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झारखंड में छात्र आंदोलन पर राहुल गांधी का दखल, हेमंत सोरेन से बोले—‘छात्रों की सुनिए, कार्रवाई कीजिए’

भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं के खिलाफ झारखंड में आंदोलन तेज, JMM सरकार पर बढ़ा दबाव; सहयोगी कांग्रेस भी सवालों के घेरे में

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 17 अगस्त 2026

झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन अब राज्य की सत्तारूढ़ गठबंधन सरकार के लिए बड़ी राजनीतिक चुनौती बनता जा रहा है। बढ़ते विरोध के बीच कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों की बात सुनने और उनकी शिकायतों पर उचित कार्रवाई करने की अपील की है। राहुल गांधी का यह हस्तक्षेप ऐसे समय हुआ है जब झारखंड में छात्रों का आंदोलन लगातार सरकार पर दबाव बढ़ा रहा है।

मामले का राजनीतिक महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि झारखंड में कांग्रेस, हेमंत सोरेन की झारखंड मुक्ति मोर्चा यानी JMM के साथ सत्ता में सहयोगी है। ऐसे में एक तरफ कांग्रेस विपक्ष में रहते हुए परीक्षा और पेपर लीक जैसे मुद्दों पर छात्रों के आंदोलनों का समर्थन करती रही है, वहीं दूसरी तरफ उसके अपने गठबंधन वाली सरकार अब भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर छात्रों के निशाने पर है। राहुल गांधी का मुख्यमंत्री को पत्र इसी राजनीतिक असहजता के बीच सामने आया है।

भर्ती परीक्षाओं पर उठे सवाल, सड़कों पर छात्र

झारखंड में छात्र राज्य लोक सेवा आयोग और कर्मचारी चयन आयोग से जुड़ी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं। छात्रों की शिकायतों और विरोध ने भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता, परीक्षा संचालन और सरकारी संस्थाओं की जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

छात्रों का आंदोलन ऐसे समय सामने आया है जब देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता को लेकर युवाओं में पहले से असंतोष देखने को मिला है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी करीब एक महीने पहले छात्रों ने पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर बड़ा प्रदर्शन किया था। अब झारखंड का आंदोलन उसी व्यापक चिंता की अगली कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।

दिल्ली में विरोध के समर्थन के बाद झारखंड में कांग्रेस की परीक्षा

झारखंड का आंदोलन कांग्रेस के लिए राजनीतिक रूप से असहज स्थिति लेकर आया है। दिल्ली में जब छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं के खिलाफ सड़कों पर उतरे थे, तब कांग्रेस ने उनके विरोध को समर्थन दिया था और केंद्र सरकार पर सवाल खड़े किए थे।

लेकिन अब इसी तरह की शिकायतें झारखंड में सामने आई हैं, जहां कांग्रेस स्वयं सरकार का हिस्सा है। इससे पार्टी के सामने स्वाभाविक रूप से यह सवाल खड़ा हुआ कि क्या वह अपने सहयोगी दल की सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों की मांगों का उसी मजबूती से समर्थन करेगी, जिस तरह वह केंद्र के खिलाफ छात्र आंदोलनों के दौरान करती रही है।

राहुल गांधी का हेमंत सोरेन को पत्र इसी सवाल का राजनीतिक जवाब देने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री से छात्रों को सुनने और उनकी शिकायतों पर उचित कदम उठाने का आग्रह किया है।

राहुल गांधी का संदेश—छात्रों की आवाज सुनी जाए

राहुल गांधी ने अपने पत्र के माध्यम से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से आग्रह किया है कि आंदोलन कर रहे छात्रों की बात सुनी जाए और उनकी शिकायतों के समाधान के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाए। उनका संदेश साफ है कि भर्ती परीक्षाओं से जुड़े विवादों को केवल राजनीतिक विरोध के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि छात्रों की वास्तविक शिकायतों की जांच होनी चाहिए।

प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने वाले युवाओं के लिए एक परीक्षा केवल एक परीक्षा नहीं होती। इसके पीछे वर्षों की तैयारी, आर्थिक खर्च और रोजगार की उम्मीद जुड़ी होती है। ऐसे में यदि परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं तो युवाओं के बीच अविश्वास पैदा होना स्वाभाविक है। यही कारण है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर उठने वाले सवालों का जवाब सरकार और संबंधित परीक्षा संस्थाओं को स्पष्ट रूप से देना पड़ता है।

हेमंत सोरेन सरकार के सामने बढ़ी चुनौती

छात्रों के विरोध ने अब हेमंत सोरेन सरकार के सामने दोहरी चुनौती खड़ी कर दी है। एक तरफ उसे परीक्षा व्यवस्था को लेकर छात्रों की शिकायतों का समाधान करना है, तो दूसरी तरफ उसे यह भी साबित करना होगा कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और नियमों का पालन किया गया है।

यदि छात्रों की शिकायतों में तथ्य हैं तो सरकार को दोषी अधिकारियों या संबंधित संस्थाओं की जिम्मेदारी तय करनी होगी। वहीं यदि आरोप तथ्यहीन पाए जाते हैं तो सरकार के पास दस्तावेजों और जांच के आधार पर स्थिति स्पष्ट करने का रास्ता मौजूद है। किसी भी स्थिति में केवल राजनीतिक बयानबाजी से छात्रों का भरोसा बहाल करना आसान नहीं होगा।

कांग्रेस के लिए भी अग्निपरीक्षा

झारखंड का यह आंदोलन कांग्रेस के लिए भी एक तरह की राजनीतिक अग्निपरीक्षा बन गया है। पार्टी को यह दिखाना होगा कि छात्रों के अधिकार और भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता का मुद्दा उसके लिए केवल विपक्ष में रहते हुए उठाया जाने वाला राजनीतिक हथियार नहीं है।

राहुल गांधी का मुख्यमंत्री को पत्र यह संकेत देता है कि कांग्रेस इस मुद्दे को पूरी तरह नजरअंदाज करने के मूड में नहीं है। लेकिन अब असली सवाल यह होगा कि राज्य सरकार छात्रों की मांगों पर क्या कार्रवाई करती है और कांग्रेस गठबंधन के भीतर इस मुद्दे को किस स्तर तक उठाती है।

फिलहाल झारखंड में छात्र आंदोलन जारी है और सरकार पर दबाव बढ़ रहा है। राहुल गांधी के हस्तक्षेप ने इस विवाद को राज्य की भर्ती परीक्षाओं से निकालकर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में भी ला दिया है। अब सबकी नजर हेमंत सोरेन सरकार के अगले कदम पर है—क्या छात्रों की शिकायतों की निष्पक्ष जांच होगी, क्या जिम्मेदारी तय होगी और क्या भर्ती परीक्षाओं पर युवाओं का भरोसा फिर बहाल किया जा सकेगा?

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