राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 30 जुलाई 2026
जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन और उससे जुड़े घटनाक्रम को लेकर सरकार के रुख पर नए सवाल खड़े हो रहे हैं। एक ओर दिल्ली सरकार ने हाल ही में आंदोलन से जुड़े कई मामलों को वापस लेने और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को राहत देने की बात कही, वहीं दूसरी ओर उसी आंदोलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित अभद्र टिप्पणी करने वाली एक महिला के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू होने से राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
मामला 23 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व वाले प्रदर्शन से जुड़ा है। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो के आधार पर गाजियाबाद की एक वकील की शिकायत पर नोएडा के एक्सप्रेसवे थाने में जीरो एफआईआर दर्ज की गई, जिसे आगे की जांच के लिए नई दिल्ली के संसद मार्ग थाने को भेज दिया गया। महिला पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की उन धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है, जो जानबूझकर अपमान, सार्वजनिक शांति भंग करने वाले बयान और मानहानि से संबंधित हैं।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि महिला ने सार्वजनिक मंच से प्रधानमंत्री और उनके परिवार के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया, जिससे संवैधानिक पद की गरिमा को ठेस पहुंची और समाज में वैमनस्य फैलाने का प्रयास हुआ।
हालांकि, इस कार्रवाई ने केवल कानूनी नहीं बल्कि राजनीतिक बहस भी छेड़ दी है। विपक्षी दलों और कई सामाजिक कार्यकर्ताओं का सवाल है कि जब सरकार आंदोलन से जुड़े मामलों में नरमी और संवाद की बात कर रही है, तब विरोध प्रदर्शनों से जुड़े व्यक्तियों के खिलाफ नई एफआईआर दर्ज होना क्या उस संदेश के विपरीत नहीं है?
दूसरी ओर, सरकार समर्थकों का तर्क है कि लोकतंत्र में विरोध का अधिकार है, लेकिन किसी भी संवैधानिक पद या व्यक्ति के खिलाफ अभद्र और अपमानजनक भाषा का प्रयोग अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे में नहीं आता। उनके अनुसार, कानून के तहत कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध नहीं कहा जा सकता।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—क्या कानून का निष्पक्ष पालन हो रहा है, या फिर विरोध प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में चयनात्मक कार्रवाई की धारणा मजबूत हो रही है? आने वाले दिनों में जांच की दिशा और अदालतों का रुख इस बहस को और स्पष्ट करेगा।
नोट: यह समाचार उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी और पुलिस द्वारा साझा किए गए आधिकारिक विवरण पर आधारित है। मामले की जांच जारी है और आरोप अभी न्यायिक परीक्षण के अधीन हैं।)




