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₹15 लाख करोड़ के फर्जी खातों से हड़कंप! SEBI की बड़ी कार्रवाई के बाद Rajesh Exports घिरी, Adani से पुराने रिश्तों पर फिर उठे सवाल

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 30 जून 2026

देश के कॉरपोरेट जगत में एक बड़ा विवाद सामने आया है। भारतीय शेयर बाजार की नियामक संस्था SEBI ने ज्वेलरी कंपनी Rajesh Exports पर करीब ₹15 लाख करोड़ के फर्जी लेखांकन का आरोप लगाया है। यह रकम इतनी बड़ी है कि यदि जांच में आरोप सही साबित होते हैं, तो यह भारत के सबसे बड़े कॉरपोरेट घोटालों में गिना जा सकता है।

SEBI ने 3 जून 2026 को जारी अपने अंतरिम आदेश में कहा कि पहली नजर में कंपनी के खातों में गंभीर गड़बड़ियां दिखाई देती हैं। हालांकि यह अंतिम फैसला नहीं है। कंपनी को अपना पक्ष रखने का मौका मिलेगा और जांच पूरी होने के बाद ही अंतिम निर्णय होगा।

इसी बीच एक खोजी रिपोर्ट ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 2000 के दशक में Rajesh Exports और Adani Group के बीच सोने और हीरे के कारोबार में व्यावसायिक संबंध थे। रिपोर्ट के मुताबिक दोनों कंपनियां उस दौर में निर्यात से जुड़े काम में एक-दूसरे के साथ जुड़ी थीं।

रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया है कि उस समय सरकार की निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं का फायदा उठाने के लिए सोने और हीरे के कारोबार में कथित तौर पर “सर्कुलर ट्रेडिंग” की गई। यानी सामान विदेश भेजा गया, फिर उसी नेटवर्क के जरिए वापस लाया गया और निर्यात का कारोबार कागजों पर बहुत बड़ा दिखाया गया। आरोप है कि इससे सरकारी योजनाओं के तहत बड़े आर्थिक लाभ हासिल किए गए।

रिपोर्ट के अनुसार, इन मामलों की जांच उस समय राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) ने भी की थी। जांच एजेंसी ने ओवर-इनवॉयसिंग, गलत कीमत दिखाने, विदेशी शेल कंपनियों के इस्तेमाल और सरकारी योजनाओं के दुरुपयोग जैसे आरोप लगाए थे। इन आरोपों के आधार पर कारण बताओ नोटिस भी जारी किए गए थे। हालांकि इन मामलों पर अंतिम न्यायिक फैसला अलग-अलग कानूनी प्रक्रियाओं के बाद ही तय होना है।

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की कई कंपनियों के जरिए सोने और हीरे का ऐसा कारोबारी नेटवर्क बनाया गया, जिससे निर्यात का आंकड़ा बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया जा सके। रिपोर्ट के मुताबिक इस पूरे नेटवर्क से हजारों करोड़ रुपये के सरकारी प्रोत्साहनों का लाभ लिया गया। इन दावों की अंतिम पुष्टि अभी किसी अदालत ने नहीं की है।

इस पूरे मामले ने एक और सवाल खड़ा कर दिया है। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि अलग-अलग कंपनियों के खिलाफ सरकारी कार्रवाई का तरीका एक जैसा नहीं रहा। हालांकि यह रिपोर्ट का विश्लेषण है और इस पर संबंधित पक्षों का अलग मत हो सकता है।

Adani Group पहले भी अपने ऊपर लगे विभिन्न आरोपों को खारिज करता रहा है और उन्हें बेबुनियाद बताता रहा है। वहीं Rajesh Exports को भी SEBI के आरोपों पर अपना जवाब देने और कानूनी प्रक्रिया में अपना पक्ष रखने का अधिकार है। इतना साफ है कि SEBI की कार्रवाई ने देश के कॉरपोरेट जगत में हलचल मचा दी है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि जांच आगे क्या निष्कर्ष निकालती है। यदि आरोप साबित होते हैं तो इसके दूरगामी असर भारतीय कॉरपोरेट जगत, निवेशकों के भरोसे और नियामकीय व्यवस्था पर पड़ सकते हैं। यदि आरोप साबित नहीं होते, तो संबंधित कंपनियों का पक्ष भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा।मामला जांच के अधीन है और अंतिम सच नियामकीय तथा न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

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