राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 14 अगस्त 2026
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ स्वतंत्रता सेनानी और हिंदुत्व विचारक विनायक दामोदर सावरकर को लेकर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी से जुड़े मामले को खारिज कर दिया। अदालत ने यह फैसला उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से राहुल गांधी के खिलाफ अभियोजन चलाने की मंजूरी नहीं दिए जाने के बाद सुनाया। शीर्ष अदालत ने लखनऊ निवासी नृपेंद्र पांडे की निजी शिकायत और उसके आधार पर लखनऊ के मजिस्ट्रेट द्वारा जारी किए गए समन, दोनों को रद्द कर दिया।
2022 की भारत जोड़ो यात्रा से जुड़ा था मामला
यह मामला राहुल गांधी की वर्ष 2022 में महाराष्ट्र में निकाली गई ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान सावरकर को लेकर दिए गए कथित बयानों से जुड़ा था। लखनऊ निवासी नृपेंद्र पांडे ने राहुल गांधी के खिलाफ निजी शिकायत दाखिल की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि कांग्रेस नेता ने सावरकर के बारे में ऐसी टिप्पणियां कीं, जिन्हें शिकायतकर्ता ने अपमानजनक और आपत्तिजनक बताया।
शिकायत के आधार पर लखनऊ की अदालत में कार्यवाही आगे बढ़ी और राहुल गांधी को समन जारी किया गया। मामला बाद में सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां शीर्ष अदालत ने अभियोजन के लिए आवश्यक मंजूरी के सवाल को भी महत्वपूर्ण माना।
यूपी सरकार की मंजूरी नहीं, केस की बुनियाद कमजोर
सुप्रीम कोर्ट के सामने सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह था कि उत्तर प्रदेश सरकार ने राहुल गांधी के खिलाफ अभियोजन चलाने के लिए आवश्यक मंजूरी नहीं दी। इसी आधार पर शीर्ष अदालत ने मामले को आगे जारी रखने का आधार नहीं पाया और शिकायत तथा मजिस्ट्रेट के समन को निरस्त कर दिया।
इस फैसले का अर्थ यह है कि अदालत ने राहुल गांधी के कथित बयान को सही या गलत ठहराते हुए कोई व्यापक राजनीतिक फैसला नहीं दिया, बल्कि मामले की कानूनी स्थिति और अभियोजन की आवश्यक मंजूरी के अभाव को ध्यान में रखते हुए कार्यवाही समाप्त की।
पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी को दी थी चेतावनी
इस मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले राहुल गांधी की टिप्पणियों को लेकर सख्त रुख भी अपनाया था। पिछले वर्ष जुलाई में शीर्ष अदालत ने उन्हें स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में इस तरह के बयान देने से बचने की सलाह दी थी।
अदालत ने उस समय स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े लोगों के योगदान का उल्लेख करते हुए राहुल गांधी को सार्वजनिक बयानों में सावधानी बरतने का संदेश दिया था। हालांकि, शुक्रवार के आदेश में अदालत ने वर्तमान आपराधिक कार्यवाही को समाप्त कर दिया।
शिकायतकर्ता ने लगाया था सावरकर के अपमान का आरोप
शिकायतकर्ता नृपेंद्र पांडे का आरोप था कि राहुल गांधी ने महाराष्ट्र में भारत जोड़ो यात्रा के दौरान सावरकर के बारे में ऐसी टिप्पणी की, जिससे उनकी प्रतिष्ठा और सम्मान को ठेस पहुंची। इसी आरोप के आधार पर आपराधिक कार्यवाही शुरू करने की मांग की गई थी।
राहुल गांधी लंबे समय से सावरकर के राजनीतिक विचारों और स्वतंत्रता आंदोलन में उनकी भूमिका को लेकर सार्वजनिक रूप से आलोचनात्मक रुख रखते रहे हैं। दूसरी ओर, भाजपा और हिंदुत्व संगठनों ने कई बार उनके बयानों को सावरकर और स्वतंत्रता आंदोलन के प्रति अपमानजनक बताते हुए विरोध किया है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से राहुल गांधी को कानूनी राहत
शुक्रवार का फैसला राहुल गांधी के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी राहत के रूप में सामने आया है। शीर्ष अदालत द्वारा शिकायत और समन दोनों को रद्द किए जाने के बाद इस मामले में उनके खिलाफ लखनऊ में चल रही संबंधित कार्यवाही समाप्त हो गई।
हालांकि, इस फैसले को राहुल गांधी के सावरकर संबंधी राजनीतिक विचारों पर अदालत की स्वीकृति के रूप में देखना सही नहीं होगा। अदालत का फैसला मुख्य रूप से इस बात पर आधारित है कि अभियोजन के लिए आवश्यक सरकारी मंजूरी उपलब्ध नहीं थी।
सावरकर को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच पुराना विवाद
सावरकर का मुद्दा लंबे समय से कांग्रेस और भाजपा के बीच वैचारिक और राजनीतिक टकराव का विषय रहा है। भाजपा सावरकर को स्वतंत्रता आंदोलन के महत्वपूर्ण व्यक्तित्व और राष्ट्रवादी विचारक के रूप में प्रस्तुत करती है, जबकि कांग्रेस के कई नेता उनके राजनीतिक विचारों और ब्रिटिश शासन के दौरान उनकी भूमिका को लेकर आलोचना करते रहे हैं।
राहुल गांधी के बयानों के बाद दोनों दलों के बीच कई बार तीखी राजनीतिक बहस हुई है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का शुक्रवार का फैसला कानूनी राहत के साथ-साथ राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
फैसला क्या कहता है?
शीर्ष अदालत ने मूल शिकायत और लखनऊ मजिस्ट्रेट द्वारा जारी समन दोनों को रद्द कर दिया। अदालत के आदेश का तत्काल प्रभाव यह है कि इस विशेष मामले में राहुल गांधी के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही आगे नहीं चलेगी।
यह फैसला ऐसे समय आया है जब राहुल गांधी संसद और सार्वजनिक जीवन में सरकार के खिलाफ लगातार मुखर हैं और उनके कई राजनीतिक बयानों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखा टकराव जारी है।
राजनीतिक असर भी देखने को मिल सकता है
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कांग्रेस इसे राहुल गांधी को मिली बड़ी कानूनी राहत के तौर पर पेश कर सकती है। वहीं भाजपा और सावरकर समर्थक संगठन इस बात पर जोर दे सकते हैं कि शीर्ष अदालत ने पहले भी राहुल गांधी को स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में बयान देते समय सावधानी बरतने को कहा था।
इसलिए मामला कानूनी तौर पर समाप्त होने के बावजूद सावरकर को लेकर राजनीतिक बहस खत्म होने की संभावना कम है।
कानूनी राहत, लेकिन राजनीतिक विवाद कायम
सुप्रीम कोर्ट के शुक्रवार के आदेश ने राहुल गांधी के खिलाफ सावरकर टिप्पणी से जुड़े इस मामले को फिलहाल खत्म कर दिया है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अभियोजन की मंजूरी नहीं दिए जाने के बाद अदालत ने निजी शिकायत और मजिस्ट्रेट के समन को रद्द कर दिया।
फैसले का सबसे अहम संदेश यही है कि राजनीतिक रूप से विवादित बयान और उसके आधार पर आपराधिक मुकदमा—दो अलग कानूनी प्रश्न हैं। राहुल गांधी को इस मामले में राहत जरूर मिली है, लेकिन सावरकर को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच चल रही वैचारिक लड़ाई के जारी रहने के पूरे संकेत हैं।




