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तनाव के बीच भारत-बांग्लादेश संवाद की नई पहल, पीएम तारिक रहमान से मिले हाई कमिश्नर दिनेश त्रिवेदी

शेख हसीना की दिल्ली से वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद बढ़ी थी तल्खी; दोनों देशों के रिश्तों के बीच बैठक को सकारात्मक संकेत के तौर पर देखा जा रहा

अंतरराष्ट्रीय/भारत-बांग्लादेश/कूटनीति | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 10 अगस्त 2026

भारत और बांग्लादेश के बीच हाल के दिनों में बढ़े तनाव के बीच सोमवार को कूटनीतिक स्तर पर एक महत्वपूर्ण मुलाकात हुई। बांग्लादेश में भारत के हाई कमिश्नर दिनेश त्रिवेदी ने प्रधानमंत्री तारिक रहमान से मुलाकात की। यह बैठक ऐसे समय हुई है जब पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की दिल्ली से हुई वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर ढाका और नई दिल्ली के बीच राजनीतिक और कूटनीतिक संवेदनशीलता बढ़ी हुई है।

बैठक को नई दिल्ली के कूटनीतिक सूत्रों ने सकारात्मक घटनाक्रम के रूप में देखा है। खास बात यह है कि उसी समय बांग्लादेश में भारत का एक उच्चस्तरीय सुरक्षा संबंधी प्रतिनिधिमंडल भी मौजूद है। ऐसे माहौल में दोनों देशों के शीर्ष स्तर के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत को रिश्तों में संवाद बनाए रखने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

शेख हसीना के बयान के बाद बढ़ी थी तल्खी

5 अगस्त को शेख हसीना ने दिल्ली के फॉरेन कॉरेस्पॉन्डेंट्स क्लब से वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया था। इस दौरान उन्होंने तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बांग्लादेश सरकार की आलोचना की थी। उनके बयान के बाद ढाका की ओर से नाराजगी सामने आई और दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद संवेदनशील मुद्दों को लेकर तनाव बढ़ गया।

बांग्लादेश की मौजूदा सरकार के लिए शेख हसीना का भारत में रहना और वहां से बांग्लादेश की राजनीति पर टिप्पणी करना एक संवेदनशील विषय है। दूसरी ओर भारत के लिए भी बांग्लादेश के साथ संबंध रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में किसी भी राजनीतिक बयान का असर दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ सकता है।

मुलाकात में कौन-कौन रहा मौजूद?

जानकारी के अनुसार प्रधानमंत्री तारिक रहमान के साथ बैठक में बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान और प्रधानमंत्री के विदेश मामलों के सलाहकार हुमायूं कबीर भी मौजूद रहे। भारतीय पक्ष से हाई कमिश्नर दिनेश त्रिवेदी के साथ डिप्टी हाई कमिश्नर पवन बधे मौजूद थे।

कूटनीतिक सूत्रों के मुताबिक बैठक का माहौल सौहार्दपूर्ण रहा। हालांकि बातचीत में किन मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

सुरक्षा सहयोग भी अहम

भारत और बांग्लादेश के संबंध केवल राजनीतिक संपर्क तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के बीच सीमा सुरक्षा, आतंकवाद के खिलाफ सहयोग, व्यापार, कनेक्टिविटी, ऊर्जा, जल संसाधन और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दे जुड़े हुए हैं।

ऐसे समय में जब बांग्लादेश में भारत का उच्चस्तरीय सुरक्षा प्रतिनिधिमंडल भी मौजूद है, हाई कमिश्नर और प्रधानमंत्री की मुलाकात को और महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे संकेत मिलता है कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद दोनों देश संस्थागत संवाद के रास्ते बंद नहीं करना चाहते।

रिश्तों के लिए सकारात्मक संकेत

इस बैठक का सबसे सकारात्मक पहलू यही है कि तनाव के बीच भी दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है। कूटनीति में संवाद का बना रहना अपने आप में महत्वपूर्ण होता है। मतभेदों के बावजूद बातचीत के जरिए संवेदनशील मुद्दों को संभालने की गुंजाइश बनी रहती है।

भारत के लिए बांग्लादेश पड़ोसी होने के साथ-साथ पूर्वोत्तर भारत की कनेक्टिविटी और सुरक्षा के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण है। बांग्लादेश के लिए भारत के साथ व्यापार, ऊर्जा, परिवहन और क्षेत्रीय सहयोग का महत्व कम नहीं है। इसलिए लंबे समय तक तनाव दोनों देशों के हित में नहीं होगा।

चुनौतियां भी कम नहीं

हालांकि सकारात्मक संकेतों के बावजूद दोनों देशों के सामने कई कठिन सवाल हैं। शेख हसीना की मौजूदगी और उनके राजनीतिक बयानों के अलावा सीमा प्रबंधन, राजनीतिक विश्वास, सुरक्षा सहयोग और द्विपक्षीय व्यापार जैसे मुद्दों पर भी संवेदनशीलता बनी हुई है।

भारत को एक तरफ अपने पुराने राजनीतिक और रणनीतिक हितों की रक्षा करनी होगी, तो दूसरी ओर बांग्लादेश की मौजूदा सरकार के साथ व्यावहारिक संबंध मजबूत करने होंगे। वहीं ढाका के सामने भी भारत के साथ संबंधों में संतुलन बनाए रखने की चुनौती है।

अब आगे क्या?

दिनेश त्रिवेदी और तारिक रहमान की मुलाकात को फिलहाल किसी बड़े समझौते के रूप में नहीं देखा जा सकता, लेकिन यह निश्चित रूप से संवाद की खिड़की खुली रहने का संकेत है।

भारत-बांग्लादेश संबंधों में उतार-चढ़ाव कोई नई बात नहीं है, लेकिन दोनों देशों की भौगोलिक निकटता और साझा हित उन्हें लंबे समय तक एक-दूसरे से दूर रहने की अनुमति नहीं देते। ऐसे में मौजूदा तनाव को बातचीत, कूटनीति और व्यावहारिक सहयोग के जरिए कम करना दोनों देशों के हित में होगा।

फिलहाल सबसे बड़ा संदेश यही है—राजनीतिक बयानबाजी के बीच भी भारत और बांग्लादेश ने बातचीत का रास्ता बंद नहीं किया है। आने वाले दिनों में यह संवाद तनाव कम करने की दिशा में कितना आगे बढ़ता है, इस पर दोनों देशों की नजर रहेगी।

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