रक्षा/विज्ञान | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 14 अगस्त 2026
स्टील्थ तकनीक के सामने नई चुनौती
अमेरिका के F-22 और F-35 जैसे पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू विमान रडार से अपनी पहचान कम करने के लिए डिजाइन किए गए हैं, लेकिन उनके सामने एक ऐसी भौतिक सीमा है जिसे पूरी तरह छिपाना बेहद मुश्किल है—गर्मी यानी infrared/thermal signature। इंजन के निकास और विमान की सतह पर हवा के घर्षण से पैदा होने वाली गर्मी को इन्फ्रारेड सेंसर पकड़ सकते हैं। चीन के शोधकर्ताओं ने इसी क्षमता का इस्तेमाल करते हुए एक हल्की AI प्रणाली विकसित करने का दावा किया है, जो हवाई लक्ष्यों की thermal तस्वीरों को तेजी से पहचान सकती है।
F-22 और F-35 जैसे लक्ष्यों पर किया गया परीक्षण
South China Morning Post की रिपोर्ट के अनुसार, इस शोध में F-22 और F-35 जैसे विमानों की नकल करने वाले simulated targets को परीक्षण डेटा में शामिल किया गया था। इसके अलावा एक loitering munition को भी तीसरी श्रेणी के airborne target के रूप में इस्तेमाल किया गया।
महत्वपूर्ण बात यह है कि परीक्षण वास्तविक F-22 या F-35 विमानों के operational combat data पर आधारित होने की बात नहीं कही गई है। शोधकर्ताओं ने simulated targets वाले मौजूदा dataset में करीब 90% recognition rate का दावा किया है। इसलिए इसे वास्तविक युद्ध परिस्थितियों में F-22 या F-35 को निश्चित रूप से पहचान लेने की क्षमता के बराबर मानना उचित नहीं होगा।
3,245 infrared images से तैयार किया गया परीक्षण
शोधकर्ताओं के अनुसार, परीक्षण में कुल 3,245 infrared target images का इस्तेमाल किया गया। ये तस्वीरें missile-borne scanning infrared imaging system से संबंधित थीं। डेटा में तीन प्रकार के airborne targets शामिल थे, जिनमें F-22 और F-35 जैसे simulated aircraft targets तथा एक loitering munition शामिल था।
शोध में statistical error processing के बाद AI hardware accelerator ने 96.4% recognition accuracy हासिल की। शोधकर्ताओं ने औसत inference time करीब 1.5 milliseconds और कुल power consumption लगभग 2.2 watts बताया।
यह प्रदर्शन इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि किसी मिसाइल के भीतर इस्तेमाल होने वाली computing प्रणाली को सामान्य कंप्यूटर या बड़े सर्वर की तरह भारी-भरकम hardware उपलब्ध नहीं होता।
AI को छोटा और हल्का बनाने पर जोर
शोधकर्ताओं ने ऐसी neural network architecture विकसित की है जिसे सीमित computing resources वाले missile-mounted systems में इस्तेमाल किया जा सके। अध्ययन के अनुसार, नए मॉडल में parameters की संख्या पुराने तरीकों की तुलना में घटाकर लगभग 16.1% कर दी गई, जबकि computational requirements करीब 19.2% तक लाई गईं।
इसके लिए structural optimisation, batch-normalisation fusion और 8-bit quantisation जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया। उद्देश्य यह है कि कम computational power में भी AI तेजी से infrared images को process कर सके।
सिर्फ कुछ मिलीसेकंड में target recognition
मिसाइल के लिए लक्ष्य पहचानने में गति बेहद महत्वपूर्ण होती है। हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल के terminal phase में लक्ष्य लगातार दिशा और गति बदल सकता है। ऐसे में AI प्रणाली को उपलब्ध infrared image को बहुत कम समय में process करना पड़ता है।
शोधकर्ताओं द्वारा बताए गए लगभग 1.5 मिलीसेकंड के औसत inference time का अर्थ है कि hardware accelerator बहुत तेजी से एक input को process करने में सक्षम था। हालांकि, यह आंकड़ा केवल AI inference प्रक्रिया की गति बताता है; इससे पूरी मिसाइल की detection, tracking, guidance और interception प्रक्रिया का कुल समय निर्धारित नहीं होता।
Flares के खिलाफ infrared पहचान का सवाल
Heat-seeking missiles से बचने के लिए लड़ाकू विमान infrared flares का इस्तेमाल कर सकते हैं। Flare का उद्देश्य missile के infrared seeker को भ्रमित करना और विमान के वास्तविक thermal signature से उसका ध्यान हटाना होता है।
लेकिन विमान के इंजन और एयरफ्रेम से पैदा होने वाला thermal signature और flare की infrared characteristics अलग हो सकती हैं। इसी अंतर को AI-based image recognition प्रणाली के जरिए पहचानने की कोशिश इस शोध का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
फिर भी इसका मतलब यह नहीं है कि भविष्य में flares स्वतः बेकार हो जाएंगे। वास्तविक युद्ध में infrared background, दूरी, मौसम, sensor resolution, target aspect angle, electronic countermeasures और कई अन्य कारक recognition की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकते हैं।
सिस्टम की कीमत भी कम रखने का दावा
अध्ययन के पहले लेखक An Jiangshan के अनुसार, इसमें इस्तेमाल किया गया Zynq7020 AI platform केवल कुछ सौ चीनी युआन की कीमत वाला relatively low-cost hardware है। शोधकर्ताओं का कहना है कि इसका उद्देश्य missile-borne infrared systems के लिए ऐसा समाधान तैयार करना है जो कम लागत, कम वजन और कम ऊर्जा खपत के साथ काम कर सके।
यही पहलू सैन्य दृष्टि से महत्वपूर्ण है। यदि किसी AI प्रणाली को छोटे embedded hardware पर चलाया जा सके तो उसे बड़े computing systems पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं होगी।
Beijing Institute of Technology भी शोध में शामिल
इस परियोजना में Beijing Institute of Technology (BIT) के शोधकर्ताओं के साथ China Airborne Missile Academy और near-surface detection से संबंधित एक national key laboratory के शोधकर्ता भी शामिल थे।
BIT चीन के प्रमुख तकनीकी और सैन्य अनुसंधान संस्थानों में गिना जाता है। इस शोध का प्रकाशन चीनी peer-reviewed Journal of Electronic Measurement and Instrumentation में हुआ है।
वास्तविक F-22 और F-35 का डेटा सार्वजनिक नहीं
इस अध्ययन की सबसे महत्वपूर्ण सीमाओं में से एक यह है कि वास्तविक F-22 और F-35 से जुड़े परीक्षण डेटा सार्वजनिक नहीं किया गया है। जब शोधकर्ता से पांचवीं पीढ़ी के वास्तविक अमेरिकी लड़ाकू विमानों की पहचान की accuracy के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि संबंधित test dataset में confidentiality से जुड़े मुद्दे हैं और उसे सार्वजनिक नहीं किया जा सकता।
इसलिए 96.4% या 97.1% की reported accuracy को सीधे वास्तविक F-22/F-35 combat identification accuracy नहीं माना जा सकता। ये आंकड़े अध्ययन में इस्तेमाल किए गए परीक्षण डेटा और उसके hardware implementation से संबंधित हैं।
Surface-to-air missiles पर असर अभी स्पष्ट नहीं
शोधकर्ताओं ने स्वयं यह भी स्पष्ट किया कि अध्ययन मुख्य रूप से air-to-air missiles के close-range fuses पर केंद्रित है। Surface-to-air missiles पर इस प्रणाली का प्रभाव अभी सत्यापित किया जाना बाकी है।
इसका मतलब यह है कि चीन ने एक ऐसी तकनीकी क्षमता पर काम किया है जो भविष्य में infrared-guided air-to-air weapons के terminal-stage target recognition को बेहतर कर सकती है, लेकिन इससे यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी कि चीन ने स्टील्थ विमानों के खिलाफ कोई पूर्ण या निर्णायक counter-stealth solution विकसित कर लिया है।
स्टील्थ बनाम AI—बदल सकता है हवाई युद्ध का समीकरण
यदि ऐसी प्रणालियां आगे चलकर अधिक बड़े और विविध वास्तविक-world datasets पर विश्वसनीय साबित होती हैं, तो इसका प्रभाव आधुनिक हवाई युद्ध की रणनीति पर पड़ सकता है। स्टील्थ विमानों की survivability केवल radar cross-section कम करने पर निर्भर नहीं होती; infrared, electromagnetic emissions और अन्य signatures भी महत्वपूर्ण होते हैं।
AI के जरिए अलग-अलग thermal patterns को तेजी से वर्गीकृत करने की क्षमता missile seekers को सीमित computing resources के बावजूद अधिक sophisticated बनाने की दिशा में एक कदम हो सकती है।
लेकिन अभी इसे ‘स्टील्थ किलर’ कहना जल्दबाजी होगी
चीनी शोध निश्चित रूप से ध्यान देने योग्य है, खासकर कम लागत और कम power consumption वाले embedded AI की दिशा में। लेकिन उपलब्ध परीक्षण simulated targets पर आधारित हैं और वास्तविक F-22 या F-35 के operational combat environment में इसकी effectiveness सार्वजनिक रूप से प्रमाणित नहीं हुई है।
इसलिए इसे “स्टील्थ विमानों को खत्म करने वाली तकनीक” कहना अभी वैज्ञानिक रूप से उचित नहीं होगा। अधिक सटीक निष्कर्ष यह है कि चीन ने infrared target recognition के लिए एक lightweight AI architecture का प्रदर्शन किया है, जो भविष्य के missile-borne seekers की क्षमता बढ़ा सकता है।
आगे का असली परीक्षण वास्तविक युद्ध जैसी परिस्थितियां होंगी
अब इस तकनीक की वास्तविक उपयोगिता इस बात पर निर्भर करेगी कि यह अलग-अलग दूरी, मौसम, पृष्ठभूमि तापमान, target angles, decoys और electronic warfare जैसी परिस्थितियों में कितनी विश्वसनीय रहती है। शोधकर्ताओं ने भी भविष्य के काम में recognition accuracy और processing speed को और बेहतर करने की बात कही है।
यानी चीन का यह शोध एक महत्वपूर्ण counter-stealth दिशा जरूर दिखाता है, लेकिन अभी इसे अंतिम सैन्य breakthrough के बजाय एक विकसित होती तकनीकी क्षमता के रूप में देखना अधिक उचित होगा।




