक्रिया कही जा सकती है।

FDA ने तुरंत आदेश वापस लेने पर सहमति जताई

हाईकोर्ट की टिप्पणियों के बाद FDA ने कहा कि वह Cipla का लाइसेंस रद्द करने वाला आदेश तत्काल वापस लेगा। इसके साथ ही कंपनी को नए सिरे से शो-कॉज नोटिस जारी किया जाएगा।

नए नोटिस के बाद कंपनी को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा। उसके बाद FDA मामले से जुड़े तथ्यों और कंपनी के जवाब पर विचार करते हुए एक कारणयुक्त आदेश जारी करेगा।

इसका अर्थ यह है कि हाईकोर्ट की सुनवाई के बाद FDA ने विवादित प्रक्रिया को वापस लेकर मामले को नए सिरे से आगे बढ़ाने का रास्ता चुना है।

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आखिर FDA ने लाइसेंस क्यों रद्द किया था?

FDA की ओर से की गई पहली जांच जून में हुई थी। इस निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने Reactin Plus Tablets की पैकेजिंग पर कथित तौर पर अनधिकृत प्रचारात्मक शब्द पाए थे।

Reactin Plus एक Schedule H prescription medicine है। FDA के अनुसार, इसकी पैकेजिंग पर “analgesic and antipyretic” जैसे शब्द पाए गए, जिन्हें विभाग ने अनधिकृत प्रचारात्मक जानकारी माना।

FDA का तर्क था कि किसी प्रिस्क्रिप्शन दवा का इस तरह प्रचारात्मक उल्लेख लोगों को बिना डॉक्टर की सलाह के दवा लेने के लिए प्रोत्साहित कर सकता है और इससे self-medication का जोखिम बढ़ सकता है।

स्टॉक और रिकॉर्ड में भी मिली कथित गड़बड़ियां

FDA के निरीक्षण में केवल पैकेजिंग से जुड़ी आपत्ति ही सामने नहीं आई थी। विभाग के अनुसार, भौतिक स्टॉक और कंप्यूटर रिकॉर्ड में अंतर पाया गया।

इसके अलावा खरीद और बिक्री से जुड़े रिकॉर्ड में भी कथित कमियां मिलीं। FDA ने यह भी आरोप लगाया कि दवा के रिकॉल संबंधी निर्देशों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया।

इन कथित अनियमितताओं को आधार बनाकर FDA ने पुणे स्थित C&F सुविधा का ड्रग सेल लाइसेंस 27 अगस्त से रद्द करने का आदेश जारी किया था।

हालांकि, हाईकोर्ट ने मुख्य रूप से इस बात पर सवाल उठाया कि FDA ने कंपनी को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर दिए बिना इतनी कठोर कार्रवाई कैसे कर दी।

Cipla ने क्या कहा था?

Cipla ने FDA के आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का रुख किया था। कंपनी ने स्पष्ट किया था कि नियामक के आदेश में उसके उत्पादों की सुरक्षा, गुणवत्ता या प्रभावशीलता पर कोई चिंता नहीं जताई गई थी।

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कंपनी ने यह भी कहा था कि FDA की कार्रवाई में किसी मरीज की सुरक्षा से संबंधित कोई समस्या नहीं बताई गई है।

अब FDA द्वारा आदेश वापस लेने और नई प्रक्रिया शुरू करने के फैसले से कंपनी को अपना पक्ष रखने का औपचारिक अवसर मिलेगा।

अब नए सिरे से होगी कार्रवाई

हाईकोर्ट की फटकार के बाद अब पूरा मामला फिर से नियामकीय प्रक्रिया में जाएगा। FDA नया शो-कॉज नोटिस जारी करेगा, Cipla अपना जवाब देगी और उसके बाद विभाग को तथ्यों और कंपनी की दलीलों पर विचार करके नया आदेश पारित करना होगा।

इसलिए मौजूदा घटनाक्रम को Cipla को आरोपों से पूरी तरह मुक्त किए जाने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। हाईकोर्ट की आपत्ति मुख्य रूप से FDA द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों से जुड़ी है।

अब देखने वाली बात यह होगी कि नए शो-कॉज नोटिस और सुनवाई के बाद FDA क्या निष्कर्ष निकालता है और क्या भविष्य में लाइसेंस पर कोई कार्रवाई की जाती है।

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