राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 1 अगस्त 2026
राष्ट्रपति की मुहर, अब और सख्त होगा कानून
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 [Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill, 2026] को मंजूरी दे दी है। संसद के दोनों सदनों से इसी सप्ताह पारित होने के बाद कानून मंत्रालय ने 31 जुलाई को जारी गजट अधिसूचना में राष्ट्रपति की मंजूरी की जानकारी दी। संशोधित कानून का उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक और अनुचित साधनों के इस्तेमाल से जुड़े मामलों में कार्रवाई को अधिक सख्त और तेज बनाना है। लगातार सामने आते पेपर लीक के मामलों और इनके कारण लाखों युवाओं के भविष्य पर पड़ने वाले असर के बीच इस संशोधन को परीक्षा व्यवस्था में जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
पेपर लीक मामलों के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट
संशोधित कानून की सबसे महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं में राज्यों को पेपर लीक और सार्वजनिक परीक्षाओं में गड़बड़ी से जुड़े मामलों की तेजी से सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट स्थापित करने का अधिकार देना शामिल है। इसका मकसद ऐसे मामलों में मुकदमों के लंबे समय तक लंबित रहने की समस्या को कम करना और आरोपियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाना है। इसके साथ ही प्रश्नपत्र लीक जैसे अपराधों के लिए सजा को और कठोर करने का प्रावधान किया गया है। सरकार का जोर इस बात पर है कि पेपर लीक के मामलों में केवल जांच शुरू होना पर्याप्त न रहे, बल्कि जांच से लेकर सुनवाई और दोष सिद्ध होने पर सजा तक की पूरी प्रक्रिया तेजी से पूरी हो।
संसद के दोनों सदनों से मिल चुकी है मंजूरी
संशोधन विधेयक को राष्ट्रपति के पास भेजे जाने से पहले संसद के दोनों सदनों ने इसे पारित किया था। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद संशोधित प्रावधानों के कानून बनने का रास्ता साफ हो गया है। पेपर लीक के कारण परीक्षाएं रद्द होने, दोबारा परीक्षा कराने और पूरी परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल उठने से सबसे ज्यादा नुकसान उन विद्यार्थियों को होता है जो वर्षों तक मेहनत करके प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। ऐसे मामलों में एक पेपर लीक केवल परीक्षा व्यवस्था की गड़बड़ी नहीं होता, बल्कि लाखों अभ्यर्थियों के समय, पैसे, मेहनत और भविष्य पर सीधा असर डालता है।
संगठित पेपर लीक नेटवर्क पर शिकंजा कसने की कोशिश
नए प्रावधानों का जोर केवल परीक्षा में नकल करने वाले किसी एक अभ्यर्थी पर कार्रवाई करने तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रश्नपत्र लीक और संगठित तरीके से परीक्षा प्रणाली में सेंध लगाने वाले नेटवर्क के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई पर है। पेपर लीक के पीछे यदि संगठित गिरोह, बिचौलिए या व्यवस्था से जुड़े लोग शामिल हों तो केवल परीक्षा रद्द कर देना समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकता। ऐसे नेटवर्क की पहचान, जांच, मुकदमा और दोषियों को समय पर सजा देना जरूरी है। संशोधित कानून के जरिए सरकार जांच से लेकर न्यायिक प्रक्रिया तक को अधिक प्रभावी और तेज बनाने की कोशिश कर रही है, ताकि सार्वजनिक परीक्षाओं में विद्यार्थियों का भरोसा कायम रखा जा सके।
असली परीक्षा अब कानून के अमल की
कानून को सख्त करना महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन इसकी वास्तविक सफलता कागज पर लिखे कठोर प्रावधानों से नहीं बल्कि जमीन पर उनके प्रभावी अमल से तय होगी। सबसे बड़ा सवाल यही रहेगा कि जांच एजेंसियां पेपर लीक की जड़ और उसके पीछे सक्रिय नेटवर्क तक कितनी तेजी से पहुंचती हैं, दोषियों के खिलाफ कितने मजबूत सबूत जुटाए जाते हैं और फास्ट-ट्रैक अदालतों के जरिए मामलों का निपटारा वास्तव में कितनी जल्दी होता है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में अपने जीवन के महत्वपूर्ण वर्ष लगाने वाले युवाओं को केवल कठोर कानून का भरोसा नहीं, बल्कि ऐसी परीक्षा व्यवस्था चाहिए जिसमें प्रश्नपत्र सुरक्षित रहे, परीक्षा निष्पक्ष हो और किसी संगठित गिरोह, बिचौलिए या भ्रष्ट तंत्र के कारण उनकी वर्षों की मेहनत बेकार न जाए।




