राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 29 जुलाई 2026
मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर से जुड़े विवाद में बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष ने राज्य सरकार से कहा कि वह किसी भी तरह के दबाव या “धौंस” के आगे न झुके और अदालत के निर्देशों का पालन सुनिश्चित करे। मुस्लिम पक्ष ने यह भी कहा कि जुमे की नमाज़ के लिए वर्तमान में जो वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराया गया है, वह विवादित परिसर से काफी दूर है और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्देशों के अनुरूप नहीं है।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता हुजैफा अहमदी ने मुस्लिम पक्ष की ओर से दलीलें पेश कीं। उन्होंने कहा कि मस्जिद के संरक्षक काजी मोइनुद्दीन सहित याचिकाकर्ताओं की ओर से यह आग्रह किया गया है कि जिला प्रशासन ने नमाज़ के लिए जो स्थान निर्धारित किया है, वह विवादित परिसर से लगभग 1.3 किलोमीटर दूर है।
मुस्लिम पक्ष ने अदालत को याद दिलाया कि 14 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम व्यवस्था के रूप में राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि विवादित परिसर के निकट और उससे सटी हुई किसी खुली जगह की पहचान कर वहां जुमे की नमाज़ की व्यवस्था की जाए। उनका कहना था कि वर्तमान में उपलब्ध कराई गई जगह अदालत की भावना और निर्देशों के अनुरूप नहीं है।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर अपनी चिंता भी अदालत के सामने रखी। इस पर मुस्लिम पक्ष ने कहा कि प्रशासन को किसी भी प्रकार के सामाजिक या राजनीतिक दबाव के आगे झुकने के बजाय अदालत के आदेशों का पालन करना चाहिए। उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि निर्देशों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।
भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर लंबे समय से धार्मिक और कानूनी विवाद का विषय बना हुआ है। परिसर को लेकर हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्ष अपने-अपने धार्मिक अधिकारों का दावा करते रहे हैं। मामला फिलहाल विभिन्न कानूनी पहलुओं के साथ सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है और अदालत समय-समय पर अंतरिम व्यवस्थाओं को लेकर निर्देश जारी कर रही है।
हाल के महीनों में इस मामले को लेकर प्रदेश में संवेदनशील माहौल भी देखने को मिला है। इसी कारण राज्य सरकार ने अदालत के समक्ष कानून-व्यवस्था बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। वहीं मुस्लिम पक्ष का कहना है कि प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी न्यायालय के आदेशों को निष्पक्ष रूप से लागू करना है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में फिलहाल किसी अंतिम निर्णय पर पहुंचने के बजाय अंतरिम व्यवस्था को प्रभावी बनाने पर जोर दिया है। अदालत पहले भी स्पष्ट कर चुकी है कि अंतिम फैसला आने तक सभी पक्षों के अधिकारों और सार्वजनिक शांति के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।
भोजशाला विवाद देश के उन संवेदनशील धार्मिक मामलों में शामिल है, जिनमें कानूनी प्रक्रिया के साथ सामाजिक सौहार्द बनाए रखना भी बड़ी चुनौती माना जाता है। ऐसे में इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई और राज्य सरकार द्वारा दिए जाने वाले जवाब पर सभी पक्षों की नजरें टिकी हुई हैं।




