राष्ट्रीय/उत्तर प्रदेश/शिक्षा | ABC NATIONAL NEWS | 8 अगस्त 2026
प्रयागराज। बारिश, जलभराव और कीचड़ के बीच प्रयागराज के केपी ग्राउंड में शनिवार को छात्रों की भारी मौजूदगी के बीच कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने युवाओं के रोजगार, पेपर लीक, भर्ती में देरी और परीक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार पर बेहद तीखा हमला बोला। ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में राहुल गांधी ने कहा कि देश का युवा वर्षों तक पढ़ता है, परिवार अपनी कमाई शिक्षा पर खर्च करता है, लेकिन अंत में उसके हाथ में ऐसा प्रमाणपत्र आता है जिससे रोजगार की गारंटी नहीं मिलती। उन्होंने आरोप लगाया कि युवाओं के सामने रोजगार के दरवाजे लगातार बंद किए जा रहे हैं और दूसरी ओर उनका डेटा बड़ी कंपनियों के लिए इस्तेमाल हो रहा है।
‘दर्द आपका, डेटा आपका और दौलत इनकी’
राहुल गांधी ने अपने संबोधन की शुरुआत ‘दर्द, डेटा और दौलत’ से की। उन्होंने कहा कि भारत में करीब 40 करोड़ युवा देश की सबसे बड़ी ताकत हैं और 21वीं सदी की अर्थव्यवस्था में युवाओं की शक्ति तथा उनका डेटा निर्णायक भूमिका निभाएगा।
उन्होंने आरोप लगाया कि युवाओं का डेटा उनके पास है, उनकी मेहनत और दर्द भी उन्हीं का है, लेकिन आर्थिक लाभ बड़ी कंपनियों को मिल रहा है। राहुल गांधी ने BJP और RSS पर कॉरपोरेट हितों के लिए व्यवस्था चलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि युवाओं को शिक्षा और रोजगार के बजाय ऐसी व्यवस्था का सामना करना पड़ रहा है जिसमें उनके सामने अवसर लगातार कम होते जा रहे हैं।
‘डिग्री है, लेकिन नौकरी नहीं’
राहुल गांधी ने कहा कि आज देश में डिग्री हासिल करना अपने आप में रोजगार की गारंटी नहीं रह गया है। उन्होंने युवाओं की स्थिति को उस चक्रव्यूह से जोड़कर पेश किया जिसमें छात्र वर्षों तक पढ़ाई करते हैं, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, फीस और कोचिंग पर परिवार का पैसा खर्च होता है, लेकिन भर्ती निकलने के बाद परीक्षा, परिणाम और नियुक्ति तक की प्रक्रिया वर्षों खिंच जाती है।
उन्होंने दावा किया कि 1,000 युवाओं में केवल 12 को पक्की नौकरी मिलती है। साथ ही उन्होंने सरकारी और सार्वजनिक क्षेत्र में रोजगार के अवसरों में कथित कमी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि 2014 में PSU क्षेत्र में करीब 14 लाख नौकरियां थीं, जो 2024 में घटकर करीब 7 लाख रह गईं। इन आंकड़ों की स्वतंत्र और आधिकारिक स्रोतों से पुष्टि किया जाना जरूरी है।
‘रील बनाओ, Blinkit-Uber में काम करो, लेकिन नौकरी मत मांगो’
राहुल गांधी ने युवाओं को रील और कंटेंट की दुनिया में उलझाने को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने सोशल मीडिया रील्स को ‘21वीं सदी का नया नशा’ बताया और कहा कि युवाओं से कहा जा रहा है कि रील बनाइए, कंटेंट बनाइए, Blinkit या Uber में काम कीजिए, लेकिन स्थायी रोजगार के सवाल का जवाब नहीं दिया जा रहा।
इसी दौरान उन्होंने एक युवा का वीडियो भी दिखाया, जिसमें युवक ने बताया कि वह 10 घंटे Blinkit में काम करने के बाद पढ़ाई करता है और इसके बावजूद अगर पेपर लीक हो जाए तो उसकी मेहनत बेकार हो जाती है।
राहुल गांधी ने कहा कि यह सिर्फ नौकरी का सवाल नहीं, बल्कि उस युवा के सम्मान और भविष्य का सवाल है।
‘अमीर पर्चा खरीदता है, गरीब की मेहनत हारती है’
पेपर लीक को राहुल गांधी ने युवाओं के भविष्य पर सीधा हमला बताया। उन्होंने कहा कि एक छात्र वर्षों तक मेहनत करता है, लेकिन यदि कोई पैसे के बल पर परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र हासिल कर लेता है तो मेहनत करने वाले गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चों के साथ अन्याय होता है।
उन्होंने छात्रों से कहा कि परीक्षा व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिसमें पैसे, पहुंच और राजनीतिक प्रभाव के बजाय केवल योग्यता निर्णायक हो।
छात्र ने सुनाई अपनी कहानी—‘2018 से तैयारी कर रहा हूं’
कार्यक्रम में छात्रों को मंच पर बुलाकर राहुल गांधी ने उनकी समस्याएं सुनीं। एक छात्र ने उत्तर प्रदेश की पुलिस भर्ती और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की शिकायत की। उसने स्कोर कार्ड जारी न किए जाने और चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया।
एक अन्य छात्र ने बताया कि वह 2018 से शिक्षक भर्ती की तैयारी कर रहा है। छात्रों ने कहा कि सरकार के पास पद होने के बावजूद समय पर भर्ती नहीं होती और परीक्षा के बाद परिणाम आने में भी वर्षों लग जाते हैं।
छात्रों ने मांग की कि प्रत्येक सरकारी भर्ती के लिए वार्षिक भर्ती कैलेंडर जारी हो और परीक्षा से नियुक्ति तक की पूरी प्रक्रिया की समयसीमा तय की जाए।
‘नॉर्मलाइजेशन पेपर लीक से बड़ा घोटाला’—छात्र का आरोप
कार्यक्रम में एक छात्र ने नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए और दावा किया कि ‘नॉर्मलाइजेशन पेपर लीक से बड़ा घोटाला है।’
यह छात्र का आरोप है, किसी जांच का स्थापित निष्कर्ष नहीं। अलग-अलग शिफ्ट में आयोजित परीक्षाओं में कठिनाई के स्तर के अंतर को संतुलित करने के लिए नॉर्मलाइजेशन की व्यवस्था की जाती है। छात्रों का सवाल मुख्य रूप से इसकी गणना और प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर है।
पेपर लीक के कई मामलों का छात्रों ने किया जिक्र
छात्रों ने उत्तर प्रदेश में भर्ती परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं के कई मामलों का उल्लेख किया। इनमें 2017 की दरोगा भर्ती, 2018 की कांस्टेबल भर्ती, 2020-21 की SI भर्ती, 2022 की लेखपाल भर्ती, 2023 की RO/ARO भर्ती और 2023 की कांस्टेबल भर्ती शामिल हैं।
छात्रों का आरोप है कि लगातार सामने आने वाली ऐसी घटनाओं ने परीक्षा व्यवस्था पर उनका भरोसा कमजोर किया है। इन सभी मामलों की स्थिति अलग-अलग है और प्रत्येक मामले में आरोप, जांच और कानूनी निष्कर्षों को अलग-अलग देखना जरूरी है।
‘रोजगार के सारे दरवाजे बंद’—मैन्युफैक्चरिंग पर भी वार
राहुल गांधी ने रोजगार संकट को केवल सरकारी भर्ती तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता पर सवाल उठाते हुए कहा कि चीन और वियतनाम जैसे देशों में उत्पादन और रोजगार के अवसर दिखाई देते हैं, जबकि भारत में युवाओं को पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहे।
उन्होंने नोटबंदी और आर्थिक नीतियों को छोटे कारोबार और रोजगार से जोड़ते हुए सरकार पर हमला किया। उनका आरोप था कि छोटे कारोबारियों और युवाओं को बैंक से पूंजी हासिल करने में मुश्किल होती है, जबकि बड़े कॉरपोरेट समूहों को बड़े पैमाने पर वित्तीय संसाधन उपलब्ध होते हैं।
‘AI भी रोजगार का दरवाजा बंद कर सकता है’
राहुल गांधी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को भी आने वाले समय में रोजगार के लिए चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि यदि देश में नई नौकरियां पैदा नहीं हुईं और तकनीक का लाभ व्यापक स्तर पर नहीं पहुंचा, तो युवाओं के लिए रोजगार का संकट और गहरा सकता है।
उनका कहना था कि भारत को ऐसी अर्थव्यवस्था चाहिए जिसमें युवा केवल डेटा का स्रोत या सस्ता श्रम नहीं, बल्कि उत्पादन, नवाचार और आर्थिक विकास के केंद्र में हों।
‘हम छात्र हैं, प्रोटेस्टर नहीं’—युवाओं की कार्रवाई पर सवाल
प्रयागराज में राहुल गांधी ने छात्रों के आंदोलन और उनके खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने 20 जुलाई को दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई कार्रवाई का हवाला देते हुए कहा कि अपने अधिकारों और रोजगार की मांग उठाने वाले युवाओं के साथ दमन नहीं होना चाहिए।
उन्होंने बिहार में छात्रों के प्रदर्शनों को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उनके मुताबिक, छात्रों को कथित तौर पर हिरासत में लिया गया और प्रदर्शन के दौरान बल प्रयोग हुआ। उन्होंने सीवान में एक प्रदर्शन के दौरान AK-47 से फायरिंग में छात्रों के घायल होने का भी जिक्र किया। इन घटनाओं से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और आधिकारिक जांच की स्थिति अलग से देखी जानी चाहिए।
राहुल गांधी का संदेश था कि युवा अपने अधिकारों की आवाज उठाए, लेकिन नफरत और हिंसा का रास्ता न अपनाए।
‘हमें नफरत से नहीं, मोहब्बत से लड़ना है’
राहुल गांधी ने छात्रों से कहा कि भारत की ताकत उसकी सत्य और अहिंसा की परंपरा है। उन्होंने युवाओं से नफरत और हिंसा से दूर रहने की अपील की।
उन्होंने कहा कि युवाओं को ‘मोहब्बत की दुकान’ खोलनी है और प्यार के साथ भ्रष्ट व्यवस्था के खिलाफ लड़ना है। उनका कहना था कि जो युवा अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं, वे अकेले नहीं हैं।
‘आप भारत की आत्मा और भविष्य हैं’
राहुल गांधी ने युवाओं से कहा कि वे भारत की आत्मा और भविष्य हैं। उन्होंने युवाओं को दुनिया के सबसे प्रतिभाशाली युवाओं में बताते हुए कहा कि उन्हें खुद को नफरत और हिंसा में नहीं फंसने देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि देश को बदलने की क्षमता युवाओं में है और डर के बजाय लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाना जरूरी है।
प्रयागराज—ज्ञान के शहर से रोजगार के सवाल तक
राहुल गांधी ने प्रयागराज से अपने पुराने पारिवारिक संबंध का जिक्र करते हुए कहा कि उनके परिवार का घर प्रयागराज में रहा है और इस शहर को ज्ञान का केंद्र माना जाता था। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय की पुरानी प्रतिष्ठा का उल्लेख करते हुए कहा कि कभी यह देश के बेहतरीन विश्वविद्यालयों में गिना जाता था।
उन्होंने सवाल उठाया कि जिस शहर की पहचान ज्ञान और शिक्षा से रही हो, वहां आज युवा रोजगार और भर्ती के लिए आंदोलन करने को मजबूर क्यों हैं।
बारिश के बीच छात्रों की बड़ी मौजूदगी
कार्यक्रम से पहले हुई भारी बारिश के कारण केपी ग्राउंड में जलभराव और कीचड़ हो गया था। कार्यक्रम स्थल को तैयार करने के लिए पानी निकाला गया, चूना और बालू डाला गया तथा मशीनों से जमीन को समतल किया गया। इसके बावजूद बड़ी संख्या में छात्र कार्यक्रम में पहुंचे।
बारिश के बीच जुटी यह भीड़ राहुल गांधी के लिए राजनीतिक संदेश से ज्यादा युवाओं के रोजगार और भर्ती संकट को लेकर बढ़ती बेचैनी का प्रतीक बनकर सामने आई।
रोजगार का सवाल अब सियासी चक्रव्यूह के केंद्र में
प्रयागराज में राहुल गांधी ने छात्रों के सवालों को केवल परीक्षा और नौकरी तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने पेपर लीक से लेकर डेटा, बेरोजगारी से लेकर मैन्युफैक्चरिंग, गिग इकॉनमी से लेकर AI और सरकारी नौकरियों से लेकर सार्वजनिक क्षेत्र तक पूरे आर्थिक ढांचे पर सवाल खड़े किए।
उनका आरोप है कि युवा पढ़ रहा है, परिवार खर्च कर रहा है, परीक्षा दे रहा है और वर्षों इंतजार कर रहा है—लेकिन व्यवस्था उसे स्थायी रोजगार का भरोसा नहीं दे पा रही।
‘छात्रों की गूंज’ का सबसे बड़ा सवाल यही रहा—आखिर पढ़ाई, मेहनत और डिग्री के बाद नौकरी कहां है?
राहुल गांधी ने इसी सवाल को राजनीतिक हथियार बनाते हुए कहा कि युवाओं का डेटा उनका है, उनकी क्षमता उनकी है, उनका दर्द उनका है—तो फिर दौलत और अवसर किसी और के हिस्से में क्यों जाएं?
प्रयागराज से उठी यह आवाज अब केवल एक कार्यक्रम की आवाज नहीं रह गई है। पेपर लीक, भर्ती में देरी, रोजगार की कमी और परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता का सवाल आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश ही नहीं, राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में भी दिखाई दे सकता है।




