पर्यावरण | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 14 अगस्त 2026
प्रशांत महासागर में तेजी से मजबूत हो रहा अल नीनो इस साल के अंत तक दुनिया के मौसम का मिजाज बदल सकता है। अमेरिका की National Oceanic and Atmospheric Administration (NOAA) के अनुमान के मुताबिक, इस अल नीनो के 1950 के बाद दर्ज किए गए सबसे मजबूत घटनाक्रमों में शामिल होने की संभावना करीब 69 फीसदी है। इसके साल के अंत तक लगातार मजबूत होने और उत्तरी गोलार्ध की सर्दियों के दौरान चरम पर पहुंचने का अनुमान है।
इस साल के मानसून पर बड़ा असर नहीं
सब हेडलाइन: मौजूदा मानसून पर फिलहाल बड़ा प्रभाव नहीं, अल नीनो का असली असर बाद में सामने आने की संभावना।
भारत के लिए फिलहाल राहत की बात है। मौजूदा दक्षिण-पश्चिम मानसून पर अल नीनो का बड़ा असर अभी दिखाई नहीं दिया है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इसके प्रभाव भारत और हिंद महासागर क्षेत्र तक पहुंचने में कुछ हफ्तों का समय लग सकता है। इसलिए इस साल के मानसून के बाकी हिस्से को लेकर तत्काल किसी बड़े खतरे की स्थिति नहीं है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग यानी IMD ने भी कहा है कि मौजूदा मानसून अब तक अल नीनो से बड़े स्तर पर प्रभावित नहीं हुआ है। ऐसे में फिलहाल चिंता से ज्यादा निगरानी जरूरी है।
अल नीनो आखिर है क्या?
सब हेडलाइन: प्रशांत महासागर के गर्म होने से दुनिया के कई हिस्सों में बदल सकता है बारिश और तापमान का पैटर्न।
अल नीनो प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से ज्यादा गर्म होने की स्थिति है। इसका असर केवल प्रशांत महासागर तक सीमित नहीं रहता। यह दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में बारिश, तापमान और सूखे के पैटर्न को प्रभावित कर सकता है।
भारत के लिए अल नीनो इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मजबूत अल नीनो को अक्सर कमजोर मानसून और कम बारिश के जोखिम से जोड़ा जाता है। हालांकि हर अल नीनो का असर एक जैसा नहीं होता। भारतीय मानसून पर हिंद महासागर की स्थिति और कई दूसरे मौसम संबंधी कारकों का भी असर पड़ता है।
असली चिंता आगे की
सब हेडलाइन: साल के अंत और 2027 की शुरुआत में बढ़ सकती है मौसम संबंधी चुनौती।
विशेषज्ञों की नजर अब खास तौर पर साल के अंत और 2027 की शुरुआत पर है। अगर अल नीनो अनुमान के मुताबिक बेहद मजबूत होता है, तो इसका असर भारत समेत दुनिया के कई हिस्सों में तापमान, बारिश और सूखे की परिस्थितियों के रूप में दिखाई दे सकता है।
भारत के लिए इसका मतलब साफ है—अभी घबराने की जरूरत नहीं, लेकिन तैयारी में देरी भी नहीं होनी चाहिए। आने वाले महीनों में अल नीनो की स्थिति, हिंद महासागर के तापमान और दूसरे मौसम संबंधी संकेतकों पर लगातार नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।
भारत के लिए क्या मायने?
सब हेडलाइन: मानसून, गर्मी और बारिश के पैटर्न पर नजर जरूरी, लेकिन अभी किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी।
मजबूत अल नीनो की आशंका भारत के लिए मौसम और कृषि दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकती है। अगर बारिश सामान्य से कम होती है तो खेती, जल उपलब्धता और कुछ क्षेत्रों में सूखे का जोखिम बढ़ सकता है। वहीं तापमान में बदलाव का असर आम जनजीवन और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
हालांकि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि भारत में 2027 का मानसून कमजोर ही रहेगा। मौसम की तस्वीर कई कारकों पर निर्भर करती है और आने वाले महीनों में परिस्थितियां बदल सकती हैं।
फिलहाल सबसे जरूरी संदेश यही है—अल नीनो को लेकर घबराने की नहीं, बल्कि समय रहते तैयारी, वैज्ञानिक निगरानी और सही जानकारी पर ध्यान देने की जरूरत है।




