राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 28 जुलाई 2026
20 जुलाई को शिक्षा सुधार और NEET पेपर लीक के विरोध में हुए संसद मार्च के दौरान घायल हुए छात्रों की आपबीती अब सामने आने लगी है। कई छात्र अभी भी अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं, कुछ की कई सर्जरी हो चुकी हैं और कुछ को ऐसी चोटें आई हैं जिनका असर शायद जिंदगी भर रहेगा। इसके बावजूद इन छात्रों का कहना है कि उन्हें आंदोलन में शामिल होने का कोई पछतावा नहीं है। उनका मानना है कि यदि उनकी आवाज से परीक्षा व्यवस्था में बदलाव की शुरुआत हुई है, तो उनकी तकलीफ व्यर्थ नहीं गई।
इरशाद के शरीर में धंसे पैलेट, तीन सर्जरी के बाद मिली राहत
25 वर्षीय इरशाद शेख ने बताया कि प्रदर्शन के दौरान उनके चेहरे, गर्दन, कंधे और सीने में कई पैलेट लगे। उन्हें गंभीर हालत में लेडी हार्डिंग अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने तीन सर्जरी कर शरीर में फंसे पैलेट निकाले। फिलहाल उनकी हालत खतरे से बाहर है, लेकिन डॉक्टरों ने पूरी तरह स्वस्थ होने तक दिल्ली में ही रहने की सलाह दी है।
इरशाद ने कहा कि उनके परिवार वाले चाहते हैं कि वह जल्द घर लौट आएं, लेकिन इलाज पूरा होना अभी बाकी है। उनका कहना है कि इतनी गंभीर चोटों के बावजूद उन्हें आंदोलन में शामिल होने का कोई अफसोस नहीं है। उनके मुताबिक शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद उन्हें लगा कि आंदोलन अपने उद्देश्य तक पहुंचा और उनकी पीड़ा बेकार नहीं गई।
‘एक आंख की रोशनी लौटने की उम्मीद लगभग खत्म’
19 वर्षीय साहिल लोछाब इस आंदोलन के सबसे गंभीर रूप से घायल छात्रों में शामिल हैं। उनकी दाहिनी आंख में पैलेट लगा था। उनके पिता दीपक ने बताया कि साहिल का एक और ऑपरेशन होना बाकी है। डॉक्टरों ने परिवार को बताया है कि उनकी आंख की रोशनी वापस आने की संभावना बेहद कम है। पूरा परिवार इस समय केवल उनके इलाज और स्वास्थ्य लाभ पर ध्यान दे रहा है।
‘पुलिस पर भरोसा टूट गया’
18 वर्षीय पत्रकारिता के छात्र विषु ने आरोप लगाया कि वह प्रदर्शन स्थल की ओर जा रहे थे, तभी आंसू गैस छोड़ी गई। उन्होंने दावा किया कि वापस लौटते समय चार पुलिसकर्मियों ने बिना किसी उकसावे के उनके साथ मारपीट की। उनका कहना है कि इस घटना के बाद पुलिस व्यवस्था पर उनका भरोसा टूट गया है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
लाठीचार्ज में फ्रैक्चर, आज भी नहीं भूल पा रहे वह दिन
26 वर्षीय लव कुश प्रजापति ने बताया कि लाठीचार्ज में उनके दोनों घुटनों और टखने में फ्रैक्चर हो गया, जबकि सिर पर भी गंभीर चोट आई। उनका कहना है कि घटना के कई दिन बाद भी वह सामान्य जीवन नहीं जी पा रहे हैं और रात में ठीक से नींद नहीं आती। उनके अनुसार 20 जुलाई की घटना की यादें अब भी उनका पीछा नहीं छोड़ रही हैं।
महिला प्रदर्शनकारी ने भी लगाए गंभीर आरोप
20 वर्षीय आहेली भट्टाचार्य ने दावा किया कि वह अन्य महिलाओं के साथ शांतिपूर्ण मानव श्रृंखला बनाकर प्रदर्शन कर रही थीं। उन्हें उम्मीद थी कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के साथ किसी तरह का बल प्रयोग नहीं होगा, लेकिन उनके अनुसार पुलिस ने वहां भी सख्ती दिखाई। उनका कहना है कि छात्र केवल शिक्षा व्यवस्था में सुधार और निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली की मांग कर रहे थे।
दिल्ली पुलिस का पक्ष भी सामने आया
दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान कुछ प्रदर्शनकारी हिंसक हो गए थे और पथराव किया गया था। पुलिस का दावा है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए परिस्थितियों के अनुसार बल प्रयोग किया गया।
सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में होगी जांच
इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने छात्र आंदोलनों के दौरान पुलिस कार्रवाई से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच की आवश्यकता पर जोर दिया है। अदालत ने संकेत दिया है कि देशभर में हुई ऐसी घटनाओं की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित की जा सकती है। यदि ऐसा होता है तो 20 जुलाई की कार्रवाई, घायल छात्रों के आरोप और पुलिस के पक्ष—सभी की स्वतंत्र जांच की जाएगी।
20 जुलाई की घटना अब केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं रह गई है। यह पुलिस कार्रवाई, नागरिक अधिकारों और लोकतांत्रिक विरोध की सीमाओं पर राष्ट्रीय बहस का विषय बन चुकी है। आने वाले दिनों में न्यायिक जांच और उसके निष्कर्ष इस पूरे विवाद की दिशा तय कर सकते हैं।




