शिक्षा/ राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | जयपुर | 17 अगस्त 2026
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के तहत राजस्थान के सरकारी स्कूलों का दौरा करने की घोषणा के बीच राज्य सरकार ने स्कूलों में बाहरी लोगों के प्रवेश और विद्यार्थियों की फोटो-वीडियोग्राफी को लेकर पाबंदियां लगा दी हैं। यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब CJP के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने राजस्थान के कई जिलों से स्कूलों की खराब हालत को लेकर शिकायतें मिलने का दावा करते हुए मौके पर जाकर स्थिति देखने की बात कही है। सरकार की ओर से जारी सर्कुलर में विद्यार्थियों, शिक्षकों और स्कूल की गतिविधियों की फोटो, वीडियो, इंटरव्यू, ऑडियो रिकॉर्डिंग या लाइव स्ट्रीमिंग पर रोक की बात कही गई है।
CJP का कहना है कि उसे राजस्थान के अलग-अलग हिस्सों से ऐसे सरकारी स्कूलों को लेकर शिकायतें मिली हैं, जिनकी इमारतें जर्जर हैं और जहां बुनियादी सुविधाओं की स्थिति पर सवाल उठाए जा रहे हैं। आशुतोष रांका के मुताबिक जयपुर, अजमेर, जोधपुर, उदयपुर, धौलपुर, भरतपुर, कोटा, बाड़मेर और हनुमानगढ़ से उन्हें स्कूलों की स्थिति देखने के लिए अनुरोध मिले हैं। उनका दावा है कि कुछ स्थानों पर स्थानीय लोगों द्वारा स्कूलों की समस्याएं प्रशासन के सामने रखे जाने के बावजूद समाधान नहीं हुआ है।
CJP ने इसी के बाद अपने ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान को राजस्थान तक ले जाने की घोषणा की है। संगठन ने लोगों से अपील की है कि यदि उनके गांव या शहर में कोई जर्जर सरकारी स्कूल है और प्रशासन उसकी मरम्मत या बुनियादी समस्याओं को दूर नहीं कर रहा है, तो वे इसकी जानकारी CJP तक पहुंचाएं। रांका ने राजस्थान के शिक्षा विभाग और स्कूल शिक्षा मंत्री मदन दिलावर को भी टैग करते हुए इन शिकायतों को सामने लाने की बात कही है।
लेकिन CJP के इस ऐलान के बीच राज्य सरकार का नया सर्कुलर पूरे मामले को एक अलग दिशा देता है। सरकार ने सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों के प्रवेश को नियंत्रित करने के साथ-साथ विद्यार्थियों और स्कूल गतिविधियों की रिकॉर्डिंग पर भी प्रतिबंध लगाया है। प्रशासन का तर्क विद्यार्थियों की निजता और सुरक्षा से जुड़ा है। खासकर बच्चों की तस्वीरें और वीडियो बिना अनुमति सार्वजनिक किए जाने को लेकर स्कूल प्रशासन को सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
इस फैसले का सीधा असर CJP के प्रस्तावित स्कूल निरीक्षण अभियान पर पड़ सकता है। यदि संगठन के सदस्य बिना पूर्व अनुमति सरकारी स्कूलों में जाकर स्थिति का निरीक्षण करना चाहते हैं, तो उन्हें अब प्रशासनिक नियमों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि CJP अपने अभियान को किस तरीके से आगे बढ़ाता है और क्या संगठन संबंधित विभाग से औपचारिक अनुमति लेकर स्कूलों का दौरा करता है।
पूरे विवाद का एक अहम पहलू यह भी है कि स्कूलों की वास्तविक समस्याओं को सामने लाने और बच्चों की निजता की रक्षा—दोनों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। सरकारी स्कूल सार्वजनिक संस्थान हैं, लेकिन उनमें पढ़ने वाले बच्चे और उनकी व्यक्तिगत जानकारी सार्वजनिक प्रदर्शन की वस्तु नहीं हैं। इसलिए फोटो, वीडियो और लाइव स्ट्रीमिंग पर नियंत्रण को लेकर सरकार का तर्क बच्चों की सुरक्षा और निजता से जुड़ा है। वहीं दूसरी ओर, यदि किसी सरकारी स्कूल की इमारत जर्जर है, शौचालय, पेयजल, कक्षाओं या अन्य बुनियादी सुविधाओं की समस्या है, तो उसकी स्थिति की स्वतंत्र जांच और सार्वजनिक जवाबदेही भी लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
यही कारण है कि अब विवाद केवल CJP के स्कूल दौरे तक सीमित नहीं रह गया है। असली सवाल यह है कि यदि किसी स्कूल को लेकर शिकायत आती है तो उसकी जांच की व्यवस्थित और पारदर्शी व्यवस्था क्या होगी। क्या शिक्षा विभाग स्वयं शिकायतों की जांच करेगा? क्या स्कूलों की स्थिति की तस्वीरें और वीडियो अधिकृत अधिकारियों के माध्यम से सार्वजनिक की जा सकती हैं? और क्या किसी बाहरी संगठन को स्कूल की स्थिति देखने के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत अनुमति दी जाएगी? इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण होंगे।
CJP का राजस्थान में प्रवेश ऐसे समय में हो रहा है जब संगठन पहले ही छात्र और शिक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर सक्रियता दिखा चुका है। अब राजस्थान के सरकारी स्कूलों को लेकर अभियान की घोषणा ने राज्य सरकार और संगठन के बीच एक नया आमना-सामना खड़ा कर दिया है। एक तरफ CJP स्कूलों की जमीनी स्थिति सामने लाने का दावा कर रहा है, तो दूसरी तरफ सरकार विद्यार्थियों की निजता और स्कूल परिसर की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात कर रही है।
यह स्पष्ट है कि राजस्थान में ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान आने वाले दिनों में राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चा का विषय बन सकता है। यदि CJP द्वारा किए गए स्कूलों की खराब स्थिति के दावे सही पाए जाते हैं, तो संबंधित विभाग पर कार्रवाई और सुधार की जिम्मेदारी तय करने का दबाव बढ़ सकता है। वहीं यदि सरकार को लगता है कि किसी संगठन की गतिविधियों से विद्यार्थियों की निजता या सुरक्षा प्रभावित हो सकती है, तो उसके लिए निर्धारित नियमों के तहत अनुमति और निगरानी की व्यवस्था करना भी जरूरी होगा।
अब निगाह इस बात पर है कि CJP के घोषित दौरे के बाद राजस्थान के स्कूलों की जमीनी तस्वीर कितनी सामने आती है और सरकार इन शिकायतों पर क्या कार्रवाई करती है। स्कूलों की बदहाल स्थिति हो या बच्चों की निजता—दोनों ही सवाल सीधे सार्वजनिक हित से जुड़े हैं। इसलिए इस पूरे विवाद का समाधान आरोप-प्रत्यारोप से नहीं, बल्कि पारदर्शी निरीक्षण, आधिकारिक रिकॉर्ड और समयबद्ध कार्रवाई से ही निकल सकता है।




