टेक्नोलॉजी | ABC NATIONAL NEWS | 29 जुलाई 2026
ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म Swiggy और Zomato पर रेस्तरां द्वारा AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से तैयार की गई खाने की तस्वीरों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। इससे ग्राहकों के लिए यह पहचानना मुश्किल होता जा रहा है कि ऐप पर दिखाई गई डिश वास्तव में वैसी ही है या केवल AI की मदद से बनाई गई आकर्षक तस्वीर है।
विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार ग्राहक ऐप पर दिखाई गई स्वादिष्ट और आकर्षक तस्वीर देखकर खाना ऑर्डर करते हैं, लेकिन डिलीवरी मिलने पर वास्तविक डिश तस्वीर से बिल्कुल अलग दिखाई देती है। इससे ग्राहकों में निराशा बढ़ रही है और ऑनलाइन फूड ऑर्डरिंग प्लेटफॉर्म की पारदर्शिता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
एक रिपोर्ट के अनुसार, Swiggy ऐप पर कई रेस्तरां नूडल्स, पिज्जा, पुलाव और अन्य व्यंजनों की AI-जनित तस्वीरों का उपयोग करते हुए पाए गए। इन तस्वीरों में खाना अत्यधिक चमकदार, बिल्कुल संतुलित और वास्तविकता से अधिक आकर्षक दिखाई देता है, जिससे ग्राहकों को भ्रम हो सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, Swiggy कुछ शर्तों के साथ रेस्तरां को AI-आधारित फूड इमेज का उपयोग करने की अनुमति देता है। वहीं Zomato ने इस मामले में अपेक्षाकृत सख्त नीति अपनाई है और प्लेटफॉर्म पर भ्रामक या पूरी तरह AI से तैयार तस्वीरों के इस्तेमाल को लेकर अधिक सतर्क रुख अपनाया है। इसके बावजूद कई ऐसी तस्वीरें प्लेटफॉर्म तक पहुंच जाती हैं जिन्हें पहली नजर में पहचानना आसान नहीं होता।
तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि AI इमेज जनरेशन तकनीक इतनी उन्नत हो चुकी है कि अब नकली और वास्तविक तस्वीरों के बीच अंतर करना आम उपभोक्ता के लिए लगातार कठिन होता जा रहा है। हालांकि कुछ तस्वीरों में असामान्य रूप से चमकदार बनावट, अत्यधिक परफेक्ट आकार या अवास्तविक रंग देखकर इनके AI से बने होने का अनुमान लगाया जा सकता है, लेकिन हर बार ऐसा संभव नहीं होता।
उपभोक्ता अधिकारों से जुड़े जानकारों का कहना है कि यदि किसी उत्पाद की तस्वीर वास्तविक वस्तु का सही प्रतिनिधित्व नहीं करती, तो यह ग्राहकों को भ्रमित कर सकती है। उनका सुझाव है कि फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म को स्पष्ट रूप से यह बताना चाहिए कि कौन-सी तस्वीर वास्तविक है और कौन-सी AI की मदद से तैयार की गई है। इससे ग्राहक अधिक जानकारी के आधार पर निर्णय ले सकेंगे।
रेस्तरां संचालकों का तर्क है कि पेशेवर फूड फोटोग्राफी महंगी होती है और AI की मदद से कम लागत में आकर्षक तस्वीरें तैयार की जा सकती हैं। वहीं आलोचकों का कहना है कि यदि तस्वीर और वास्तविक भोजन में बड़ा अंतर हो, तो इससे ग्राहक का भरोसा कमजोर हो सकता है।
तकनीक के बढ़ते उपयोग के बीच यह बहस भी तेज हो रही है कि AI का इस्तेमाल रचनात्मकता और मार्केटिंग तक सीमित रहे या उसके लिए स्पष्ट नियम बनाए जाएं। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म को AI-जनित तस्वीरों के लिए अलग लेबलिंग प्रणाली लागू करनी पड़ सकती है, ताकि ग्राहक यह जान सकें कि वे जो तस्वीर देख रहे हैं, वह वास्तविक है या डिजिटल रूप से तैयार की गई है।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि AI ने ऑनलाइन फूड मार्केटिंग का स्वरूप बदल दिया है। लेकिन इस बदलाव के बीच सबसे महत्वपूर्ण चुनौती ग्राहकों का विश्वास बनाए रखना है। यदि तस्वीर और वास्तविक भोजन के बीच का अंतर लगातार बढ़ता गया, तो इसका सबसे बड़ा नुकसान उन उपभोक्ताओं को होगा जो ऐप पर दिख रही तस्वीर के भरोसे अपना ऑर्डर करते हैं।




