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कंगना-सौरव दास की जुबानी जंग तेज, CJP प्रवक्ता बोले- ‘चिल पिल लीजिए, बैठकर बात करते हैं’

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 29 जुलाई 2026

छात्र आंदोलन को लेकर भाजपा सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत तथा Cockroach Janta Party (CJP) के नेताओं के बीच जुबानी जंग लगातार तेज होती जा रही है। कंगना रनौत द्वारा CJP प्रवक्ता सौरव दास को “पूरी तरह बेकार” (Simply Useless) बताए जाने के बाद सौरव दास ने सोशल मीडिया के जरिए पलटवार करते हुए कहा, “कंगना, चिल पिल लीजिए… आइए बैठकर इस पर बात करते हैं।”

विवाद की शुरुआत तब हुई जब कंगना रनौत ने जंतर-मंतर से शुरू हुए छात्र आंदोलन और उससे जुड़े सोशल मीडिया पोस्टों की आलोचना करते हुए उन्हें “जनरेशन गटर” और “घृणा पैदा करने वाला” बताया था। इसके जवाब में सौरव दास ने कहा था कि न तो उनकी पार्टी के लोग और न ही Gen Z पीढ़ी कंगना रनौत को गंभीरता से लेती है।

सौरव दास की इस टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कंगना रनौत ने सोशल मीडिया पर लिखा कि उन्होंने सौरव के बारे में जानकारी जुटाई और पाया कि वह 28 वर्ष के हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि वह स्वयं को छात्र कैसे बताते हैं। कंगना ने कहा कि जब वह सौरव की उम्र की थीं, तब तक उन्हें दो राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिल चुके थे। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीति में वह नई हैं, लेकिन सार्वजनिक जीवन में दो दशक से सक्रिय हैं और कई जिम्मेदारियां निभा रही हैं।

कंगना ने सौरव दास पर व्यक्तिगत टिप्पणी करते हुए कहा कि वह “पूरी तरह बेकार और बेरोजगार” हैं तथा उन्हें पहले कोई कौशल सीखना चाहिए। उनके अनुसार, सौरव की आपत्तियां व्यक्तिगत हैं और उनका छात्र आंदोलन से कोई संबंध नहीं है।

इसके जवाब में सौरव दास ने अपने इंस्टाग्राम स्टोरी पर संक्षिप्त संदेश लिखते हुए कहा, “Yo Kangana, take a chill pill and let’s talk this out.” उन्होंने संकेत दिया कि व्यक्तिगत आरोपों के बजाय संवाद के जरिए मतभेद सुलझाए जाने चाहिए।

इस विवाद में CJP के एक अन्य प्रवक्ता आशुतोष रांका भी कूद पड़े। उन्होंने कंगना रनौत पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने आंदोलनकारियों को “कॉकरोच” और “गटर” कहा था, लेकिन यही छात्र आंदोलन सरकार के एक केंद्रीय मंत्री के इस्तीफे का कारण बना। यह टिप्पणी शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को लेकर CJP के राजनीतिक दावे के संदर्भ में की गई।

इससे पहले सौरव दास ने समाचार एजेंसी ANI से बातचीत में कहा था कि कंगना रनौत को उनकी अपनी पार्टी में भी गंभीरता से नहीं लिया जाता। उन्होंने दावा किया कि Gen Z और नई पीढ़ी भी उनके विचारों से खुद को नहीं जोड़ती। सौरव ने यह भी कहा कि सांसद बनने के बाद कंगना स्वयं सार्वजनिक रूप से स्वीकार कर चुकी हैं कि संसदीय जिम्मेदारियां उनकी अपेक्षा से कहीं अधिक कठिन हैं।

दूसरी ओर, कंगना रनौत का कहना है कि जंतर-मंतर के प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणियां अस्वीकार्य थीं और इसी कारण उन्होंने छात्र आंदोलन की आलोचना की थी।

छात्र आंदोलन को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब राजनीतिक मंच से निकलकर सोशल मीडिया पर व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप तक पहुंच गया है। दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम हैं और फिलहाल इस बयानबाजी के थमने के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं।

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