मनोरंजन | अमरनाथ प्रसाद | ABC NATIONAL NEWS | मुंबई | 26 अगस्त 2026
हिंदी सिनेमा के उस दौर की यादें एक बार फिर ताजा हो गई हैं, जब 90 के दशक में नए कलाकारों और नई कहानियों ने बॉलीवुड को एक अलग रंग दिया था। मशहूर निर्देशक कुकू कोहली का 77 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। 25 अगस्त 2026 को मुंबई में दिल का दौरा पड़ने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ी और इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। कुकू कोहली का नाम हिंदी सिनेमा में हमेशा उस फिल्म के साथ याद किया जाएगा, जिसने एक नए कलाकार को बड़े पर्दे पर उतारा और आगे चलकर उसे सुपरस्टार बना दिया—‘फूल और कांटे’।
कुकू कोहली का जाना केवल एक फिल्म निर्देशक के निधन की खबर नहीं है, बल्कि यह 90 के दशक के उस सिनेमाई दौर को विदाई है, जब एक्शन, रोमांस, ड्रामा और संगीत मिलकर फिल्मों को दर्शकों के लिए खास बनाते थे। 1991 में रिलीज हुई ‘फूल और कांटे’ ने अजय देवगन को बतौर अभिनेता पहला बड़ा मंच दिया। फिल्म की शुरुआत में दो चलती मोटरसाइकिलों पर अजय देवगन का संतुलन बनाकर खड़े होने वाला स्टंट इतना चर्चित हुआ कि वह उनकी पहचान का हिस्सा बन गया। एक नए चेहरे के लिए यह ऐसी एंट्री थी, जिसने दर्शकों का ध्यान पहली ही नजर में अपनी ओर खींच लिया।
कुकू कोहली की कहानी सिर्फ ‘फूल और कांटे’ तक सीमित नहीं
कुकू कोहली ने फिल्म निर्देशन की दुनिया में कदम रखने से पहले फिल्म निर्माण के अलग-अलग पहलुओं को करीब से समझा। उन्होंने दिग्गज फिल्मकार राज कपूर के साथ काम किया और इसी अनुभव ने उन्हें सिनेमा की बारीकियों को समझने का मौका दिया। फिल्म निर्माण की प्रक्रिया से जुड़े लंबे अनुभव के बाद उन्होंने निर्देशन की ओर कदम बढ़ाया।
उनके करियर का एक महत्वपूर्ण अध्याय फिल्म ‘बेताब’ से भी जुड़ा रहा। यह वही फिल्म थी, जिससे सनी देओल और अमृता सिंह ने बतौर प्रमुख कलाकार हिंदी सिनेमा में अपनी पहचान बनाई। कुकू कोहली के करियर को देखें तो यह साफ नजर आता है कि वह नए चेहरों की क्षमता पहचानने और उन्हें बड़े पर्दे पर अवसर देने में भरोसा रखते थे।
1991 में अजय देवगन पर लगाया दांव
1991 में कुकू कोहली ने ‘फूल और कांटे’ बनाई। फिल्म में अजय देवगन और मधू मुख्य भूमिकाओं में थे। अमरीश पुरी, अरुणा ईरानी और जगदीप जैसे अनुभवी कलाकार भी फिल्म का हिस्सा थे। फिल्म में एक्शन और रोमांस के साथ पारिवारिक भावनाओं को जोड़ा गया था, जबकि इसका संगीत भी दर्शकों के बीच लोकप्रिय हुआ।
लेकिन फिल्म की सबसे बड़ी उपलब्धि थी—अजय देवगन का लॉन्च। आज जिस अभिनेता को हिंदी सिनेमा के सबसे स्थापित कलाकारों में गिना जाता है, उन्होंने इसी फिल्म से अपने फिल्मी सफर की शुरुआत की थी। अजय देवगन को ‘फूल और कांटे’ के लिए फिल्मफेयर बेस्ट मेल डेब्यू अवॉर्ड भी मिला। एक निर्देशक के तौर पर कुकू कोहली का यह फैसला उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हो गया।
अजय देवगन के सफर की पहली बड़ी सीढ़ी
अजय देवगन के करियर की शुरुआत को कुकू कोहली से अलग करके देखना मुश्किल है। उस समय अजय एक नया चेहरा थे और फिल्म इंडस्ट्री में किसी नए कलाकार को लेकर बड़ा दांव लगाना आसान नहीं था। लेकिन कुकू कोहली ने उनमें वह क्षमता देखी, जिसे बाद में दर्शकों ने भी स्वीकार किया।
‘फूल और कांटे’ के बाद दोनों की जोड़ी फिर ‘सुहाग’ में नजर आई। 1994 में आई इस फिल्म में अजय देवगन के साथ अक्षय कुमार, करिश्मा कपूर और नगमा भी थे। यह फिल्म इसलिए भी खास रही क्योंकि इसमें अजय देवगन और अक्षय कुमार पहली बार एक साथ पर्दे पर दिखाई दिए। आगे चलकर दोनों अभिनेता हिंदी सिनेमा के बड़े सितारे बने।
‘हकीकत’ से ‘ये दिल आशिकाना’ तक
कुकू कोहली का निर्देशन करियर केवल ‘फूल और कांटे’ तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने अलग-अलग विषयों और शैलियों की फिल्मों पर काम किया। उनकी प्रमुख फिल्मों में ‘कोहराम’, ‘सुहाग’, ‘हकीकत’, ‘जुल्मी’, ‘अनाड़ी नंबर 1’, ‘ये दिल आशिकाना’ और ‘वो तेरा नाम था’ शामिल हैं।
1995 में आई ‘हकीकत’ में अजय देवगन और तब्बू मुख्य भूमिकाओं में थे। इसके बाद कुकू कोहली ने कई फिल्मों के जरिए एक्शन, रोमांस और पारिवारिक भावनाओं को अपनी शैली में पर्दे पर पेश किया। उनकी अंतिम निर्देशित फिल्म ‘वो तेरा नाम था’ 2004 में रिलीज हुई थी।
निजी जिंदगी भी रही फिल्मी दुनिया से जुड़ी
कुकू कोहली की निजी जिंदगी भी बॉलीवुड से गहराई से जुड़ी रही। वह अभिनेत्री अरुणा ईरानी के पति थे। उनकी पहली शादी से दो बेटियां पूजा कोहली और करिश्मा कोहली हैं। करिश्मा ने भी फिल्म निर्माण के क्षेत्र में काम किया और सहायक निर्देशक के तौर पर कई परियोजनाओं से जुड़ी रहीं।
25 अगस्त को कुकू कोहली की तबीयत अचानक बिगड़ी। रिपोर्टों के मुताबिक वह कुछ दिन पहले अस्पताल में भर्ती हुए थे और इलाज के दौरान उन्हें स्टेंट भी लगाया गया था। लेकिन उनकी हालत में सुधार नहीं हो सका। मंगलवार को उनके निधन की खबर सामने आते ही फिल्म जगत में शोक की लहर दौड़ गई।
उनकी अंतिम विदाई 27 अगस्त को मुंबई के ओशिवारा श्मशान घाट में किए जाने की जानकारी सामने आई है।
विरासत में सिर्फ फिल्में नहीं, एक सितारा भी
फिल्म इंडस्ट्री में कई निर्देशक अपनी फिल्मों के लिए याद किए जाते हैं, लेकिन कुछ फिल्मकार ऐसे होते हैं जिनकी विरासत उन कलाकारों से भी जुड़ जाती है, जिन्हें उन्होंने पहला बड़ा अवसर दिया। कुकू कोहली की विरासत में अजय देवगन का नाम सबसे प्रमुख है।
1991 में एक नए चेहरे को लेकर बनाई गई ‘फूल और कांटे’ आज भी याद की जाती है। दो मोटरसाइकिलों पर अजय देवगन की वह चर्चित एंट्री, फिल्म का संगीत और 90 के दशक का उसका एक्शन अंदाज आज भी सिनेमा प्रेमियों की यादों में ताजा है।
कुकू कोहली ने अजय देवगन को केवल एक फिल्म में मौका नहीं दिया था। उन्होंने उन्हें वह मंच दिया, जहां से उनके लंबे और सफल फिल्मी सफर की शुरुआत हुई। यही वजह है कि कुकू कोहली का नाम हिंदी सिनेमा के इतिहास में एक ऐसे निर्देशक के रूप में दर्ज रहेगा, जिसने एक नए चेहरे पर भरोसा किया और उस भरोसे को आगे चलकर स्टारडम में बदलते देखा।
कुकू कोहली अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन ‘फूल और कांटे’ की वह यादगार एंट्री, 90 के दशक की उनकी फिल्मी दुनिया और अजय देवगन के करियर की शुरुआत में उनका योगदान लंबे समय तक उन्हें याद दिलाता रहेगा। सिनेमा में कुछ कहानियां पर्दे पर खत्म हो जाती हैं, लेकिन कुछ कहानियां कलाकारों और दर्शकों की यादों में हमेशा चलती रहती हैं—कुकू कोहली की कहानी ऐसी ही एक कहानी है।




