अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | मस्कट/तेहरान | 26 अगस्त 2026
पश्चिम एशिया में तनाव के बीच दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान और ओमान ने बड़ा कदम उठाया है। दोनों देशों ने जलडमरूमध्य से सुरक्षित समुद्री आवाजाही के लिए एक अस्थायी संयुक्त शिपिंग कॉरिडोर बनाने के प्रस्ताव पर चर्चा की है। इसके साथ ही होर्मुज में संभावित बारूदी सुरंगों को हटाने के लिए संयुक्त अभियान चलाने की योजना पर भी बातचीत हुई है।
ओमान के विदेश मंत्री सैयद बद्र बिन हमद अल-बुसैदी ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के साथ तेहरान में हुई बातचीत को रचनात्मक बताया। उन्होंने उम्मीद जताई कि होर्मुज के रास्ते सुरक्षित समुद्री आवाजाही बहाल करने के लिए व्यावहारिक व्यवस्था जल्द सामने आ सकती है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि दोनों देशों की योजना केवल अस्थायी कॉरिडोर तक सीमित नहीं है। ओमान के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, आगे चलकर होर्मुज के स्थायी प्रबंधन और समुद्री सेवाओं की व्यवस्था को लेकर भी बातचीत जारी रहेगी।
बारूदी सुरंगों की सफाई पर भी सहमति की कोशिश
ईरान और ओमान के प्रस्तावित ढांचे में होर्मुज जलडमरूमध्य से बारूदी सुरंगों को हटाने की संयुक्त परियोजना भी शामिल है।
यहीं से मामला और दिलचस्प हो जाता है। क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को दावा किया था कि अमेरिकी नौसेना ने उन्हें जानकारी दी है कि होर्मुज के अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में मौजूद सभी बारूदी सुरंगें हटा दी गई हैं।
अगर ईरान और ओमान अब आधिकारिक तौर पर माइन-क्लियरेंस अभियान पर चर्चा कर रहे हैं, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या होर्मुज पूरी तरह सुरक्षित और साफ हो चुका है या अभी भी समुद्री सुरक्षा का खतरा बना हुआ है?
होर्मुज क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है। फारस की खाड़ी से निकलने वाला भारी मात्रा में तेल और गैस इसी संकरे समुद्री रास्ते से होकर वैश्विक बाजारों तक पहुंचता है।
ऐसे में अगर यहां जहाजों की आवाजाही बाधित होती है तो इसका असर केवल ईरान और ओमान पर नहीं, बल्कि एशिया, यूरोप और दुनिया के ऊर्जा बाजारों पर पड़ सकता है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, मई से उसकी सुरक्षा में 66 करोड़ बैरल से अधिक कच्चा तेल होर्मुज से बाहर जा चुका है। अमेरिका दक्षिणी समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों को सुरक्षा प्रदान कर रहा है, जो ओमान के तट के साथ चलता है।
लेकिन ईरान की स्थिति अलग है। तेहरान चाहता है कि जहाज जलडमरूमध्य के उत्तरी हिस्से में उसके क्षेत्रीय जल से होकर गुजरें। इस वजह से समुद्री मार्ग को लेकर तनाव बना हुआ है।
अमेरिका और ईरान के बीच समझौता क्यों टूटा?
ईरान और ओमान की मौजूदा बातचीत एक पुराने अमेरिकी-ईरानी समझौते से भी जुड़ी है। 17 जून को अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौता ज्ञापन में ओमान और ईरान को होर्मुज के भविष्य के प्रशासन और समुद्री सेवाओं को लेकर बातचीत करने की जिम्मेदारी दी गई थी।
लेकिन इसके बाद अमेरिका और ईरान के बीच समुद्री मार्गों को लेकर तनाव बढ़ गया और वह व्यवस्था प्रभावी रूप से टूट गई।
अब ओमान और ईरान के बीच नई बातचीत इस पूरे विवाद को फिर से कूटनीतिक रास्ते पर लाने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है।
अमेरिका का दबाव भी बढ़ रहा है
इस बीच अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक दबाव और बढ़ाने की चेतावनी दी है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि ईरान के साथ कारोबार करने वाली संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
यानी एक तरफ अमेरिका ईरान को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ ओमान ईरान के साथ मिलकर होर्मुज में सुरक्षित समुद्री आवाजाही की व्यवस्था बनाने की कोशिश कर रहा है।
ओमान अमेरिका का सहयोगी है। इसके बावजूद मस्कट का तेहरान के साथ बातचीत करना इस पूरे घटनाक्रम को और महत्वपूर्ण बना देता है। रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने इस महीने की शुरुआत में ईरान के साथ होर्मुज को लेकर ओमान की बातचीत पर नाराजगी जताते हुए ओमान पर बमबारी की धमकी तक दी थी।
समुद्री हमले ने बढ़ाई चिंता
होर्मुज में सुरक्षा को लेकर चिंता उस समय और बढ़ गई जब सोमवार को ओमान के पास एक तेल टैंकर पर अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हमला हुआ और वह निष्क्रिय हो गया।
इससे पहले पिछले सप्ताह होर्मुज में दो मालवाहक जहाजों पर हमले हुए थे, जिनमें दो नाविकों की मौत की खबर सामने आई थी।
ऐसे माहौल में ईरान और ओमान का संयुक्त शिपिंग कॉरिडोर बनाने का प्रयास केवल व्यापारिक पहल नहीं है। यह ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री स्वतंत्रता और पश्चिम एशिया में बदलते शक्ति संतुलन से जुड़ा मामला बन चुका है।
आगे क्या?
अगर ईरान और ओमान अस्थायी समुद्री कॉरिडोर को लागू करने में सफल होते हैं और बाद में होर्मुज के स्थायी प्रशासन की व्यवस्था पर सहमति बना लेते हैं, तो इससे इस महत्वपूर्ण जलमार्ग पर तनाव कम करने में मदद मिल सकती है।
लेकिन दूसरी तरफ अमेरिका और ईरान के बीच प्रतिबंध, समुद्री सुरक्षा और तेल की आवाजाही को लेकर टकराव जारी रहा तो स्थिति फिर बिगड़ सकती है।
होर्मुज का सवाल इसलिए सिर्फ एक समुद्री रास्ते का सवाल नहीं है। यह दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक अर्थव्यवस्था की धड़कन से जुड़ा मुद्दा है। ईरान और ओमान की बातचीत आने वाले दिनों में यह तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है कि यह रास्ता तनाव का केंद्र बनेगा या कूटनीति के जरिए सुरक्षित व्यापार का रास्ता।




