Home » National » झारखंड में भर्ती परीक्षाओं पर बवाल: छात्रों ने हेमंत सोरेन-राहुल गांधी के पुतले फूंकने की कोशिश, पुलिस से झड़प

झारखंड में भर्ती परीक्षाओं पर बवाल: छात्रों ने हेमंत सोरेन-राहुल गांधी के पुतले फूंकने की कोशिश, पुलिस से झड़प

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | रांची | 22 अगस्त 2026

झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों का गुस्सा शुक्रवार को सड़कों पर उतर आया। रांची में JPSC-JSSC Reforms Manch के बैनर तले प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के पुतले जलाने की कोशिश की। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने का प्रयास किया, जिसके बाद धक्का-मुक्की और झड़प की स्थिति बन गई।

विरोध का केंद्र JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं से जुड़े विवाद हैं। छात्र नेताओं का आरोप है कि सरकार की भर्ती प्रक्रिया में लगातार उठ रहे विवादों और कानूनी पेच के कारण हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में है।

सरकार ने परीक्षा रद्द की, हाईकोर्ट ने रोक लगा दी

इस पूरे विवाद की अहम कड़ी झारखंड हाईकोर्ट का हालिया आदेश है। राज्य सरकार ने 11वीं और 13वीं JPSC परीक्षा तथा JSSC-CGL से जुड़ी प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोपों के बीच कुछ नियुक्तियों और संबंधित सरकारी अधिसूचनाओं को रद्द करने की दिशा में कदम उठाया था। लेकिन हाईकोर्ट ने नियुक्तियां रद्द करने से जुड़े कुछ नोटिफिकेशन पर रोक लगा दी।

यही वजह है कि छात्रों के बीच असमंजस बढ़ गया है। सरकार एक तरफ भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोपों के आधार पर कार्रवाई करना चाहती है, जबकि अदालत के आदेश के बाद उसके सामने कानूनी सीमाएं भी हैं।

ऐसे में बड़ा सवाल यही है—हेमंत सोरेन सरकार अब करे तो क्या करे?

सरकार अदालत के आदेश को दरकिनार कर नियुक्तियां रद्द नहीं कर सकती। दूसरी ओर, अगर विवादित प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाता है तो वे अभ्यर्थी सवाल उठा सकते हैं, जो परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच और निष्पक्ष प्रक्रिया की मांग कर रहे हैं। ऐसे में सरकार के सामने अदालत में मजबूत पक्ष रखने, रिकॉर्ड और जांच के आधार स्पष्ट करने और अभ्यर्थियों को पारदर्शी रोडमैप देने की चुनौती है।

रांची में पुतले जलाने की कोशिश, पुलिस से टकराव

रांची के अल्बर्ट एक्का चौक पर प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने हेमंत सोरेन और राहुल गांधी के पुतले जलाने की कोशिश की। पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, जिसके बाद प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हो गई।

छात्र नेताओं ने सरकार पर नौकरी के उम्मीदवारों के साथ “धोखा” और “विश्वासघात” करने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि अभ्यर्थियों ने वर्षों तक तैयारी की, पैसा और समय लगाया, लेकिन परीक्षा और नियुक्ति की प्रक्रिया बार-बार विवादों में फंस रही है।

हजारीबाग और गिरिडीह में भी टकराव

विरोध का असर रांची तक सीमित नहीं रहा। हजारीबाग और गिरिडीह में भी छात्रों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच टकराव की स्थिति बनी। छात्रों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पुतले जलाने का प्रयास किया, जिसे JMM कार्यकर्ताओं ने रोकने की कोशिश की।

इससे भर्ती परीक्षाओं का मुद्दा अब केवल परीक्षा और नियुक्ति तक सीमित नहीं रह गया है। यह धीरे-धीरे सरकार बनाम छात्र और राजनीतिक समर्थकों बनाम प्रदर्शनकारी युवाओं के टकराव में बदलता दिखाई दे रहा है।

छात्रों की सबसे बड़ी चिंता—नौकरी आखिर सुरक्षित होगी या नहीं?

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं की परेशानी सिर्फ परीक्षा की तारीख या रिजल्ट तक सीमित नहीं है। उनका सवाल यह भी है कि अगर परीक्षा और नियुक्ति के बाद मामला अदालत में चला गया तो उनकी नौकरी का भविष्य क्या होगा?

एक उम्मीदवार कई वर्षों तक एक परीक्षा की तैयारी करता है। उम्र निकलती है, आर्थिक संसाधन खर्च होते हैं और परिवार की उम्मीदें जुड़ती हैं। ऐसे में परीक्षा के बाद कानूनी विवाद या नियुक्ति रद्द होने की आशंका युवाओं की बेचैनी बढ़ाती है।

सियासत के बीच छात्र

इस आंदोलन का राजनीतिक पहलू भी महत्वपूर्ण है। छात्रों ने हेमंत सोरेन के साथ राहुल गांधी को भी निशाना बनाया। झारखंड में JMM और कांग्रेस गठबंधन सरकार में हैं। ऐसे में दोनों नेताओं के पुतले जलाने की कोशिश यह संकेत देती है कि छात्रों का गुस्सा सिर्फ प्रशासनिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सत्ता और उसके राजनीतिक सहयोगियों तक पहुंच गया है।

हालांकि, सरकार के सामने एक व्यावहारिक मुश्किल भी है—जब मामला अदालत में है, तब वह अदालत के आदेश का पालन करते हुए ही आगे बढ़ सकती है।

अब रास्ता क्या है?

सरकार के सामने फिलहाल तीन मोर्चे हैं—अदालत में अपना पक्ष मजबूती से रखना, भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करना और अभ्यर्थियों को स्पष्ट जानकारी देना।

छात्रों को यह जानना है कि परीक्षा और नियुक्तियों का अंतिम भविष्य क्या होगा। अदालत को यह तय करना है कि सरकार के फैसले और नियुक्तियों की कानूनी स्थिति क्या है। और सरकार को यह भरोसा दिलाना है कि किसी भी स्थिति में मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों के साथ अन्याय नहीं होगा।

झारखंड में शुक्रवार का प्रदर्शन सिर्फ पुतले जलाने और पुलिस से झड़प की कहानी नहीं है। यह उस बढ़ती बेचैनी का संकेत है, जिसमें हजारों युवा एक ही सवाल पूछ रहे हैं—परीक्षा देंगे, नौकरी पाएंगे, तो क्या नौकरी टिकेगी भी?

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted