राष्ट्रीय सुरक्षा | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 18 अगस्त 2026
पाकिस्तान से जुड़े आतंकी नेटवर्क के खिलाफ सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई के बीच गैंगस्टर शाहजाद भट्टी का एक नया और गंभीर चेहरा सामने आया है। द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, UAE से अपना नेटवर्क संचालित करने वाला भट्टी केवल आपराधिक गतिविधियों तक सीमित नहीं था, बल्कि सोशल मीडिया के जरिए युवाओं तक पहुंच बनाने और उन्हें कथित तौर पर आतंकी गतिविधियों के लिए तैयार करने की कोशिश कर रहा था। रिपोर्ट में सुरक्षा एजेंसियों के हवाले से बताया गया है कि भट्टी सोशल मीडिया पर एक प्रभावशाली व्यक्ति की तरह सक्रिय था और युवाओं को पैसे का लालच देकर अपने नेटवर्क से जोड़ने की कोशिश करता था।
रिपोर्ट के मुताबिक, भट्टी से जुड़े नेटवर्क पर आरोप है कि युवाओं को देश की महत्वपूर्ण और संवेदनशील जगहों के आसपास संदिग्ध गतिविधियों में शामिल होने के लिए तैयार किया जा रहा था। सुरक्षा एजेंसियों का दावा है कि कुछ युवाओं को पैसों का लालच देकर निगरानी और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश की गई। इन गतिविधियों का कथित उद्देश्य संवेदनशील स्थानों से जुड़ी जानकारी जुटाकर उसे पाकिस्तान तक पहुंचाना था। हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और कानूनी प्रक्रिया के जरिए ही होगी।
सबसे चिंताजनक पहलू इस पूरे नेटवर्क का सोशल मीडिया से जुड़ाव है। भट्टी ने कथित तौर पर सोशल मीडिया की पहुंच का इस्तेमाल युवाओं तक पहुंच बनाने के लिए किया। यानी जिस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल आम तौर पर मनोरंजन, संपर्क और जानकारी के लिए किया जाता है, उसी माध्यम को कथित तौर पर अपराध और आतंकी नेटवर्क के लिए भर्ती के साधन के रूप में इस्तेमाल करने की कोशिश की गई। सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह इसलिए भी गंभीर चुनौती है क्योंकि सोशल मीडिया के जरिए किसी व्यक्ति तक पहुंच बनाना पारंपरिक नेटवर्क की तुलना में आसान और तेज हो सकता है।
स्वतंत्रता दिवस से पहले सुरक्षा एजेंसियों ने शाहजाद भट्टी नेटवर्क के खिलाफ देशभर में बड़ा काउंटर-टेरर ऑपरेशन चलाया था। द हिंदू के अनुसार, इस कार्रवाई के दौरान नेटवर्क से जुड़े 200 से अधिक कथित ऑपरेटिव गिरफ्तार किए गए। एजेंसियों को आशंका थी कि नेटवर्क के सदस्य देश के अलग-अलग हिस्सों में सक्रिय होकर सुरक्षा व्यवस्था के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं। कार्रवाई का मकसद संभावित साजिशों को समय रहते रोकना और नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचना बताया गया है।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि भट्टी के नेटवर्क का देश के भीतर कितना विस्तार था और सोशल मीडिया के जरिए कितने लोगों को इसके संपर्क में लाया गया। इसके साथ ही यह भी जांच का विषय है कि गिरफ्तार किए गए लोगों की भूमिका क्या थी, उन्हें किस तरह प्रभावित किया गया और नेटवर्क के पीछे कौन-कौन से लोग आर्थिक या अन्य माध्यमों से मदद कर रहे थे। इस पूरे मामले में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से कथित संबंधों की भी जांच की जा रही है।
यह मामला एक बार फिर इस खतरे की ओर ध्यान खींचता है कि आतंकी और आपराधिक नेटवर्क अब केवल पारंपरिक माध्यमों पर निर्भर नहीं हैं। सोशल मीडिया उनके लिए संपर्क, प्रभाव और कथित भर्ती का नया माध्यम बनता जा रहा है। ऐसे नेटवर्क खास तौर पर युवाओं को निशाना बना सकते हैं और पैसे, लोकप्रियता या किसी दूसरे लालच के जरिए उन्हें धीरे-धीरे अपने प्रभाव में लेने की कोशिश कर सकते हैं। इसलिए सुरक्षा एजेंसियों के सामने चुनौती सिर्फ सीमापार नेटवर्क को रोकने की नहीं, बल्कि डिजिटल माध्यमों से होने वाली ऐसी गतिविधियों की पहचान करने की भी है।
शाहजाद भट्टी मामले में अब जांच का दायरा उसके कथित नेटवर्क से जुड़े लोगों, उनके संपर्कों और वित्तीय लेन-देन तक बढ़ सकता है। सुरक्षा एजेंसियां यह समझने की कोशिश करेंगी कि UAE से संचालित होने वाले इस नेटवर्क की भारत में मौजूद कड़ियां कितनी मजबूत थीं और क्या गिरफ्तार किए गए लोगों के बीच किसी तरह का संगठित संपर्क था। फिलहाल सामने आए आरोप बेहद गंभीर हैं, लेकिन प्रत्येक आरोपी की भूमिका और दोष का निर्धारण जांच तथा अदालत की प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।
कुल मिलाकर, शाहजाद भट्टी का मामला आतंक और अपराध की बदलती रणनीति की एक गंभीर तस्वीर सामने रखता है—जहां सोशल मीडिया का इस्तेमाल कथित तौर पर युवाओं तक पहुंच बनाने और उन्हें आपराधिक गतिविधियों की ओर धकेलने के लिए किया जा सकता है। स्वतंत्रता दिवस से पहले 200 से अधिक संदिग्ध ऑपरेटिव की गिरफ्तारी के बाद अब सुरक्षा एजेंसियों की नजर इस पूरे नेटवर्क की बाकी कड़ियों पर है। आने वाले दिनों में जांच से यह साफ हो सकता है कि भट्टी के नेटवर्क का वास्तविक विस्तार कितना था और भारत में इसके पीछे कौन-कौन से लोग सक्रिय थे।




