राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 28 जुलाई 2026
20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन चलाने को लेकर अब एक नया और गंभीर तथ्य सामने आया है। पहले दिल्ली पुलिस ने पैलेट गन के इस्तेमाल से इनकार किया था, लेकिन अब एक आधिकारिक जनरल डायरी (General Diary) एंट्री से संकेत मिलता है कि रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) ने दिल्ली पुलिस के एक डीसीपी रैंक के अधिकारी के निर्देश पर एंटी-रायट गन का इस्तेमाल किया था। यदि यह दस्तावेज सही है, तो पूरे मामले का केंद्र अब केवल “पैलेट गन चली या नहीं” से आगे बढ़कर “आदेश किसने दिया?” पर आ गया है।
द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, संसद मार्ग थाने में RAF द्वारा दर्ज जनरल डायरी में उल्लेख है कि CJP के संसद मार्च के दौरान भीड़ को नियंत्रित करने के लिए डीसीपी के आदेश पर RAF के डिप्टी कमांडेंट ने 55 नॉन-इलेक्ट्रिकल शेल, 15 इलेक्ट्रिकल शेल, पांच टियर स्मोक ग्रेनेड और एंटी-रायट गन से प्लास्टिक पैलेट वाले दो बैलिस्टिक कार्ट्रिज दागे। रिपोर्ट में कहा गया है कि यही दस्तावेज पुलिस कार्रवाई की कमांड चेन की ओर इशारा करता है।
इस खुलासे के बाद कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े हो गए हैं। यदि पैलेट गन का इस्तेमाल वास्तव में डीसीपी स्तर के अधिकारी के निर्देश पर हुआ, तो पहले इसके इस्तेमाल से इनकार क्यों किया गया? क्या सरकार और पुलिस के शुरुआती बयान अधूरी जानकारी पर आधारित थे या बाद में सामने आए दस्तावेज उनसे अलग तस्वीर पेश कर रहे हैं?
यह मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि रिपोर्ट के अनुसार राष्ट्रीय राजधानी में किसी बड़े सार्वजनिक प्रदर्शन के दौरान निहत्थे प्रदर्शनकारियों के खिलाफ इस प्रकार की एंटी-रायट गन का इस्तेमाल पहली बार सामने आया है। इससे पहले भी इस कार्रवाई को लेकर कई घायल प्रदर्शनकारियों के इलाज की खबरें सामने आई थीं।
इसी बीच सुप्रीम कोर्ट भी 20 जुलाई की पुलिस कार्रवाई और देशभर में पेपर लीक विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है। अदालत पहले ही कह चुकी है कि शांतिपूर्ण विरोध करना नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है और बड़े प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई के लिए समान राष्ट्रीय दिशानिर्देश बनाने पर विचार किया जा सकता है।
उधर, RAF की आंतरिक समीक्षा में भी भीड़ नियंत्रण के दौरान अपनाए गए कुछ तरीकों पर सवाल उठने की जानकारी सामने आ चुकी है। इससे यह बहस और तेज हो गई है कि क्या 20 जुलाई को भीड़ नियंत्रण के दौरान निर्धारित मानकों का पूरी तरह पालन किया गया था।
अब पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू कमांड की जवाबदेही बन गया है। यदि किसी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के निर्देश पर एंटी-रायट गन का इस्तेमाल हुआ था, तो आदेश किन परिस्थितियों में दिया गया, क्या उससे पहले सभी वैकल्पिक उपाय अपनाए गए थे और क्या उस कार्रवाई के लिए तय मानक प्रक्रियाओं (SOP) का पालन किया गया था—इन सभी सवालों के जवाब जांच और आधिकारिक रिकॉर्ड से सामने आने बाकी हैं।
राजनीतिक रूप से भी यह मामला सरकार के लिए चुनौती बनता जा रहा है। विपक्ष पहले ही संसद में 20 जुलाई की कार्रवाई पर चर्चा और जवाबदेही की मांग कर रहा है। अब आधिकारिक दस्तावेज सामने आने के बाद यह विवाद और गहरा सकता है। ऐसे में जांच के निष्कर्ष और सरकार का आधिकारिक पक्ष आने वाले दिनों में इस पूरे मामले की दिशा तय करेंगे।




