राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नाई दिल्ली | 29 जुलाई 2026
लोकसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) ने एक बार फिर राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) को पूरी तरह समाप्त करने की मांग उठाई। पार्टी ने कहा कि सरकार पेपर लीक पर सख्त कानून लाने की बात कर रही है, लेकिन असली समस्या स्वयं NEET परीक्षा व्यवस्था है, जिस पर कोई चर्चा नहीं हो रही।
DMK सांसद दयानिधि मारन ने बहस में हिस्सा लेते हुए कहा कि तमिलनाडु शुरू से ही NEET का विरोध करता रहा है और राज्य सरकार ने कई बार केंद्र के सामने अपनी आपत्तियां रखी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार लगातार तमिलनाडु की चिंताओं को नजरअंदाज कर रही है।
मारन ने कहा कि पेपर लीक रोकने के लिए कानून में संशोधन करना स्वागतयोग्य कदम हो सकता है, लेकिन इससे शिक्षा व्यवस्था की मूल समस्या का समाधान नहीं होगा। उनके अनुसार, जब तक NEET जैसी केंद्रीकृत परीक्षा प्रणाली पर पुनर्विचार नहीं किया जाता, तब तक छात्रों की परेशानियां खत्म नहीं होंगी।
DMK सांसद ने केंद्र सरकार की “वन नेशन, वन एग्जाम” जैसी सोच पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भारत जैसे विविधताओं वाले देश में सभी राज्यों पर एक जैसी परीक्षा प्रणाली थोपना उचित नहीं है। प्रत्येक राज्य की अपनी शिक्षा व्यवस्था, सामाजिक परिस्थितियां और छात्रों की अलग-अलग आवश्यकताएं हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा कि तमिलनाडु लंबे समय से मेडिकल प्रवेश के लिए बोर्ड परीक्षा आधारित प्रणाली का समर्थक रहा है और उसका मानना है कि NEET ग्रामीण, आर्थिक रूप से कमजोर और सरकारी स्कूलों के छात्रों के लिए समान अवसर सुनिश्चित नहीं कर पा रहा है।
मारन ने केंद्र से मांग की कि केवल पेपर लीक पर सजा बढ़ाने के बजाय मेडिकल प्रवेश व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की जाए। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में छात्रों के हित में काम करना चाहती है, तो उसे राज्यों की राय का सम्मान करते हुए NEET पर पुनर्विचार करना चाहिए।
लोकसभा में हुई इस बहस के साथ ही NEET को लेकर राजनीतिक मतभेद एक बार फिर खुलकर सामने आ गए हैं। एक ओर केंद्र सरकार परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए कानून को और सख्त करने की बात कर रही है, वहीं विपक्षी दलों का एक वर्ग परीक्षा की पूरी व्यवस्था में बदलाव की मांग पर अड़ा हुआ है। ऐसे में आने वाले दिनों में संसद और देश की राजनीति में NEET का मुद्दा फिर से प्रमुख बहस का विषय बन सकता है।




