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पश्चिम एशिया में तेल टैंकरों पर सबसे बड़ा खतरा: होर्मुज के बाद लाल सागर भी संकट में

ईरान युद्ध के बाद Strait of Hormuz से जहाजों की आवाजाही 100 से घटकर करीब 8-11 प्रतिदिन; अब हूती हमलों से Red Sea का वैकल्पिक रास्ता भी असुरक्षित, विशेषज्ञों ने कहा—‘एक समस्या के ऊपर दूसरी समस्या’

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | लंदन | 4 अगस्त 2026

पश्चिम एशिया में जारी ईरान युद्ध ने दुनिया की तेल सप्लाई के लिए गंभीर समुद्री संकट खड़ा कर दिया है। जहाजरानी विशेषज्ञों के मुताबिक, युद्ध शुरू होने के बाद से तेल ले जाने वाले टैंकरों के लिए खतरा अब अपने सबसे गंभीर स्तर पर पहुंच गया है। पहले Strait of Hormuz में आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई और अब लाल सागर में हूती हमलों ने उस वैकल्पिक मार्ग को भी जोखिम में डाल दिया है, जिसका इस्तेमाल कई जहाज होर्मुज से बचने के लिए कर रहे थे।

शिप-ट्रैकिंग कंपनी Kpler के आंकड़ों के अनुसार युद्ध से पहले Strait of Hormuz से प्रतिदिन 100 से अधिक जहाज गुजरते थे। लेकिन रविवार को यह संख्या घटकर सिर्फ 8 और शनिवार को 11 रह गई। युद्ध से पहले दुनिया के तेल और गैस का करीब 20 प्रतिशत इसी सामरिक जलमार्ग से गुजरता था।

होर्मुज से बचने का रास्ता भी खतरे में

ईरान द्वारा Strait of Hormuz को बाधित किए जाने के बाद सऊदी अरब से तेल ले जाने वाले कुछ जहाज लाल सागर के रास्ते जाने लगे थे। लेकिन अब यमन के ईरान समर्थित हूती लड़ाकों द्वारा सऊदी टैंकरों को निशाना बनाए जाने से यह मार्ग भी गंभीर जोखिम में आ गया है।

हूतियों ने 20 जुलाई को सऊदी अरब के Red Sea बंदरगाहों की नाकेबंदी की घोषणा की थी। इसके बाद क्षेत्र में जहाजों पर कई हमलों की सूचना सामने आई है।

Kpler के विश्लेषक Matthew Wright के मुताबिक कच्चे तेल के व्यापार के लिहाज से मौजूदा स्थिति इस संकट की शुरुआत के बाद से सबसे खराब दौर में पहुंच गई है। उनके अनुसार होर्मुज पहले ही तेल प्रवाह को सीमित कर रहा था और अब बाजार को संतुलित रखने वाला वैकल्पिक मार्ग भी खतरे में है।

पहचान छिपाने के लिए ‘अंधेरे’ में चल रहे जहाज

खतरे का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि कई जहाज Strait of Hormuz पार करते समय अपने transponders बंद कर रहे हैं, जिसे जहाजरानी की भाषा में “going dark” कहा जाता है। ऐसा जहाज की इलेक्ट्रॉनिक पहचान और लोकेशन को पकड़ना कठिन बनाने के लिए किया जाता है।

Bab el-Mandeb Strait से शनिवार को 28 कमोडिटी जहाज गुजरे और Kpler के मुताबिक उनमें से छह ने अपने transponders बंद कर रखे थे।

एशिया के लिए कच्चा तेल लोड करके निकलने वाले जहाजों की संख्या भी गिरकर करीब चार प्रतिदिन रह गई है, जिसे Kpler ने युद्ध शुरू होने के बाद का सबसे निचला स्तर बताया।

वैश्विक सप्लाई चेन पर बढ़ा दबाव

टैंकर मालिकों के अंतरराष्ट्रीय संगठन Intertanko के प्रबंध निदेशक Tim Wilkins के अनुसार जहाजरानी उद्योग अब तेजी से फैलती, बिगड़ती और अधिक जटिल होती सुरक्षा स्थिति का सामना कर रहा है। उच्च जोखिम वाला क्षेत्र सऊदी जलक्षेत्र से लेकर लाल सागर के हिस्सों तक फैल रहा है।

इसका सीधा असर केवल तेल टैंकरों पर नहीं, बल्कि वैश्विक माल ढुलाई, बीमा लागत, जहाजों के रूट और ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है।

होर्मुज खुल भी गया तो तुरंत सामान्य नहीं होगी सप्लाई

वैश्विक शिपिंग कंपनी Hapag-Lloyd का कहना है कि उसके कुछ जहाज अभी भी लाल सागर से गुजर रहे हैं और कंपनी लगातार स्थिति की निगरानी कर रही है।

लेकिन Strait of Hormuz दोबारा खुलने पर भी हालात तत्काल सामान्य होने की संभावना नहीं है। कंपनी के मुताबिक कई सेवाएं निलंबित की जा चुकी हैं और जहाजों को दूसरे क्षेत्रों में भेजा गया है। सामान्य कार्गो प्रवाह बहाल होने में तीन से चार महीने तक लग सकते हैं।

ईरान-अमेरिका समझौते पर अनिश्चितता

इस बीच Strait of Hormuz को दोबारा सामान्य यातायात के लिए खोलने को लेकर कूटनीतिक गतिविधियां जारी हैं। ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे से इनकार किया है कि अमेरिका और ईरान के बीच सीधी बातचीत चल रही है। हालांकि तेहरान ने कहा है कि वह ओमान के साथ जलमार्ग की सुरक्षा को लेकर बातचीत कर रहा है।

ईरान ने यह भी संकेत दिया है कि जब तक अमेरिकी “आक्रामकता” जारी रहती है, मौजूदा प्रतिबंध समाप्त करने वाला कोई समझौता तत्काल होने वाला नहीं है।

तेल बाजार में भारी उतार-चढ़ाव

भू-राजनीतिक तनाव के बीच तेल बाजार भी बेहद संवेदनशील बना हुआ है। संभावित बातचीत के मद्देनजर ट्रंप द्वारा ईरान पर प्रस्तावित हमले रद्द करने की बात कहने के बाद Brent crude करीब 4.4 प्रतिशत गिरकर 84.05 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। दिन में एक समय इसकी कीमत करीब 7.3 प्रतिशत गिरकर 81.55 डॉलर तक पहुंच गई थी।

मौजूदा संकट की सबसे बड़ी चिंता यही है कि दुनिया के ऊर्जा व्यापार के दो बेहद महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते—Strait of Hormuz और Red Sea-Bab el-Mandeb corridor—एक साथ असुरक्षित हो रहे हैं। यदि स्थिति और बिगड़ती है तो इसका असर पश्चिम एशिया तक सीमित न रहकर तेल की कीमतों, परिवहन लागत, महंगाई और वैश्विक अर्थव्यवस्था तक पहुंच सकता है।

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