खेल | ABC NATIONAL NEWS | ग्लासगो | 1 अगस्त 2026
ट्रिपल जंप में भारत को एक साथ दो पदक
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय एथलेटिक्स के लिए शनिवार का दिन शानदार रहा। पुरुषों की ट्रिपल जंप स्पर्धा में भारत के प्रवीण चिथरावेल ने रजत पदक, जबकि युवा एथलीट सेल्वा प्रभु ने कांस्य पदक जीतकर देश को एक ही स्पर्धा में दो पदक दिलाए। ग्लासगो में हुए मुकाबले में दोनों भारतीय खिलाड़ियों ने दबाव के बीच बेहतरीन प्रदर्शन किया और पोडियम पर जगह बनाई। प्रवीण के लिए यह पदक इसलिए भी बेहद खास है क्योंकि चार साल पहले बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में वह महज तीन सेंटीमीटर के अंतर से पदक जीतने से चूक गए थे। वहीं 21 वर्षीय सेल्वा प्रभु के लिए यह कॉमनवेल्थ गेम्स का यादगार पदार्पण रहा, जहां उन्होंने अपने पांचवें और अंतिम से पहले प्रयास में 16.52 मीटर की छलांग लगाकर कांस्य पदक सुनिश्चित किया।
2022 का दर्द पीछे छोड़ प्रवीण ने आखिर जीत लिया पदक
प्रवीण चिथरावेल के लिए ग्लासगो का यह रजत पदक सिर्फ एक और उपलब्धि नहीं, बल्कि चार साल पुराने दर्द का जवाब भी है। बर्मिंघम में 2022 के कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान प्रवीण ने 16.89 मीटर की शानदार छलांग लगाई थी, लेकिन इसके बावजूद वह केवल तीन सेंटीमीटर के मामूली अंतर से पदक से चूक गए थे। वह चौथे स्थान पर रहे और पोडियम तक नहीं पहुंच सके। उस समय निराशा इसलिए और बड़ी थी क्योंकि भारत ट्रिपल जंप में ऐतिहासिक प्रदर्शन कर रहा था। उनके साथी एल्डोस पॉल ने स्वर्ण और अब्दुल्ला अबूबकर ने रजत पदक जीतकर भारत को पहले दो स्थान दिलाए थे। यदि प्रवीण केवल तीन सेंटीमीटर और आगे छलांग लगा देते तो भारत उस स्पर्धा में ऐतिहासिक क्लीन स्वीप कर सकता था। चार वर्षों तक उस करीबी हार की याद उनके साथ रही, लेकिन ग्लासगो में उन्होंने आखिरकार पदक जीतकर उस अधूरी कहानी को काफी हद तक पूरा कर दिया।
सेल्वा प्रभु का डेब्यू बना यादगार, पांचवें प्रयास ने दिलाया कांस्य
21 वर्षीय सेल्वा प्रभु के लिए ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स का अनुभव जिंदगी भर याद रहने वाला है। अपने पहले ही कॉमनवेल्थ गेम्स में उन्होंने पुरुष ट्रिपल जंप के फाइनल में कांस्य पदक जीतकर भारतीय एथलेटिक्स में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा दी। NCAA चैंपियन सेल्वा ने मुकाबले के पांचवें और अंतिम से पहले प्रयास में 16.52 मीटर की छलांग लगाई, जिसने उन्हें पोडियम पर पहुंचा दिया। बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहली बार उतरने वाले किसी युवा खिलाड़ी के लिए दबाव के बीच अंतिम चरण में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन निकालना आसान नहीं होता, लेकिन सेल्वा ने धैर्य बनाए रखा और निर्णायक समय पर वह छलांग लगाई जिसकी उन्हें जरूरत थी। उनका यह कांस्य केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं बल्कि भारतीय ट्रिपल जंप के भविष्य के लिए भी उत्साहजनक संकेत है।
2022 में गोल्ड-सिल्वर, 2026 में फिर भारत के दो खिलाड़ी पोडियम पर
भारतीय पुरुष ट्रिपल जंप ने लगातार दूसरे कॉमनवेल्थ गेम्स में अपनी ताकत दिखाई है। बर्मिंघम 2022 में एल्डोस पॉल और अब्दुल्ला अबूबकर ने क्रमशः स्वर्ण और रजत पदक जीतकर इतिहास रचा था, जबकि प्रवीण बेहद मामूली अंतर से कांस्य से चूक गए थे। अब चार साल बाद ग्लासगो में एक बार फिर दो भारतीय खिलाड़ियों ने पोडियम पर जगह बनाई है। इस बार प्रवीण चिथरावेल ने रजत पदक जीतकर अपना अधूरा सपना पूरा किया और युवा सेल्वा प्रभु ने कांस्य जीतकर भारतीय ट्रिपल जंप की नई पीढ़ी की ताकत दिखाई। लगातार दो कॉमनवेल्थ गेम्स में इस स्पर्धा में एक से अधिक भारतीय खिलाड़ियों का पोडियम तक पहुंचना इस बात का संकेत है कि ट्रिपल जंप अब भारतीय एथलेटिक्स की मजबूत स्पर्धाओं में अपनी जगह बना रहा है।
तीन सेंटीमीटर की कसक से सिल्वर मेडल तक प्रवीण का सफर
खेल में कई बार कुछ सेंटीमीटर या कुछ सेकंड किसी खिलाड़ी के वर्षों के संघर्ष और सपने के बीच खड़े हो जाते हैं। प्रवीण के लिए 2022 में वे तीन सेंटीमीटर ऐसी ही दूरी थे। 16.89 मीटर की छलांग लगाने के बावजूद खाली हाथ लौटना और उसी स्पर्धा में अपने दो भारतीय साथियों को स्वर्ण और रजत जीतते देखना उनके लिए गर्व और निराशा दोनों का क्षण रहा होगा। लेकिन शीर्ष स्तर के खिलाड़ी की पहचान यही होती है कि वह निराशा को अंत नहीं बनने देता। ग्लासगो में प्रवीण ने चार साल पुराने परिणाम को पीछे छोड़ते हुए इस बार पोडियम पर अपना स्थान सुनिश्चित किया। उनका रजत पदक इस मायने में खास है कि इसके पीछे केवल एक दिन का प्रदर्शन नहीं बल्कि पिछली हार की कसक, वर्षों की तैयारी और दोबारा उसी मंच पर खुद को साबित करने का जज्बा जुड़ा है।
भारतीय ट्रिपल जंप की नई पीढ़ी ने जगाई बड़ी उम्मीद
प्रवीण और सेल्वा का एक साथ पोडियम पर पहुंचना भारतीय एथलेटिक्स के लिए बड़ी उपलब्धि है। एक ओर प्रवीण जैसे अनुभवी अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी का लगातार शीर्ष स्तर पर बने रहना महत्वपूर्ण है, वहीं दूसरी ओर केवल 21 साल की उम्र में सेल्वा प्रभु का कॉमनवेल्थ पोडियम तक पहुंचना भविष्य के लिए बड़ी उम्मीद पैदा करता है। NCAA चैंपियन के रूप में सेल्वा पहले ही अपनी प्रतिभा का परिचय दे चुके थे, लेकिन कॉमनवेल्थ गेम्स जैसे बहु-खेल अंतरराष्ट्रीय आयोजन में पदक जीतना उनके करियर को नई पहचान देता है। यदि उन्हें आगे सही प्रशिक्षण, अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं का अनुभव और निरंतर समर्थन मिलता रहा तो आने वाले वर्षों में वह भारत के लिए और बड़े मंचों पर पदक के मजबूत दावेदार बन सकते हैं।
ग्लासगो में भारतीय एथलेटिक्स का दम, एक इवेंट से आए दो मेडल
कॉमनवेल्थ गेम्स में एक ही स्पर्धा से दो पदक आना किसी भी देश के लिए बड़ी उपलब्धि होती है और पुरुष ट्रिपल जंप में प्रवीण चिथरावेल तथा सेल्वा प्रभु ने भारत के लिए यही किया। प्रवीण का रजत चार साल पुराने अधूरे सपने को पूरा करने की कहानी है तो सेल्वा का कांस्य भारतीय एथलेटिक्स के नए सितारे के उभरने की कहानी। बर्मिंघम 2022 में भारत ने इसी स्पर्धा में गोल्ड और सिल्वर जीता था और अब ग्लासगो 2026 में सिल्वर और ब्रॉन्ज ने उस शानदार परंपरा को आगे बढ़ाया है। चार साल पहले तीन सेंटीमीटर से पोडियम चूकने वाले प्रवीण इस बार पदक लेकर लौटेंगे, जबकि 21 वर्षीय सेल्वा अपने पहले ही कॉमनवेल्थ गेम्स से कांस्य लेकर घर जाएंगे—भारतीय ट्रिपल जंप के लिए इससे बेहतर संदेश शायद ही हो सकता था।




