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भूल सुधार का दिखावा? तेजस्वी सूर्या बोले— छात्रों ने सरकार से सवाल पूछकर बिल्कुल सही किया

राजनीति | महेंद्र सिंह | ABC NATIONAL NEWS | 28 जुलाई 2026

लोकसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान भारतीय जनता पार्टी के सांसद तेजस्वी सूर्या का बयान उस समय चर्चा का विषय बन गया, जब उन्होंने नीट पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था को लेकर हुए छात्र आंदोलन को लोकतंत्र की ताकत बताते हुए कहा कि युवाओं ने सरकार से सवाल पूछकर बिल्कुल सही किया। हालांकि विपक्ष ने इसे सरकार की “भूल सुधार का दिखावा” करार देते हुए सवाल उठाया कि यदि व्यवस्था पहले से मजबूत थी तो फिर पेपर लीक जैसी घटनाएं क्यों हुईं और लाखों छात्रों को सड़कों पर उतरने की नौबत क्यों आई।

सदन में बोलते हुए तेजस्वी सूर्या ने कहा कि आज का युवा किसी राजनीतिक बहस में नहीं, बल्कि अपने भविष्य को लेकर चिंतित है। उसे इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि अतीत में किसकी सरकार थी। उसकी चिंता केवल इतनी है कि उसकी मेहनत पर कोई पेपर लीक या परीक्षा माफिया पानी न फेर दे। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं ने सरकार से जवाब मांगा और व्यवस्था में सुधार की मांग उठाई, यह लोकतंत्र की स्वस्थ परंपरा का हिस्सा है।

भाजपा सांसद ने नई शिक्षा नीति (एनईपी) का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2020 में लागू की गई इस नीति ने शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार का मार्ग प्रशस्त किया है। उनके अनुसार, तीन दशक से अधिक समय से लंबित बदलावों को वर्तमान सरकार ने लागू किया और अब परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने के लिए कानूनी ढांचे को भी मजबूत किया जा रहा है।

सूर्या ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि कई विपक्षी सांसदों ने परीक्षा सुधार को लेकर अच्छे सुझाव दिए हैं, लेकिन उन्हें यह भी देखना चाहिए कि नई शिक्षा नीति में पहले से कौन-कौन से सुधार शामिल किए जा चुके हैं। उन्होंने शिक्षा जैसे संवेदनशील विषय पर राजनीतिक टकराव के बजाय व्यापक सहमति बनाने की अपील की।

संसद में हुई बहस के दौरान सत्ता पक्ष ने संशोधन विधेयक को पेपर लीक माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की दिशा में बड़ा कदम बताया। सरकार का कहना है कि नए प्रावधानों से संगठित परीक्षा घोटालों पर प्रभावी अंकुश लगेगा, जांच एजेंसियों को अधिक अधिकार मिलेंगे और दोषियों के खिलाफ कठोर दंड सुनिश्चित किया जाएगा।

दूसरी ओर विपक्ष ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि केवल नया कानून लाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। विपक्षी सांसदों का तर्क था कि जवाबदेही तय किए बिना और परीक्षा कराने वाली संस्थाओं की कार्यप्रणाली में सुधार किए बिना ऐसे कानून केवल “भूल सुधार का दिखावा” बनकर रह जाएंगे। विपक्ष ने हाल के छात्र आंदोलनों, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई कार्रवाई और परीक्षा प्रणाली में लगातार सामने आ रही खामियों का भी मुद्दा उठाया।

गौरतलब है कि नीट पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर देशभर में छात्रों ने व्यापक आंदोलन किया था। इसी मुद्दे पर संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। सरकार इसे परीक्षा प्रणाली को मजबूत करने की दिशा में ऐतिहासिक पहल बता रही है, जबकि विपक्ष का कहना है कि कानून के साथ-साथ पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रशासनिक सुधार ही इस समस्या का स्थायी समाधान हैं।

लोकसभा की इस बहस ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया कि सार्वजनिक परीक्षाओं की विश्वसनीयता अब केवल शिक्षा का विषय नहीं, बल्कि करोड़ों युवाओं के भविष्य और व्यवस्था पर उनके भरोसे से जुड़ा राष्ट्रीय मुद्दा बन चुकी है। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि प्रस्तावित संशोधन कानून बनने के बाद वास्तव में कितना प्रभावी साबित होता है और क्या इससे छात्रों का विश्वास दोबारा पूरी तरह बहाल हो पाता है।

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