राष्ट्रीय/शिक्षा | ABC NATIONAL NEWS | 8 अगस्त 2026
NEET-UG 2026 में कथित पेपर लीक मामले की जांच में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की चार्जशीट ने परीक्षा की गोपनीयता और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। जांच के मुताबिक, परीक्षा से पहले गोपनीय प्रश्नों की जानकारी कथित तौर पर अंदरूनी सूत्रों के जरिए बिचौलियों, कोचिंग संचालकों और अभ्यर्थियों से जुड़े दलालों तक पहुंची। इसके बाद इस सामग्री को कथित रूप से कॉपी, प्रिंट और अलग-अलग माध्यमों से अभ्यर्थियों तक पहुंचाया गया।
22 लाख से अधिक छात्रों ने दी थी परीक्षा
NEET-UG 2026 की परीक्षा 3 मई को 5,432 केंद्रों पर 565 शहरों में आयोजित की गई थी। इसमें 22 लाख से अधिक अभ्यर्थी शामिल हुए थे। परीक्षा 13 भाषाओं में आयोजित की गई थी। परीक्षा समाप्त होने के कुछ दिनों बाद NTA को ऐसी PDF के बारे में जानकारी मिली जिसमें सैकड़ों प्रश्न मौजूद थे और उनमें से कई प्रश्न वास्तविक परीक्षा के प्रश्नपत्र से मेल खाते पाए गए।
मामला सामने आने के बाद देश के कई हिस्सों में छात्रों ने प्रदर्शन किया और परीक्षा की निष्पक्षता तथा प्रश्नपत्र की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे। इसके बाद केंद्र सरकार ने मामले की जांच CBI को सौंप दी।
कथित तौर पर अंदर से बाहर तक पहुंचा प्रश्नपत्र
CBI की चार्जशीट के अनुसार, जांच में ऐसा कथित नेटवर्क सामने आया जिसमें परीक्षा से जुड़ी गोपनीय जानकारी पहले ऐसे लोगों तक पहुंची जो उसे आगे प्रसारित करने में सक्षम थे। इसके बाद बिचौलियों, कोचिंग संचालकों और अभ्यर्थियों से जुड़े लोगों के माध्यम से इस सामग्री को आगे पहुंचाने का आरोप है।
जांच के मुताबिक, कथित तौर पर चोरी की गई सामग्री को दोबारा तैयार कर प्रिंट किया गया और फिर पैसे लेकर चुनिंदा अभ्यर्थियों तक पहुंचाया गया। यानी मामला केवल प्रश्नपत्र की चोरी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके बाद कथित रूप से बिचौलियों और लाभार्थियों का एक पूरा नेटवर्क सक्रिय था।
सिर्फ पेपर लीक नहीं, पूरी परीक्षा व्यवस्था पर सवाल
NEET जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में कथित पेपर लीक का असर केवल कुछ अभ्यर्थियों तक सीमित नहीं रहता। इसका सीधा असर उन लाखों छात्रों पर पड़ता है जो वर्षों की मेहनत, कोचिंग और आर्थिक संसाधन लगाने के बाद परीक्षा में शामिल होते हैं।
ऐसे में असली सवाल यह है कि परीक्षा की गोपनीय सामग्री सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी वाली व्यवस्था में कथित सेंध कहां लगी और किस स्तर पर सुरक्षा प्रोटोकॉल विफल हुए।
22 लाख छात्रों के भरोसे का सवाल
NEET-UG देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में से एक है। मेडिकल कॉलेज में प्रवेश का सपना देखने वाले लाखों छात्रों के लिए यह परीक्षा उनके करियर का निर्णायक पड़ाव होती है।
यदि कुछ लोगों को प्रश्नपत्र पहले मिल जाता है और वे उसका आर्थिक लाभ उठाते हैं, तो यह केवल परीक्षा नियमों का उल्लंघन नहीं बल्कि मेहनत और समान अवसर के सिद्धांत पर सीधा प्रहार है।
CBI जांच से सामने आएगा नेटवर्क कितना बड़ा था
चार्जशीट में कथित तौर पर अंदरूनी सूत्रों, बिचौलियों, कोचिंग संचालकों और अभ्यर्थियों के बीच संपर्क की जांच का उल्लेख महत्वपूर्ण है। अब जांच का अगला सवाल यह है कि इस नेटवर्क में कितने लोग शामिल थे, गोपनीय सामग्री किस स्तर से बाहर निकली, कितने अभ्यर्थियों को इसका लाभ मिला और इसके बदले कितने पैसे का लेन-देन हुआ।
जांच एजेंसी के सामने यह भी महत्वपूर्ण चुनौती है कि प्रत्येक आरोपी की भूमिका को ठोस डिजिटल, दस्तावेजी और वित्तीय साक्ष्यों के आधार पर स्थापित किया जाए।
परीक्षा सुरक्षा व्यवस्था में बड़े सुधार की जरूरत
NEET-UG मामले ने यह सवाल भी सामने रखा है कि इतनी बड़ी परीक्षा में प्रश्नपत्र की सुरक्षा को केवल बंद कमरों और सीलबंद पैकेटों तक सीमित रखना पर्याप्त नहीं है। डिजिटल संचार, प्रिंटिंग, लॉजिस्टिक्स, परीक्षा केंद्रों और मानव संसाधन—हर स्तर पर सुरक्षा की जरूरत है।
भविष्य में प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर परीक्षा केंद्र तक पहुंचने और परीक्षा शुरू होने तक प्रत्येक चरण की एंड-टू-एंड ऑडिटिंग और डिजिटल ट्रैकिंग जरूरी होगी। संवेदनशील स्तरों पर काम करने वाले कर्मचारियों की पृष्ठभूमि जांच, सीमित पहुंच और कड़ी जवाबदेही भी सुनिश्चित करनी होगी।
सबसे जरूरी है छात्रों का भरोसा लौटाना
NEET विवाद का सबसे बड़ा नुकसान केवल परीक्षा प्रक्रिया को नहीं, बल्कि छात्रों के भरोसे को हुआ है। लाखों अभ्यर्थियों को यह भरोसा होना चाहिए कि उनकी मेहनत किसी संगठित पेपर लीक नेटवर्क के सामने बेकार नहीं जाएगी।
CBI की जांच और अदालत की प्रक्रिया को अपना काम करने देना जरूरी है, लेकिन इसके साथ परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं को भी अपनी सुरक्षा व्यवस्था की कमियों की पहचान कर उन्हें दूर करना होगा।
NEET-UG पेपर लीक मामला अब केवल एक आपराधिक जांच नहीं रह गया है। यह देश की परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता, समान अवसर और लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा सवाल बन चुका है। CBI की चार्जशीट ने कथित नेटवर्क की तस्वीर का एक हिस्सा सामने रखा है; अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि इस नेटवर्क की पूरी कड़ी कहां तक जाती है और परीक्षा व्यवस्था में ऐसी सेंध दोबारा न लगे, इसके लिए जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होती है।




